Kedarnath से पहले भुकुंट बाबा की पूजा का रहस्य, जिनके बिना यात्रा है अधूरी, ये है पौराणिक मान्यता

केदारनाथ में पूजा से पहले भुकुंट बाबा की पूजा किए जाने का विधान है और उसके बाद विधिविधान से केदानाथ मंदिर के कपाट खोले जाते हैं। इनके बिना भगवान शिव का दर्शन अधूरा माना गया है।

Kedarnath secret worshiping Bhukunt Baba darshan without journey is incomplete,mythological belief

भगवान शिव के 12 ज्योर्तिलिंग में से एक केदारनाथ धाम के प्रति भक्तों की असीम आस्था है। केदारनाथ के दर्शन के लिए हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि केदारनाथ से पहले किनकी पूजा होती है और इनके बिना भगवान शिव का दर्शन अधूरा माना गया है। ये हैं भगवान भैरवनाथ।

केदारनाथ में भी भुकुंट भैरव भैरवनाथ का मंदिर

मान्यता है कि ये शीतकाल में केदारनाथ मंदिर की रखवाली करते हैं। हिंदू धर्म की मान्‍यताओं के अनुसार, देश में जहां-जहां भगवान शिव के सिद्ध मंदिर हैं, वहां-वहां कालभैरवजी के मंदिर भी हैं। भक्‍त भगवान शिव के दर्शन के साथ भैरव जी के मंदिर में आकर सिर झुकाते हैं तब उनकी तीर्थ यात्रा पूर्ण मानी जाती है। इसी तरह केदारनाथ में भी भुकुंट भैरव भैरवनाथ का मंदिर है।

केदारनाथ का पहला रावल

यहां हर साल केदारनाथ के कपाट खुलने से पहले भैरव मंदिर में पूजापाठ की जाती है। भुकुंट बाबा को केदारनाथ का पहला रावल माना जाता है। उन्‍हें यहां का क्षेत्रपाल माना जाता है। बाबा केदार की पूजा से पहले केदारनाथ भुकुंट बाबा की पूजा किए जाने का विधान है और उसके बाद विधिविधान से केदानाथ मंदिर के कपाट खोले जाते हैं।

बिना छत के स्‍थापित की गई मूर्तियां

भुकुंट भैरव का यह मंदिर केदारनाथ मंदिर से आधा किमी दूर दक्षिण दिशा में स्थित है। यहां मूर्तियां बाबा भैरव की हैं जो बिना छत के स्‍थापित की गई हैं। भैरव को भगवान शिव का ही एक रूप माना जाता है। पुजारियों के अनुसार, हर साल मंदिर के कपाट खोले जाने से पहले मंगलवार और शनिवार को भैरवनाथ की पूजा की जाती है।

भैरों के दर्शन के बिना यात्रा अधूरी

परंपरा के अनुसार, भगवान केदारनाथ की चल विग्रह उत्‍सव डोली के धाम रवाना होने से पहले केदारपुरी के क्षेत्र रक्षक भैरवनाथ की पूजा का विधान है। मान्‍यता रही है कि भगवान केदारनाथ के शीतकालीन गद्दीस्‍थल उखीमठ के ओंकारेश्‍वर मंदिर में विराजमान भैरवनाथ की पूजा के बाद भैरवनाथ केदारपुरी को प्रस्‍थान कर देते हैं। पुराणों में भी बताया गया है कि बिना भैरों के दर्शन के यात्रा अधूरी मानी जाती है।

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