उत्तराखंड: कोरोना से होने वाली मौत की संख्या में गड़बड़ी! 42 प्रतिशत आंकड़े नहीं पहुंचे कोविड कंट्रोल रूम तक

देहरादून, मई 23। देवभूमि उत्तराखंड में कोरोना महामारी की दूसरी लहर में संक्रमण से होने वाली मौतें लगातार डरा रही हैं। उत्तराखंड के जंगल वाले इलाकों से लगातार शवों को चोरी-छिपे जलाने की तस्वीरें सामने आ रही थी। ऐसे में ये सवाल उठ रहे थे कि मौतों का आधिकारिक आंकड़ा कितना सही है? इस बीच राज्य के आधिकारिक आंकड़ों में गड़बड़ी का मामला सामने आ गया है। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, राज्य में करीब 42 प्रतिशत कोरोना से होने वाली मौतों को आधिकारिक आंकड़ों में शामिल नहीं किया गया है। इसकी वजह अस्पतालों की आंकड़े जारी करने में की गई चूक बताई जा रही है। इस मामले के सामने आने के बाद अब ये तय हो गया है कि उत्तराखंड में कोरोना की दूसरी लहर बहुत अधिक घातक रूप ले चुकी है।

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इन जिलों के अस्पतालों ने आंकड़े नहीं किए साझा

राज्य सरकार ने अपने हेल्थ बुलेटिन में पिछले 6 दिनों से इन मौतों को 'बैकलॉग डेथ' बताया है। आपको बता दें कि राज्य में पिछले सप्ताह 923 मौतें दर्ज की गई। इसके अलावा 384 'बैकलॉग डेथ' रिपोर्ट की गई हैं। राज्य के स्वास्थ्य विभाग के एक डॉक्टर ने बताया है कि हाल ही में हरिद्वार के बाबा बर्फानी अस्पताल को 65 मौतों की जानकारी नहीं देने को लेकर नोटिस जारी किया गया था, जिसके बाद से अब हर कोई अलर्ट पर है। हैराना वाली बात ये है कि मौत के आंकड़ों को नहीं बताने की लिस्ट में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, (ऋषिकेश), अन्य सरकारी अस्पताल और हरिद्वार, पिथौरागढ़, देहरादून के कई प्राइवेट अस्पताल भी इस लिस्ट में शामिल हैं, जिन्होंने कोरोना से होने वाली मौतों को कोविड कंट्रोल रूम के साथ साझा नहीं किया।

मौत के आंकड़ों में गड़बड़ी पर राज्य सरकार की सफाई

राज्य सरकार अब पिछले एक हफ्ते से 'छिपाई गई मौतों' को 'बैकलॉग डेथ' बताकर कोविड टैली में जोड़ रही है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि कुछ मामलों में ये मौतें जिला रिपोर्ट / दैनिक बुलेटिन में दिखाई देती हैं, लेकिन राज्य COVID-19 कंट्रोल रूम को समय पर नहीं मिलती। इसी कमी के चलते ये माना जा रहा है कि राज्य में मौत के आंकड़ों में गड़बड़ी है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सरकार कतई मौत के आंकड़ों को छिपाने की कोशिश नहीं कर रही है।

कोविड कंट्रोल रूम के प्रभारी का बयान

देहरादून में राज्य कोविड कंट्रोल रूम के प्रभारी डॉ अभिषेक त्रिपाठी का कहना है कि राज्य के सरकार और प्राइवेट अस्पताल कोरोना के मरीजों से भरे हुए हैं। इन अस्पतालों में काम करने वाले लोग भी संक्रमित थे। अभिषेक त्रिपाठी का कहना है कि कोविड कंट्रोल रूम के साथ आंकड़े साझा नहीं करने की कई वजह हो सकती है। अब जब वो हमें आंकड़े दे रहे हैं तो हम उन्हें पारदर्शी तरीके से अपडेट कर रहे हैं।

हरिद्वार के इस अस्पताल को मिला था नोटिस

आपको बता दें कि पिछले हफ्ते हरिद्वार के बाबा बर्फानी अस्पताल में 25 अप्रैल से 12 मई तक कोरोना से होने वाली 65 मौतों को कोविड कंट्रोल रूम के साथ शेयर नहीं किया गया था। राज्य सरकार तक जब ये मामला पहुंचा तो सरकार ने अस्पताल को नोटिस जारी किया और कहा कि जो भी अस्पताल मौत के आंकड़ों को छिपाएगा उसे दंड दिया जाएगा। बाबा बर्फानी अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया कि हमने डाटा इकट्ठा किया था और मरने वाले लोगों के परिजनों को प्रमाण पत्र भी नियमित रूप से दिए हैं, लेकिन कोरोना के बढ़ते मामलों के कारण कहीं कुछ गलत हुआ है। बता दें कि ये अस्पताल कुंभ के दौरान कोविड केयर सेंटर भी बना था।

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