उत्तराखंड कांग्रेस के नए कप्तान करन माहरा से विधायक टीम-11 की नाराजगी, जानिए क्या है मसला

कांग्रेस के कार्यक्रमों में 19 में से 11 विधायक नदारद

देहरादून, 18 अप्रैल। उत्तराखंड में कांग्रेस के नए कप्तान करन माहरा के लिए संगठन को एकजुट रखने की चुनौती सबसे बड़ा चेलेंज साबित होगा। प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी संभालने से पहले ही जिस तरह की रार कांग्रेस में मची है, उसका असर करन माहरा के पदभार ग्रहण में भी नजर आया। जब उनके 19 में से 11 विधायक नदारद रहे। इतना ही नहीं नेता प्रतिपक्ष बनाए गए यशपाल आर्य के पदभार ग्रहण में भी अधिकतर विधायक गायब रहे। जिससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि कांग्रेस में गुटबाजी किस हद तक हावी है। खास बात ये है कि इन दोनों कार्यक्रमों में पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह की गैरमौजूदगी से साफ हो गया कि वे अपने अलग तरीके से कांग्रेस में रहकर काम करेंगे।

MLA Team-11s displeasure from the new captain of Uttarakhand Congress, Karan Mahara, know what is the issue

प्रीतम सिंह समेत 11 विधायक नहीं पहुंचे कार्यक्रमों में
प्रदेश में मिली करारी हार के बाद भी कांग्रेस अब तक सबक नहीं ले पाई है। हालात ये हैं कि कांग्रेस के किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रमों में सीनियर नेताओं से लेकर विधायकों में एकजुटता नजर नहीं आ रही है। रविवार को नए प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने अपना पदभार ग्रहण किया तो सोमवार को नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कुर्सी संभाली। लेकिन दोनों ही कार्यक्रमों में अधिकतर विधायक और सीनियर नेता गायब रहे। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है, कि कांग्रेस के अंदर किस कदर नाराजगी है। प्रदेश प्रभारी देवेन्द्र यादव प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के पदभार ग्रहण में मौजूद रहे। सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह के मौजूद न रहने से हुई। प्रीतम सिंह पहले ही​ दिन से हाईकमान और प्रदेश प्रभारी से नाराज चल रहे हैं। प्रीतम सिंह के कार्यक्रम में न पहुंचने से कांग्रेस असहज महसूस कर रही है। इसके अलावा प्रीतम समेत 11 विधायक प्रदेश अध्यक्ष के कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। प्रदेश अध्यक्ष का पदभार लेने के बाद माहरा ने कहा कि मेरी टीम छोटी होगी लेकिन मजबूत होगी। माहरा ने कहा कि मैं पहले पूरे उत्तराखंड का दौरा करूंगा. हर कार्यकर्ता की नब्ज टटोलूंगा, लोगों के बीच जाऊंगा, जो कांग्रेस में काम नहीं कर सकता, उसकी यहां कोई जरूरत नहीं है। एक मजबूत टीम के साथ काम करूंगा।
गढ़वाल की अनदेखी पर खुलकर रखी बात
गढ़वाल के कई नेताओं ने भी इस कार्यकम से दूरी बनाई। प्रदेश अध्यक्ष के कार्यभार ग्रहण में पूर्व सीएम हरीश रावत और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल भी मौजूद रहे। हालांकि दोनों नेताओं ने मंच से भी अपने मन की भावनाओं और कांग्रेस के अंदर चल रही गुटबाजी को लेकर सीधे तौर पर सवाल खड़े किए। पूर्व सीएम हरीश रावत ने मंच से कहा कि हम क्षेत्रीय संतुलन साधने में पीछे रह गये। इस संतुलन को पार्टी नेतृत्व द्वारा सुधारा जाना चाहिए। हरीश रावत ने कहा कि असंतुलन को साधा जा सकेगा तो सब मिलकर काम करेंगे। हाईकमान के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले हरीश धामी ने भी कार्यक्रम से दूरी बनाई रखी। इस बीच उनका एक वीडियो सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो रहा है, जहां धामी 2027 में कांग्रेस के टिकट पर न लड़ने का ऐलान करते हुए सुनाई दे रहे हैं। वे अपनी अनदेखी को लेकर नाराजगी जता रहे हैं।

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