चारधाम यात्रा पर निकलें तो यहां की गंगा आरती देखना न भूलें, रह जाएगा सपना अधूरा

हरिद्वार, ऋषिकेश और उत्तरकाशी की गंगा आरती प्रसिद्ध

देहरादून, 19 मई। चारोंधाम के कपाट खुलते ही उत्तराखंड में हर तरफ भक्तिमय माहौल हो जाता है। हर तरफ श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ता है। गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ ​​​जैसे​ विश्व प्रसिद्ध चारधाम में एक बार पहुंचने के लिए लोग सालभर मन्नत मांगते हैं। ऐसे में अगर चारधाम यात्रा करने का आपको मौका मिल रहा है तो आप चारधाम यात्रा के मुख्य पड़ावों पर गंगा आरती में भी शामिल होकर आनंदित महसूस करेंगे। गंगोत्री धाम की गंगा आरती तो खास है ​ही लेकिन रास्ते में गंगा आरती में शामिल होकर यहां का भक्तिमय माहौल आपको आंन​द के सा​थ ही आकर्षित करेगी। जिसमें हरिद्वार, ऋषिकेश और उत्तरकाशी की गंगा आरती सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है।

हरिद्वार में हर की पैड़ी

हरिद्वार में हर की पैड़ी

चारधाम यात्रा का सबसे अहम पड़ाव हरिद्वार है। जहां से गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ सभी धाम का केन्द्र है। ऐसे में हरिद्वार रुककर आप गंगा आरती का आंनद जरुर लें। जो कि सुबह और शाम दो टाइम हर की पैड़ी पर आयोजित होती है। यहां गंगा आरती के लिए प्रसिद्ध है। हरिद्वार में गंगा आरती शाम 6 से 7 के बीच होती है और सुबह 5:30 से 6:30 तक होती है। यहां की आरती अलौकिक, अद्भुत और रोमांचक नजर आती है। पुजारी हाथों में बड़े-बड़े ​​​अग्नि की थाल, कटोरे लेकर एक साथ आरती करते हुए नजर आते हैं। हर तरफ जगमग होते दिये और रोशनी में पूरा माहौल आपको भक्ति में खोने को मजबूर कर देगा। मान्यता है कि यह जगह राजा विक्रम ने बनवाई और भगवान की तपस्या की। भक्त की भक्ति से खुश होकर यहां भगवान विष्णु प्रकट हुए हैं और इस जगह पर उनके पैरों के निशान पड़े थे इसलिए हर की पैड़ी कहा जाता है। हरिद्वार बस स्टेशन और रेलवे स्टेशन से हर की पैड़ी पहुंचा जा सकता है, जो कि मात्र 3 किलोमीटर दूरी पर है। यहां से हवाई अड्डा 30 किलोमीटर दूर पर है।

त्रिवेणी घाट ऋषिकेश में महाआरती

त्रिवेणी घाट ऋषिकेश में महाआरती

योग की नगरी ऋषिकेश के हर घाट पर सुबह शाम गंगा आरती होती है। जिनमें परमार्थ निकेतन घाट, त्रिवेणी घाट, शत्रुघ्न घाट, पूर्णानंद घाट समेत विभिन्न घाटों पर गंगा आरती के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ता है। लेकिन सबसे ज्यादा गंगा आरती के लिए त्रिवेणी घाट और परमार्थ निकेतन प्रसिद्ध है। ऋषिकेश का त्रिवेणी घाट तीर्थनगरी की हृदयस्थली कहा जाता है। त्रिवेणी घाट ऋषिकेश में एक और जगह जो अपनी महाआरती के लिए प्रसिद्ध है। गंगा के तट पर स्थित त्रिवेणी घाट तीर्थनगरी का सबसे बड़ा घाट है। त्रिवेणी घाट पर गंगा, यमुना तथा सरस्वती का मिलन माना जाता है। यहां त्रिवेणी घाट के निकट स्थित ऋषि कुंड से यमुना की धारा गंगा में पहुंचती है, जबकि सरस्वती की धारा यहां प्रत्यक्ष रूप में गंगा में मिलती है। पौराणिक ग्रंथों में भी इसका स्पष्ट उल्लेख मिलता है। यहां पर गंगा स्नान का विशेष महत्व माना जाता है।आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान त्रिवेणी घाट पर प्रत्येक दिन सायंकाल को होने वाली संगीतमय गंगा आरती आकर्षण का केंद्र होती है। गंगा आरती को देखने के लिए यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं।

परमार्थ निकेतन में गंगा आरती

परमार्थ निकेतन में गंगा आरती

परमार्थ निकेतन आश्रम गंगा नदी के तट पर है। परमार्थ निकेतन में गंगा आरती शाम 6 से शाम 7 बजे तक होती है। गंगा आरती के लिए सबसे प्रसिद्ध स्थान परमार्थ निकेतन है। यहांं वैदिक आरती होती है विशेष रूप से वे बच्चे जो यहां वेदों का अध्ययन कर रहे हैं। पहले मंत्रों के जाप भजन गायन प्रार्थना और पवित्र अनुष्ठान के साथ आरती शुरू होती है। यहां की आरती सबसे अलग है। जिसमें भजन, कीर्तन और वैदिक तरीके से गंगा आरती होती है। यहां देश की कई हस्तियां आरती में शामिल होती है। लेकिन इसके साथ ही यहां विदेशियों की सबसे ज्यादा तादात जुटती है। सुबह शाम यहां आरती में शामिल होना अपने में एक सुखद एहसास है जब आप सबकुछ भूलकर खुद को प्रभु के लिए समर्पित कर देते हैं। कह सकते हैं कि चारधाम यात्रा का पूरा अगर आनंद लेना है तो परमार्थ निकेतन जरुर जाकर आरती में शामिल होना न भूलें। परमार्थ निकेतन राम झूला से केवल 500 मीटर और हरिद्वार से 15 किलोमीटर जौलीग्रांट हवाई अड्डे से 20 किलोमीटर दूरी पर है।

मणिकर्णिका घाट पर गंगा आरती

मणिकर्णिका घाट पर गंगा आरती

मां गंगा का उद्गम स्थल गौमुख और गंगोत्री धाम मंदिर का पवित्र स्थान है। गंगोत्री धाम उत्तरकाशी जिले में है जहां एक तरफ भागीरथी तो दूसरा आकर्षक विश्वना​थ मंदिर है। ऐसे में उत्तरकाशी पर्यटक और श्रद्धालुओं का सबसे प्रमुख पड़ाव है। उत्तरकाशी में भी भागीरथी नदी के तट पर कई घाट हैं लेकिन पंजाब​ सिंध क्षेत्र और मणिकर्णिका घाट पर गंगा आरती होती है। मणिकर्णिका घाट की आरती सबसे अलौकिक और इसका अपना अलग ही आनंद है। जिसमें कई श्रद्धालु शामिल होते हैं। गंगोत्री जाने वाले श्रद्धालु उत्तरकाशी में ही रूकना पसंद करते हैं।

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