जानिए, कौन हैं राज्य स्थापना दिवस पर उत्तराखंड गौरव सम्मान पाने वाली 5 हस्तियां
डॉ.अनिल जोशी, बछेंद्री पाल, नरेंद्र सिंह नेगी, रस्किन बांड, पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय नारायण दत्त तिवारी को मिला सम्मान
देहरादून, 9 नवंबर। उत्तराखंड सरकार ने राज्य स्थापना दिवस पर उत्तराखंड गौरव सम्मान देने का ऐलान किया है। इसके लिए उत्तराखंड की 5 हस्तियों का चयन हुआ है। पर्यावरण के क्षेत्र में डॉ.अनिल जोशी, साहसिक खेल के लिए बछेंद्री पाल, संस्कृति के लिए लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी को और साहित्य के क्षेत्र में रस्किन बांड को इस पुरस्कार के लिए चुना गया है। पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय नारायण दत्त तिवारी को मरणोपरांत चयनित किया गया है। उत्तराखंड की इन 5 हस्तियों के बारे में आइए जानते हैं।

स्वर्गीय नारायण दत्त तिवारी
एनडी तिवारी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री रहे थे। जो कि कांग्रेस पार्टी से जुड़े रहे। नारायण दत्त तिवारी का जन्म 18 अक्टूबर 1925 को नैनीताल में हुआ था। 18 अक्टूबर 2018 में तिवारी का निधन हुआ था। आजादी के संघर्ष में भाग लेकर एनडी तिवारी ने अपनी राजनीति की शुरुआत की थी। वह कुछ समय तक नैनीताल की जेल में भी रहे थे। इसके बाद इलाहाबाद यूनिवर्सिटी गए और 1947 में छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए। आगे चलकर उनकी गिनती कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में होने लगी। वह उत्तर प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री (1976-77, 1984-85, 1988-89) और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री (2002-07) के रूप में कार्यरत थे। 1986 और 1988 के बीच, उन्होंने प्रधान मंत्री राजीव गांधी के मंत्रिमंडल में पहली बार विदेश मामलों के मंत्री और फिर वित्त मंत्री के रूप में भी कार्यरत थे। उन्होंने 2007 से 2009 तक आंध्र प्रदेश के राज्यपाल के रूप में भी रहें। उत्तराखंड में औद्योगिकी और टैक्नोलोजी पर सबसे ज्यादा कार्य एनडी तिवारी के शासन काल में हुआ था।

डा. अनिल प्रकाश जोशी
देश के प्रख्यात पर्यावरणविद डा. अनिल प्रकाश जोशी को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को सोमवार को दिल्ली स्थित अपने भवन में पद्मभूषण सम्मान से नवाजा। डा. जोशी को पर्यावरण और हिमालय के संरक्षण की दिशा में किए गए उत्कृष्ट कार्यों के लिए यह सम्मान दिया गया है। डा. अनिल प्रकाश जोशी पर्यावरण की बेहतरी को किए गए अपने कार्यों और प्रयासों के लिए देश-विदेश में जाने जाते हैं। वह हरित कार्यकर्त्ता होने के साथ ही हिमालयन पर्यावरण अध्ययन और संरक्षण संगठन (हेस्को) के संस्थापक भी हैैं। डा. जोशी मुख्य रूप से पारिस्थितिकी तंत्र के विकास और संरक्षण के लिए पारिस्थितिकी समावेशी अर्थव्यवस्था के विचार को लेकर आए। करीब 71 प्रतिशत वन भूभाग वाले उत्तराखंड में ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से पार पाने के लिए डा. जोशी वर्ष 2010 से विभिन्न मंचों से राज्य में सकल पर्यावरणीय उत्पाद (जीईपी) के आकलन की पैरवी करते रहे। जीईपी के महत्व को समझते हुए इसी वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस पर सरकार ने निर्णय लिया कि राज्य में अब जीडीपी की तर्ज पर जीईपी का आकलन किया जाएगा।

रस्किन बॉण्ड
रस्किन बॉण्ड अंग्रेजी भाषा के एक विश्वप्रसिद्ध भारतीय लेखक हैं। इनका जन्म 19 मई 1934 को हिमाचल प्रदेश के कसौली के एक फ़ौजी अस्पताल में हुआ था। इनकी परवरिश शिमला, जामनगर, मसूरी, देहरादून तथा लंदन में हुई। वे अपने परिवार के साथ देहरादून जिला में रहते है। वे अग्रेज़ी मूल के लेखक हैं। उन्होने बिशप कॉटन नामक धर्मशाला में अभ्यास किया। 1999 में भारत सरकार ने उन्हें साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदानों के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया। 2014 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। आवर ट्रीज़ स्टिल ग्रो इन देहरा के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला है। उनकी रचना 'फ्लाइट ऑफ़ पिजन्स' (कबूतरों की उडान) और 'एंग्री रिवर' (अप्रसन्न नदी) नामक कई उपन्यास पर फ़िल्म का रूप ले चुकी हैं।

नरेंद्र सिंह नेगी
नरेन्द्र सिंह नेगी उत्तराखण्ड के गढवाल हिस्से के मशहूर लोक गीतकारों में से एक है। कहा जाता है कि अगर आप उत्तराखण्ड और वहां के लोग, समाज, जीवनशैली, संस्कृति, राजनीति, आदि के बारे में जानना चाहते हो तो, या तो आप किसी महान-विद्वान की पुस्तक पढ लो या फिर नरेन्द्र सिंह नेगी जी के गाने या गीत सुन लो। उनकी श्री नेगी नामक संस्था उत्तराखण्ड कलाकारो के लिए एक लोकप्रिय संस्थाओं मे से एक है। नेगी का जन्म 12 अगस्त 1949 को पौड़ी जिले के पौड़ी गाँव (उत्तराखण्ड) में हुआ। उन्होंने अपने कॅरियर की शुरुआत पौड़ी से की थी और अब तक वे दुनिया भर के कई बडे बडे देशों मे गा चुके हैं। नेगी ने अपने म्यूजिक कॅरियर की शुरुआत गढवाली गीतमाला से की थी और यह "गढवाली गीतमाला" १० अलग-अलग हिस्सों में थी। अब तक नेगी हजार से भी अधिक गाने गा चुके हैं। दुनिया भर में उन्हें कई बार अलग अलग अवसरों पर पुरस्कार से नवाजा गया है। अब तक नेगी की 3 पुस्तके प्रकाशित हो चुकी हैं। नेगी की पहली पुस्तक "खुच कंडी ", दूसरी पुस्तक "गाणियौं की गंगा, स्यणियौं का समोदर" और तीसरी पुस्तक मुठ बोटी की राख है। इसके अलावा उनके चर्चित राजनीतिक गीत 'नौछमी नारेणा' पर 250 पृष्ठों की एक क़िताब 'गाथा एक गीत की: द इनसाइड स्टोरी ऑफ नौछमी नारेणा' भी आ चुकी है।

बछेंद्री पाल
बछेंद्री पाल का जन्म 24 मई 1954 को हुआ था। माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली प्रथम भारतीय महिला है। 1984 में इन्होंने माउंट एवरेस्ट फतह किया था। वे एवरेस्ट की ऊंचाई को छूने वाली दुनिया की पांचवीं महिला पर्वतारोही हैं। बछेंद्री पाल का जन्म नकुरी उत्तरकाशी, उत्तराखंड में हुआ। खेतिहर परिवार में जन्मी बछेंद्री ने बी.एड. तक की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने नौकरी करने के बजाय 'नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग' कोर्स के लिये आवेदन कर दिया। यहां से बछेंद्री के जीवन को नई राह मिली। 1982 में एडवांस कैम्प के तौर पर उन्होंने गंगोत्री (6,672 मीटर) और रूदुगैरा (5,819) की चढ़ाई को पूरा किया। इस कैम्प में बछेंद्री को ब्रिगेडियर ज्ञान सिंह ने बतौर इंस्ट्रक्टर पहली नौकरी दी। बछेंद्री को भारतीय पर्वतारोहण फाउंडेशन से पर्वतारोहण में उत्कृष्टता के लिए स्वर्ण पदक, पद्मश्री, उत्तर प्रदेश सरकार के शिक्षा विभाग ने स्वर्ण पदक, भारत सरकार की और से अर्जुन पुरस्कार समेत कई सम्मान और पुरस्कार मिल चुके हैं।
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