Kedarnath Assembly by-election 2024: देहरादून से लेकर दिल्ली तक टिकी निगाहें, जानिए इतिहास, रिकॉर्ड और मिथक
Kedarnath Assembly by-election 2024: केदारनाथ विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए आज वोटिंग हो रही है। करीब 90 हजार मतदाता वाली इस सीट पर अब धीरे-धीरे मतदाताओं में उत्साह नजर आने लगा है। सबकी निगाहें उपचुनाव के मतप्रतिशत पर भी टिकी हैं। इस सीट का परिणाम देहरादून से लेकर दिल्ली तक गुंजना तय है।
भाजपा की दिवंगत विधायक शैलारानी रावत के निधन के बाद खाली हुई इस सीट पर उपचुनाव हो रहा है। लेकिन जिन परिस्थितियों में आज उपचुनाव हो रहा है, उससे सियासी दल काफी उत्सुक हैं। खासकर कांग्रेस। अयोध्या, बदरीनाथ में भाजपा की हार के बाद से कांग्रेस के अंदर ऐसी सीटों जो कि हिंदू आस्था के प्रतीक मानी जाती है, उन पर खास नजर है।

भाजपा को हराकर कांग्रेस देशभर में संदेश देना चाहेगी कि सनातन की बात करने वालों को जनता अब नकारने लगी है। उधर भाजपा के सामने केदारनाथ उपचुनाव को हर हाल में जीतने का लक्ष्य है। कांग्रेस जिस तरह से मनोवैज्ञानिक जीत के साथ अति उत्साहित है। उसे भाजपा खुद पर कभी हावी नहीं होने देगी। ऐसे में केदारनाथ उपचुनाव भाजपा, कांग्रेस दोनों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बना हुआ है। अब बात करते हैं केदारनाथ विधानसभा सीट के इतिहास, मिथक और रिकॉर्ड पर। केदारनाथ विधानसभा सीट पर अब तक ज्यादातर महिला विधायक ही चुनकर आई।
लेकिन मनोज रावत एक बार कांग्रेस के टिकट पर ही विधायक बनकर पहले पुरुष विधायक रह चुके हैं। इसके अलावा आशा नौटियाल पहली महिला, पहली विधायक के साथ ही दो बार की विधायक का रिकॉर्ड अपने नाम कर चुकी है। इसके अलावा मनोज रावत और आशा नौटियाल इससे पहले एक बार पहले भी आमने सामने हो चुके हैं जिसमें मनोज रावत को जीत मिली थी। हालांकि तब आशा नौटियाल निर्दलीय चुनाव लड़ी थी।
मनोज के सामने दो रिकॉर्ड बनाने का मौका है, दूसरी बार के विधायक और आशा नौटियाल को दो बार हराने का मौका। जबकि आशा नौटियाल के सामने तीसरी बार विधायक बनने यानि हैट्रिक लगाने का मौका है। ऐसे में सबकी नजर केदारनाथ उपचुनाव के परिणाम पर टिकी हैं।
केदारनाथ विधानसभा सीट पर तीन बार भाजपा जबकि दो बार कांग्रेस का कब्जा रहा है। ऐसे में कांग्रेस के पास भाजपा से हिसाब बराबर करने का मौका भी है। हालांकि इस सीट पर उपचुनाव पहली बार हो रहा है और उपचुनाव की तरह इस बार दिवंगत विधायक के परिवार को टिकट नहीं दिया गया है। जिससे ये मुकाबला रोचक नजर आ रहा है।
केदारनाथ सीट पर निर्दलीय भी हमेशा निर्णायक की भूमिका में रहते आए हैं। पिछली बार निर्दलीय कुलदीप रावत दूसरे नंबर पर रहे थे, इस बार वे भाजपा के साथ हैं, ऐसे में ये भी देखना दिलचस्प होगा कि निर्दलीय या दूसरे प्रत्याशी कितना वोट लेकर आते हैं और नोटा को कितने लोग दबाते हैं।
केदारनाथ चुनाव से जुड़े रिकॉर्ड:
- आशा नौटियाल दो बार की जबकि मनोज रावत एक बार के विधायक हैं।
- 2017 के विधानसभा चुनाव में मनोज रावत, तब निर्दलीय चुनाव लड़ी आशा नौटियाल को चुनाव हरा चुके हैं।
- भाजपा ने केदारनाथ में इस बार परिपाटी बदलते हुए उपचुनाव में आशा नौटियाल पर दांव खेला है।
- आशा नौटियाल केदारनाथ की पहली महिला विधायक भी बनी थी।
- 2012 में वह कांग्रेस की शैलारानी रावत से मात्र 1900 वोटों से चुनाव हार गईं। इसके बाद शैलारानी रावत ने 2016 में बगावत कर कांग्रेस छोड़ भाजपा ज्वाइन की।
- जिसके बाद पार्टी ने 2017 में आशा नौटियाल का टिकट काटकर शैलारानी को भाजपा का उम्मीदवार बनाया।
- 2022 में भाजपा ने फिर से शैलारानी रावत को टिकट दिया और वह चुनाव जीत गई।
- आशा नौटियाल को इस बार प्रदेश महिला मोर्चा की जिम्मेदारी दी गई।
- यानि 2022 के विधानसभा चुनाव में मनोज रावत का प्रदर्शन काफी खराब रहा। 2022 में मनोज रावत निर्दलीय कुलदीप रावत से भी कम वोट लाकर तीसरे स्थान पर रहे।
केदारनाथ सीट के विधायक
- 2002, 2007 में भाजपा की आशा नौटियाल विधायक बनीं।
- 2012 कांग्रेस की शैलारानी विधायक बनीं।
- 2017 कांग्रेस के मनोज रावत विधायक चुने गए।
- 2022 भाजपा की शैलारानी विधायक बनीं।
2022 विधानसभा चुनाव के परिणाम
- शैलारानी रावत भाजपा 21886
- कुलदीप सिंह रावत निर्दलीय 13423
- मनोज रावत कांग्रेस 12557












Click it and Unblock the Notifications