1968 में विमान हादसे में लापता हुए सैनिक का 56 साल बाद घर पहुंचेगा पार्थिव देह,13 साल पहले चल बसीं थी पत्नी
1968 में हिमाचल प्रदेश के रोहतांग दर्रे में वायुसेना के एएन-12 विमान दुर्घटनाग्रस्त होने पर लापता पर लापता हुए सैनिक का पार्थिव शव 56 साल बाद अपने घर पहुंचेगा। रिकार्ड के अनुसार चमोली के नारायण सिंह सेना के मेडिकल कोर में तैनात थे।
उनका पार्थिव शरीर बृहस्पतिवार तक गांव पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।चमोली जिले के थराली तहसील के गांव कोलपुड़ी के नारायण सिंह विमान हादसे में लापता हो गए थे। जो कि सैनिक थे। 56 साल बाद जिन चार सैनिकों के अवशेष मिले हैं उनमें एक कोलपुड़ी गांव के नारायण सिंह का शव भी शामिल है।

नारायण सिंह वर्ष 1968 में हिमाचल प्रदेश के रोहतांग दर्रे में वायुसेना के एएन-12 विमान दुर्घटनाग्रस्त होने पर लापता हो गए थे। 56 साल बाद जिन चार सैनिकों के अवशेष मिले हैं उनमें एक कोलपुड़ी गांव के नारायण सिंह का शव भी शामिल है। सेना के अधिकारियों ने परिजनों को सोमवार को सूचना दी। उन्होंने बताया कि जेब में मिले पर्स में एक कागज में नारायण सिंह ग्राम कोलपुड़ी और बसंती देवी नाम दर्ज था। साथ ही उनकी वर्दी के नेम प्लेट पर भी उनका नाम लिखा था।
सेना के अधिकारियों ने बताया कि बर्फ में शव सुरक्षित था, लेकिन बर्फ से बाहर निकालने के बाद शव गलने लगा है, जिससे उसे सुरक्षित किया जा रहा है। साथ ही उनका डीएनए सैंपल लिया जा रहा है। सैनिक नारायण सिंह की पत्नी बसंती देवी की 2011 में मृत्यु हो गई। परिजनों ने बताया कि नारायण सिंह सेना में तैनात थे। वह साल में एक बार घर आते थे, अक्सर पत्रों से ही हाल पता लगता था।
एक बार एक टेलीग्राम आया जिसमें अंग्रेजी में विमान के लापता होने और उसमें नारायण सिंह के लापता होने की बात लिखी थी। तब से सैनिक को कोई पता नहीं चला। पत्नी और परिजन इंतजार करते रहे। अब 56 साल बाद सैनिक का पार्थिव देह घर पहुंचने की जानकारी मिलने के बाद हर कोई गमगीन है। एक बार फिर 56 साल पुरानी यादें ताजा हो गई है। 1965 के भारत-पाक युद्ध में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वे एएमसी में नियुक्त थे।












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