Uttarakhand: दिल्ली की रैट माइनिंग टीम के हाथ में अब आखिरी घंटो का अभियान, ऐसे होगा 'ऑपरेशन सिलक्यारा' पूरा

Uttarakhand उत्तरकाशी की सिल्क्यारा टनल में 17 दिन से फंसे 41 मजदूरों को बाहर निकालने के लिए युद्ध स्तर पर रेस्क्यू अभियान चल रहा है। इस बीच सिल्क्यारा में अब हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि जल्द ही रेस्क्यू अभियान को पूरा कर लिया जाएगा। जिसके लिए कुछ घंटो का इंतजार बचा हुआ है।

Now the last hour campaign hands of Delhi rat mining team how Operation Silkyara will be completed.

इस पूरे अभियान को पूरा करवाने में अब रैट माइनिंग टीम के श्रमिकों पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। जिसमें दिल्ली से आए 12 लोग दिन रात एक कर काम में जुटे हैं। इस टीम के सदस्य मुन्ना ने बताया कि अब करीब 6 मीटर ही काम बचा हुआ है। उनकी दिल्ली से आई 12 लोगों की टीम इस काम को अंजाम देकर रहेंगे। कहा कि जल्द ही खुदाई का काम पूरा करने की कोशिश की जा रही है।

मुन्ना ने बताया कि वे कल सुबह 9 बजे अंदर काम के लिए गए थे, इसके बाद शाम को 4 बजे आए। इसके बाद रात भर काम किया। मुन्ना के अनुसार 800 एमएम के अंदर 5 मीटर वे खुदाई कर चुके हैं। अब 6 मीटर का काम ही शेष बचा हुआ है। उन्होंने बताया कि अंदर कई चुनौतियां हैं। जिनमें हार्ड रोक, पाइप, सरिया और ऑक्सीजन की कमी भी है। लेकिन वे अंदर फंसे सभी बंदों (मजदूरों) को बाहर निकाल कर ही दम लेंगे।

ऑपरेशन सिलक्यारा में अब तक कई टीमों, एजेंसियों और एक्सपर्ट ने अपने-अपने तरीके इस पूरे अभियान को अंजाम तक पहुंचाने में पूरा जोर लगाया है। पहले मजदूरों को बाहर निकालने के लिए एस्कैप टनल तैयार करने के लिए आगर मशीन का सहारा लिया गया। लेकिन जब आगर मशीन के पार्ट्स अंदर ही फंस गए तो फिर मैनुअली काम किया गया।

इसके बाद अब अंतिम चरण का काम पूरा करने के लिए रैट माइनिंग टीम दिन रात एक कर काम पूरा करने में जुटी है। इस टीम में 12 लोग हैं। जो कि दिल्ली से बुलाई गई है। ये लोग शिफ्ट में काम कर रहे हैं। इनके सामने सबसे बड़ी चुनौती 800 एमएम के पाइप के अंदर जाकर सामने चट्टान, हार्ड रोक, पाइप, सरिया को हटाकर पाइप को आगे पुश करवाने के लिए रास्ता तैयार करना है। जो कि आसान नहीं है।

इसमें सबसे बड़ा चेलेंज पाइप के अंदर ऑक्सीजन की कमी को झेलना है। जिसमें कई तरह की मुश्किलें आ रही हैं। इसके अलावा टनल के अंदर गैस कटर, पाइप, ​सीमेंट के हार्ड रोक को हटाने और काटने के लिए जरुरी संसाधन जुटाना भी है। जो कि अंदर ले जाकर विपरीत परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। ऐसे में ये जंग जीतना इतना आसान नहीं है। जितना पहले ही दिन से लग रही है। रैट होल माइनिंग यानी हाथों से खुदाई के जरिए रेस्क्यू ऑपरेशन को पूरा करने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए 12 रैट माइनर्स की टीम उत्तरकाशी में मौजूद है जिन्हें 6-6 की टीम में विभाजित किया गया है।

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