भारत-चीन बॉर्डर पर जादुंग गांव पर्यटकों से गुलजार, टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनने के लिए तैयार, जानिए कैसे पहुंचे
सरकार की पहल पर भारत चीन सीमा पर बसे गांव फिर से आबाद होते हुए नजर आ रहे हैं। वाइब्रेंट विलेज योजना की तरह सरकार की योजनाओं से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलने के साथ ही फिर से अपने गांव और घरों में लौटने का मौका मिल गया है। इस का सबसे बड़ा उदाहरण है। उत्तरकाशी का जादूंग गांव।
जहां कई पर्यटक पहुंच रहे हैं। गंगोत्री नेशनल पार्क के नैलोंग घाटी मे इस समय बड़ी संख्या मे पर्यटक पहुंच रहे है।उत्तरकाशी में गंगोत्री धाम के अलावा पर्यटक नैलोंग घाटी, जादूंग गांव भी पहुंच रहे है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता, एकांत, खूबसूरत पठार का दीदार करने के लिए कई यात्री व पर्यटकों के पहुंचने का सिलसिला जारी है।

इनर लाइन इलाके मे पड़ने वाले नैलोंग घाटी के लिए उपजिलाधिकारी भटवाड़ी कार्यालय से परमिट जारी होने के बाद ही यहां एक दिवसीय यात्रा पर पहुंच सकते है।। वर्तमान मे जादूँग गांव मे पर्यंटन विभाग होम स्टे निर्माण कार्य करवा रहे है। जिसके बनने के बाद टूरिस्ट यहां रात्रि निवास भी कर सकते हैं।
होटल एसोसिएशन उत्तरकाशी के अध्यक्ष शैलेन्द्र मटुड़ा ने कहा कि इस घाटी में अनेकों रमणिक व खूबसूरत नजारों वाले पर्यटक स्थल हैं, यदि सरकारी स्तर पर इन स्थानों पर पर्यटकों के लिए पर्याप्त मात्रा में मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाती हैँ तो सरकार को अधिक राजस्व की प्राप्ति के साथ स्थानीय लोगों को भी रोजगार उपलब्ध होगा। शैलेंद्र मटूड़ा परिवार और दोस्तों के साथ जादूंग गांव छुट्टी मनाने गए थे।
उन्होंने बताया कि ये प्लेस अब टूरिस्ट हब के रूप में डेवलप हो रही है। परिवार के साथ छुट्टी बिताने के लिए प्राकृतिक सुंदरता के बीच ये जगहें काफी सुंदर और शांत हैं। भविष्य में ये जगह होम स्टे बनने के बाद लोगों के लिए काफी लोकप्रिय बन सकती है। इसके लिए प्रशासन को ओर अधिक प्रयास करने होंगे।
भारत-चीन के बॉर्डर पर प्राकृतिक रोमांच पर्यटन को पर्यटकों के लिए पहले चरण में 6 होमस्टे बन रहे हैं। इसके बाद दूसरे चरण में 17 होमस्टे बनाए जाएंगे। जिसके बाद उम्मीद जताई जा रही है पर्यटकों को ये जगह खास पसंद आएगी। ये गांव 1962 के भारत-चीन युद्ध के समय खाली कराए गए थे।
भारत-चीन अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बसे जादुंग गांव को दोबारा बसाने के लिए पर्यटन विभाग और गढ़वाल मंडल विकास निगम की ओर से 6 होमस्टे के निर्माण का कार्य शुरू हो गया है। योजना के तहत वहां पर मुख्य पैदल रास्तों का टाइल्स के साथ और तीन स्थानों पर व्यू प्वाइंट का निर्माण किया जाना है। जनकताल ट्रेक प्रकृति के अभुद्ध नजारों के बीच रोमांच जादुंग गांव में होमस्टे बनने के बाद पर्यटक यहां आसपास की प्राकृतिक सुंदरता का भी आनंद ले सकेंगे। करीब 10 किमी का जनकताल ट्रेक भी प्रकृति के अभुद्ध नजारों के बीच रोमांच को और बढ़ाएगा। उत्तरकाशी जिला प्रशासन और गंगोत्री नेशनल पार्क जनकताल तक ट्रेकिंग की तैयारी कर रहा है।
उत्तरकाशी के गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत आने वाले नेलांग और जादूंग गांव समुंद्र तल से 11,400 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। 1962 युद्ध से पहले उत्तरकाशी के नेलांग और जादूंग गांव में रोंगपा या भोटिया जनजाति के लोग रहा करते थे। युद्ध के समय किया था शिजादूंग गांवफ्ट युद्ध के दौरान उन्हें बगोरी गांव में शिफ्ट किया गया, तब से कई परिवार आज भी वहीं रह रहे हैं।
युद्ध के बाद नेलांग और के घरों में भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल ने अपनी चौकियां बना ली थी। केंद्र सरकार की वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर बसे गांवों को दोबारा बसाने की ये पहल है। योजना के तहत भारत-चीन युद्ध के समय उत्तरकाशी जनपद में खाली किए गए गांव जादुंग और नेलांग के ग्रामीणों को दोबारा वहां पर बसाने की तैयारी की गई थी। उस समय इन गांवों के ग्रामीणों को हर्षिल के समीप बगोरी गांव में बसाया गया था। ग्रामीण दोबारा गांव में लौटेंगे शीतकाल में यह ग्रामीण डुंडा विकासखंड के वीरपुर गांव में रहते हैं। अब दोबारा ग्रामीण अपने गांव जा सकेंगे।
- जादूंग गांव जाने के लिए पहले उत्तराखंड के उत्तरकाशी पहुंचना होगा। उत्तरकाशी से करीब 80 किमी दूर हर्षिल घाटी के बाद जादुंग गांव जाने के लिए करीब 40 किमी का सड़क मार्ग से दूरी तय करनी होगी। जिसके लिए उत्तरकाशी से पास बनाना होगा।












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