इस दिवाली कुछ नया करते हैं...जानिए देहरादून की सड़कों पर स्लोगन और डॉग्स लेकर क्यों निकले युवा
देहरादून की सड़कों पर एक हाथ में स्लोगन और दूसरे हाथ में डॉग्स लेकर कुछ युवक दिवाली पर लोगों को अवेयर करते नजर आ रहे हैं। जो कि सबको एक ही संदेश दे रहे हैं कि इस दिवाली कुछ नया करते है बेजुबानों पर भी दया करते हैं। ये युवा लोगों से अपील कर रहे हैं कि दिवाली पर पटाखे फोडते हुए कुछ बातों का विशेष ख्याल रखें। खासकर जानवरों से दूर ही पटाखे फोड़ें। जिससे उनको कोई परेशानी न हो।

दून एनिमल वेलफेयर संस्था ने दिवाली पर बेजुबानों को पटाखों से बचाने की मुहिम शुरू की है। जिनका स्लोगन है दिवाली पर पटाखे फोड़े लेकिन बेजुबानों से दूर फोड़े। इस स्लोगन के साथ संस्था ने देहरादून में भीड़ भाड़ वाले क्षेत्रों में लोगो को जागरूक कर रहे हैं। साथ ही बेजुबानों को दिवाली पर पटाखो से बचाने के लिए निवेदन भी कर रहे हैं।
संस्था ने शोर से जानवरों को होने वाली परेशानियों के बारे में जागरूकता फैला रहे संस्था के अमित कुमार ने बताया कि डॉग्स के कान काफी संवेदनशील होते हैं और उन्हें शोर से बचाना चाहिए। दिवाली की रात देशभर में चारों ओर पटाखों का ही शोर होता है। इस शोर-शराबे के बीच लोग अपने आसपास और अपने पालतू जानवरों के बारे में भूल जाते हैं। वो भूल जाते हैं कि यह दिन इन बेजुबानों के लिए कितना खतरनाक साबित हो सकता है।
दून एनिमल वेलफेयर श्री कृष्णा धाम गौशाला के आशु अरोड़ा ने बताया कि वे देहरादून में 40 से ज्यादा रैलियां निकाल चुके हैं। इसके जरिए लोगों को अवेयर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोई वे जानवर हो सभी का दिवाली में खास ध्यान रखने की जरुरत है।
खासकर पालतु जानवरों का जिनका कोई सहारा नहीं होता है। उनकी संस्था के कई लोग इस वजह से पटाखे नहीं फोड़ते हैं। दून एनिमल वेलफेयर के को-फाउंडर अमित पाल ने कहा कि गौ-माता की दुर्दशा के प्रति लोगों को जागरूक करने का काम कर रहे हैं। एक समय था जब गाय के दूध से दिवाली के लिए मिष्ठान तैयार किए जाते थे लेकिन आज गायों को सड़कों पर ऐसे ही खुला छोड़ दिया जाता है। ऐसे में जानवरों को त्योहारों पर खास ध्यान देने की जरुरत है।












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