शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर में विराजमान हुए केदारनाथ, 6 माह पंच केदार के यहीं होंगे दर्शन
Kedarnath news Omkareshwar temple बाबा केदार आज अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर में विराजमान हो गए हैं। अब 6 माह बाबा के दर्शन यहीं होंगे। बाबा केदार की पंचमुखी डोली आज ऊखीमठ पहुंची। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में अग्रणी भगवान केदारनाथ की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली शीतकालीन गददीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर विराजमान हो गई है।
इसके साथ ही बाबा केदार की शीतकालीन यात्रा का भी शुभारंभ हो गया है। केदारनाथ धाम के अलावा ओंकारेश्वर मंदिर द्वितीय केदार भगवान मदमहेश्वर का भी शीतकालीन गददीस्थल है। इसके अलावा ओंकारेश्वर मंदिर को पंचकेदार शीतकालीन गददीस्थल भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस मंदिर में एक साथ पंच केदारों के दर्शन किए जाते हैं।

ओंकारेश्वर मंदिर का बनावट भी केदारनाथ मंदिर से काफी मिलता-जुलता है, जहां प्रमुख मंदिर का बनाव केदारनाथ मंदिर के जैसा ही है। हालांकि यहां मंदिर का प्रांगण बड़ा है। जिसमें सुंदर नक्काशी से मंदिर की दीवारें सजी हुई हैं। मान्यता है कि जो फल केदारनाथ मंदिर के दर्शन से मिलते हैं, वहीं यहां मिलते हैं।
केदारनाथ भगवान की पंचमुखी डोली सेना के बैंड की भक्तिमय धुनों तथा जय बाबा केदारनाथ के उदघोष के साथ विभिन्न पड़ावों से होते हुये शनिवार दोपहर शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में विराजमान हो गयी है। यहीं पंचमुखी मूर्ति के दर्शन होंगे।
इस मंदिर के निर्माण की कथा द्वापर युग से जुड़ी हुई है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, बाणासुर, भगवान शिव का परम भक्त था। उसकी बेटी का नाम उषा था, जिसका विवाह भगवान कृष्ण के पोते अनिरुद्ध से इसी स्थान पर हुआ था। देवी उषा के नाम पर इस तीर्थ स्थल को उषामठ के नाम से जाना जाता था, लेकिन समय के साथ इसका नाम उखामठ और फिर ऊखीमठ नाम पड़ा गया।
ग्यारहवें ज्योर्तिलिंग केदारनाथ धाम के कपाट बीते गुरूवार 23 अक्टूबर भैयादूज के अवसर पर शीतकाल के लिए बंद हुए थे। कपाट बंद के बाद रामपुर और विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी होते हुए आज पंचमुखी डोली ऊखीमठ पहुंची।
बदरीनाथ - केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देश में शीतकालीन यात्रा को प्रोत्साहित किया जायेगा। उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान केदारनाथ के शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर पहुंचकर भगवान केदारनाथ की शीतकालीन पूजाओं में शामिल होने की अपील की।












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