Mallikarjun Kharge कुर्सी संभालते ही उत्तराखंड कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी का ऐलान जल्द, ये हैं चुनौतियां

प्रदेश कार्यकारिणी के पदाधिकारियों के नामों की घोषणा

Mallikarjun Kharge कांग्रेस के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कुर्सी संभालते ही अब लंबे समय से इंतजार में बैठे प्रदेश के कांग्रेसियों को जल्द ही पीसीसी में अहम जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं। ऐसे में साफ है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी की नई कार्यकारिणी शीघ्र ही वजूद में आ सकती है। प्रदेश कार्यकारिणी में 30 उपाध्यक्ष, 40 महामंत्री और 70 के करीब सचिवों के नामों की घोषणा होनी है।

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हरीश रावत को मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में बनी कांग्रेस की संचालन समिति में जगह मिली

ब्लाक और जिलाध्यक्षों के नामों की सूची केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण के पास पहुंच चुकी है। अब केंद्रीय संगठन के मुहर का इंतजार है। उधर उत्तराखंड कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में बनी कांग्रेस की संचालन समिति में जगह मिली है। खरगे ने वर्किंग कमेटी के स्थान पर 47 सदस्यों की संचालन समिति का एलान किया है, हरीश रावत उत्तराखंड से एकमात्र नेता हैं। जिनको राष्ट्रीय अध्यक्ष के नेतृत्व में बनी संचालन समिति में जगह दी गई है। ऐसे में प्रदेश के दूसरे नेताओं को पीसीसी में किस तरह संतुलन किया जाता है। ये देखना दिलचस्प होगा।

प्रदेश कार्यकारिणी में 30 उपाध्यक्ष, 40 महामंत्री और 70 के करीब सचिवों की घोषणा होनी है

उत्तराखंड में कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। शीघ्र ही 26 जिलाध्यक्षों और 225 ब्लाक अध्यक्षों के नाम की घोषणा हो सकती है। प्रदेश कार्यकारिणी में 30 उपाध्यक्ष, 40 महामंत्री और 70 के करीब सचिवों के नामों की घोषणा होनी है। पार्टी सूत्रों की मानें तो प्रदेश कार्यकारिणी के पदाधिकारियों के नामों की घोषणा दो चरणों में हो सकती है। इससे पूर्व 225 पीसीसी सदस्यों में से 222 सदस्यों को चुना जा चुका हैए अब आठ पीसीसी सदस्य पर एक एआईसीसी सदस्य चुना जाएगा। इसके अलावा प्रदेश प्रवक्ताओंए विभागों और प्रकोष्ठों के अध्यक्षों और संयोजकों की घोषणा की शुरूआत हो चुकी है।

साढ़े 6 माह बाद भी पीसीसी का विस्तार नहीं

कांग्रेस ने बीते 10 अप्रैल को करन माहरा के हाथों पीसीसी की कमान सौंपी थी। लेकिन अब तक साढ़े 6 माह बाद भी पीसीसी का विस्तार नहीं कर पाए हैं। इससे कांग्रेस के अंदर ही कार्यकर्ताओं में मायूसी साफ नजर आ रही है। जबकि भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को जुलाई में कमान मिलते ही अगस्त से विस्तार करना शुरू कर दिया था। ऐसे में दानों दलों के बीच जिस तरह की आगे रहने की हौड़ देखने को मिलती है, उसमें भाजपा कहीं आगे नजर आ रही है। इससे कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में असंतोष भी नजर आता है। इसके साथ ही कांग्रेस के अंदर खेमेबाजी भी जबरदस्त चरम पर है। एक तरफ हरीश रावत खेमा तो दूसरे तरफ प्रीतम सिंह खेमा सक्रिय है। जो कि हर जगह अपने कार्यकर्ताओं को आगे देखने के लिए जोर लगाते रहते हैं। ऐसे में करन माहरा के लिए दोनों खेमों को संतुष्ट करना सबसे बड़ी चुनौती है। ये चुनौती सिर्फ करन माहरा के लिए ही नहीं है बल्कि नए राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के सामने भी होगी कि वे किस तरह एक संतुलन बिठाकर दोनों नेताओं को संतुष्ट करते हैं।

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