Uttarakhand politics: दिल्ली से लेकर देहरादून तक सामने आई दो तस्वीरें, जानिए इनके सियासी मायने
Uttarakhand politics भाजपा, कांग्रेस के दिग्गजों की मुलाकात
उत्तराखंड की सियासत का कई दिनों से पारा चढ़ा हुआ है। सत्ताधारी भाजपा से लेकर मुख्य विपक्षी कांग्रेस में नेताओं के बीच वर्चस्व की जंग देखने को मिल रही है। इस बीच दो तस्वीरें सामने आई हैं। जिसके अब सियासी मायने तलाशे जा रहे हैं। दिल्ली में एक विवाह कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की मुलाकात हुई तो देहरादून स्थित कांग्रेस भवन में प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह की मुलाकात हुई।

तीरथ सिंह कर चुके हैं धामी सरकार पर हमला
बता दें कि बीते दिनों में उत्तराखंड की सियासत में भाजपा के अंदर धामी सरकार के खिलाफ बयानबाजी कर घेरने में भाजपा के पूर्व सीएम तीरथ सिंह और त्रिवेंद्र सिंह ही नजर आए। जिसकी शुरूआत तीरथ सिंह रावत ने ये कहकर की कि राज्य में बिना कमीशन के कोई काम नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में बिना परसेंटेज, कमीशन के कोई अपना काम नहीं करवा सकता है। तीरथ सिंह रावत ने कहा कि उन्हें इस बात को कहना नहीं चाहिए लेकिन वो इस बात को बता रहे हैं। तीरथ सिंह रावत के इस बयान को धामी सरकार पर हमला करने से जोड़ा गया। तीरथ के बाद पूर्व सीएम त्रिवेंद्र ने भी धामी सरकार के कार्यकाल में स्मार्ट सिटी के कामों पर सवाल उठाए। जिसके बाद कांग्रेस के बड़े नेता और पूर्व सीएम हरीश रावत को भी भाजपा और धामी सरकार पर हमला करने का मौका मिल गया। ऐसे मे तीरथ और धामी के बीच राजनैतिक रिश्ते खराब होने की चर्चा शुरू हो गई। लेकिन गुरूवार को दिल्ली में एक शादी समारोह में जब दोनों नेता मिले तो माहौल बदला हुआ नजर आया। इस तस्वीर को देखकर भाजपाई जरूर राहत महसूस कर रहे होंगे। हालांकि दोनों के बीच बातचीत क्या हुई। ये साफ नहीं है।

प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह की मुलाकात हुई
दूसरी तस्वीर देहरादून स्थित कांग्रेस भवन की है। प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह की मुलाकात हुई तो इसके भी सियासी मायने तलाशे जाने लगे हैं। राजनीति के जानकारों का कहना है कि हाईकमान दोनों नेताओं के बीच की दूरियों को लेकर खुश नहीं है। जिस तरह से प्रीतम सिंह के सचिवालय कूच कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा नजर नहीं आए। उससे पार्टी के अंदर गलत संदेश जाने की खबरें भी सामने आई हैं। दावा है कि ऐसे में करन माहरा प्रीतम सिंह से मिलकर सभी तरह के मनभेद दूर करने की कोशिश में जुटे हैं। प्रीतम सिंह ने जब सचिवालय कूच का ऐलान किया तो प्रदेश संगठन को विश्वास में नहीं लिया। इतना ही नहीं प्रीतम सिंह के किसी भी पोस्टर में प्रदेश संगठन को कोई चेहरा नजर नहीं आया। सचिवालय कूच के दौरान भी संगठन के उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना के अलावा कोई भी नहीं पहुंचा।

प्रीतम को मनाने और एकजुट करने की कवायद से जोड़कर देखा जा रहा
प्रदेश संगठन ने पहले ही प्रीतम के कूच से किनारा कर दिया था। हालांकि कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य समेत 14 विधायक इस दौरान परेड ग्राउंड में एकजुट होकर प्रीतम के साथ खड़े नजर आए। जिससे एक बार फिर प्रीतम सिंह अपनी शक्ति का एहसास कराने में कामयाब रहे। अब कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा इस तरह की बातों से इनकार कर पार्टी के एकजुट करने की बात कर रहे हैं। करन माहरा ने कहा कि वे खुद और हरीश रावत, सचिवालय कूच के कार्यक्रम के दौरान देहरादून से बाहर थे। लेकिन करन माहरा हरीश रावत के हरिद्वार जिंदाबाद यात्रा में जरूर शामिल हुए। लेकिन इन सबके बीच करन माहरा की प्रीतम सिंह के साथ हुई मुलाकात से एक बार फिर सियासत गरमा गई है। जिससे एक बार फिर कांग्रेस के अंदरखाने भी प्रीतम को मनाने और एकजुट करने की कवायद से जोड़कर देखा जा रहा है।












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