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उत्तराखंड में भारतीय रेल ने तीन साल में 18 नई रेल सेवाएं शुरू की, जानिए कितना बजट हुआ खर्च

Indian Railways भारतीय रेल ने उत्तराखंड में वर्ष 2023-24 से 2025-26 (फरवरी 2026 तक) तीन साल में 18 नई रेल सेवाएं शुरू की है। रेल, सूचना और प्रसारण एवं इलेक्ट्रोनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत और सांसद अजय भट्ट के सवाल पर उत्तराखंड के लिए रेल परियोजनाएं को लेकर जबाव दिया।

वैष्णव ने कहा कि उत्तराखंड में अवसंरचना परियोजनाओं और संरक्षा कार्यों के लिए बजट में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उत्तराखंड में पूर्णतः या आंशिक रूप से पड़ने वाली 40,384 करोड़ रुपये की लागत की कुल 216 किलोमीटर लंबाई की 3 नई रेल लाइनों को स्वीकृति दी गई है।

Indian Railways started 18 new rail services Uttarakhand three years know how much budget spent

लोकसभा में रेल, सूचना और प्रसारण एवं इलेक्ट्रोनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जवाब दिया कि उत्तराखंड में अवसंरचना परियोजनाओं और संरक्षा कार्यों के लिए बजट में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जहां 2009-14 के दौरान औसतन 187 करोड़ रुपये प्रति वर्ष खर्च किए जाते थे, वहीं वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर लगभग 4,641 करोड़ रुपये हो गया है, जो लगभग 25 गुना वृद्धि को दर्शाता है।

01 अप्रैल 2025 की स्थिति के अनुसार, उत्तराखंड में पूर्णतः या आंशिक रूप से पड़ने वाली 40,384 करोड़ रुपये की लागत की कुल 216 किलोमीटर लंबाई की 3 नई रेल लाइनों को स्वीकृति दी गई है। इनमें से 16 किलोमीटर रेल लाइन चालू की जा चुकी है और मार्च 2025 तक 19,898 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं।

देवबंद-रुड़की नई रेल लाइन (27 किमी) का कार्य पूरा हो चुका है, जिससे दिल्ली और देहरादून के बीच की दूरी लगभग 40 किलोमीटर कम हो जाएगी। इसके अतिरिक्त, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग नई रेल लाइन (125 किमी) एक महत्वपूर्ण परियोजना है, जो देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों से होकर गुजरती है और देवप्रयाग तथा कर्णप्रयाग जैसे धार्मिक स्थलों को ऋषिकेश और राष्ट्रीय राजधानी से जोड़ेगी।

इस परियोजना में मुख्य रूप से सुरंगों का निर्माण शामिल है, जिनमें 104 किलोमीटर लंबी 16 मुख्य सुरंगें और लगभग 98 किलोमीटर लंबी 12 बचाव सुरंगें प्रस्तावित हैं। अब तक 99 किलोमीटर मुख्य सुरंगों और 94 किलोमीटर बचाव सुरंगों का निर्माण पूरा हो चुका है। परियोजना को गति देने के लिए 8 प्रवेश मार्ग (कुल 5 किमी) बनाए गए हैं, जो पूरे हो चुके हैं। इसके अलावा 19 बड़े पुलों में से 8 का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और शेष पर कार्य प्रगति पर है। विभिन्न खंडों में सुरंग खुदाई और लाइनिंग का कार्य अधिकांशतः पूर्ण या अंतिम चरण में है।

पिछले तीन वर्षों, अर्थात 2022-23 से 2025-26 तक, उत्तराखंड में कुल 441 किलोमीटर लंबाई के 7 सर्वेक्षण स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें 3 नई लाइनें और 4 दोहरीकरण परियोजनाएं शामिल हैं।

वर्ष 2004-14 के दौरान 4,148 पुलों का निर्माण किया गया था, जबकि 2014-26 (जनवरी 2026 तक) के दौरान यह संख्या बढ़कर 14,024 हो गई है, जिनमें उत्तराखंड के 106 पुल भी शामिल हैं। 01 फरवरी 2026 तक भारतीय रेल में कुल 4,802 ऐसे पुल 1,14,196 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें उत्तराखंड में 158 करोड़ रुपये की लागत से 9 पुल शामिल हैं, जो विभिन्न चरणों में हैं।

रेल मंत्रालय द्वारा "अमृत भारत स्टेशन योजना" के अंतर्गत देशभर में 1,338 स्टेशनों के विकास की योजना बनाई गई है, जिनमें उत्तराखंड के 11 स्टेशन शामिल हैं, जैसे देहरादून, हरिद्वार, हर्रावाला, काशीपुर, काठगोदाम, किच्छा, कोटद्वार, लालकुआं, रामनगर, रुड़की और टनकपुर। इस योजना के तहत स्टेशनों के बुनियादी ढांचे में सुधार, बेहतर प्रतीक्षालय, शौचालय, लिफ्ट-एस्केलेटर, पार्किंग, दिव्यांगजन सुविधाएं, यात्री सूचना प्रणाली और 'एक स्टेशन एक उत्पाद' जैसी पहलें शामिल हैं।

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इसके अतिरिक्त, उत्तराखंड के यात्रियों की सुविधा के लिए भारतीय रेल ने वर्ष 2023-24 से 2025-26 (फरवरी 2026 तक) के बीच 18 नई रेल सेवाएं शुरू की हैं। इनमें लखनऊ-देहरादून वंदे भारत एक्सप्रेस, दौराई-टनकपुर एक्सप्रेस और हरिद्वार-फिरोजपुर कैंट एक्सप्रेस जैसी प्रमुख गाड़ियां शामिल हैं।

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