इस बार गर्मियों में छुट्टियां और पैसे पूरे वसूल,उत्तराखंड के इन हिल स्टेशन में जाकर भूल जाएंगे सबकुछ

गर्मियों में पहाड़ में घूमने की हर किसी की इच्छा रहती है। ऐसे में हर कोई उत्तराखंड के पर्यटक स्थलों पर जाकर छुट्टियां बिताने की प्लानिंग में जुट जाते हैं। हर किसी की कोशिश होती है कि वे नई डेस्टिनेशन पर जाकर कुछ नया एहसास करें, जिससे छुट्टियां और पैसे पूरे वसूल हो जाएं। आइए नजर डालते हैं ऐसे कुछ टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर।

holidays and money are fully recovered in summer Vacation uttarakhand me ghumne ki jagah in hindi

उत्तराखंड में 13 जिले हैं, जिनमें से पहाड़ के उत्तरकाशी, टिहरी, चमोली, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, नैनीताल, अल्मोड़ा, नैनीताल, पिथौरागढ़, चंपावत में कई खूबसूरत टूरिस्ट डेस्टिनेशन हैं। कुछ ऐसी जगह भी हैं जहां टूरिस्ट कम जाते हैं। लेकिन जब एक बार इन जगहों के बारे में जानकारी जुटाते हैं और एक बार पहुंचते हैं तो बार बार इन्हीं जगहों पर रुकने के बारे में सोचते हैं। ऐसे ही कुछ खास डेस्टिनेशन के बारे में जानते हैं।

मुक्तेश्वर कुमाऊं की पहाडियों में बसा सुंदर और रमणीक पर्यटन स्थल हैं। यहां मंदिरों के अलावा नैसर्गिंक सुंदरता भी चारों तरफ नजर आती है। यहां से नंदा देवी, त्रिशूल आदि हिमालय पर्वतों की चोटियां दिखती हैं। पहाड़ी के ऊपर शिवजी का मन्दिर 'मुक्तेश्वर मंदिर' के नाम से प्रसिद्ध है। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 100 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। यहां भगवान शिव के साथ ब्रह्मा, विष्णु, पार्वती, हनुमान और नंदी जी भी विराजमान हैं। मुक्तेश्वर में हिमालय की पर्वत चोटियों के पाछे से उगते सूरज का सुंदर नजारा देखा जा सकता है और नालकंठ, नंदादेवी और त्रिशूल आदि पर्वतश्रेणियां भी देखी जा सकती हैं।

यहां साल भर पहुंचा जा सकता है। लेकिन मार्च से जून और अक्टूबर से नवंबर तक सबसे उपयुक्त समय है। मुक्तेश्वर एक छोटा-सा हिल स्टेशन है इसलिए यहां रहने और खाने के ढेर सारे ऑप्शन तो नहीं मिलेंगे पर रहने-खाने की कोई परेशानी भी नहीं होती है। मुक्तेश्वर के आस-पास देखने के लिए ढेर सारी जगह हैं। यहां से अल्मोड़ा, बिन्सर और नैनीताल पास ही हैं। ये स्टेशन दिल्ली से करीब 350 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। साथ-साथ अपने पारंपरिक रीति-रिवाजों एवं संस्कृति के लिए भी मशहूर है।

हिमालय की गोद में स्थित मिनी स्विट्जरलैंड के नाम से दुनियाभर में मशहूर चोपता वैली विश्व की सबसे ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ मंदिर का बेस कैंप है। यहां मीलों तक फैले मखमली घास के मैदान और उनमें खिले फूलों की सुंदरता देखने योग्य होती है। चोपता की ओर बढते हुए रास्ते में बांस और बुरांश का घना जंगल और मनोहारी दृश्य पर्यटकों को लुभाते हैं।

यहां से तीन किमी की पैदल यात्रा के बाद तेरह हज़ार फुट की ऊंचाई पर तुंगनाथ मंदिर है, जो पंचकेदारों में एक केदार है। चोपता अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए सबसे अलग है। बांज, बुरांश और देवदार सहित अन्य प्रजाति के पेड़ों से घिरे इस क्षेत्र में बुग्याल भी हैं। पर्यटक यहां खुली हवा, खुला आसमान, चारों ओर बर्फबारी और पक्षियों की मधुर आवाज के बीच कैंपिंग का लुत्फ उठाने पहुंचते हैं। चोपता पहुंचने के लिए ऋषिकेश से लगभग 140 किमी पहाड़ी रास्ता तय कर रुद्रप्रयाग पहुंचें. इसके बाद रुद्रप्रयाग से 70 किमी दूर ऊखीमठ होते हुए चोपता तक पहुंचा जाता है।

उत्तराखंड में कश्मीर जैसी कई सुंदरता और स्वर्ग जैसा नजारा देखना हो तो लोहाघाट जरूर जाएं। ज्यादा फेमस तो नहीं लेकिन एक बार लोहाघाट आएंगे तो फिर यहां से जाने का मन नहीं करेगा। जिसने धार्मिक और प्राकृतिक सुंदरता के मामले में कई पर्यटक स्थलों को पीछे छोड़ दिया है। लोहाघाट उत्तराखंड के चंपावत जिले में लोहावती नदी के किनारे स्थित है और यह मंदिरों के लिए खासा मशहूर है। इस जगह से जुड़ी कुछ धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यताएं हैं जो इसे टूरिस्टों के बीच आकर्षण का केंद्र बनाती हैं। खास बात यह है कि लोहाघाट के आसपास कई पॉप्युलर टूरिस्ट स्पॉट्स हैं, जैसे कि श्यामला ताल, देवीधुरा, गुरुद्वारा रीठा साहिब, एबॉट माउंट, वाणासुर का किला, मायावती (अद्वैत) आश्रम और फोर्टी विलेज।

उत्तरकाशी में मोरी के सांकरी से दस किमी दूर समुद्रतल से 12500 फीट की ऊंचाई पर केदारकांठा बुग्याल स्थित है। जहां दूर-दूर तक फैली पहाड़ियों के बीच सूर्योदय और सूर्यास्त का मनमोहक नजारा दिखाई देता है। केदारकांठा से स्वर्गारोहिणी, बंदरपूंछ, व्हाइट माउंटेन, कालानाग, गरूड़ पर्वत श्रृंखलाओं का मनोहारी दृश्य दिखाई देता है। पिछले कुछ वर्षों से जनपद में शीतकाल में सर्वाधिक पर्यटक केदारकांठा का ही रुख कर रहे हैं।

चमोली जिले के प्रसिद्ध औली के अलावा इसके समीपवर्ती पर्यटन स्थल क्वारीपास, तपोवन, नीती घाटी की टिम्मरसैंण बर्फानी बाबा गुफा, गोरसों बुग्याल जैसे पर्यटन स्थलों में भी पर्यटक सेर सपाटे पर जा सकते हैं। क्वारीपास ट्रेकिंग रूट है, जो तपोवन तक जाता है। तपोवन क्षेत्र भविष्य बदरी मंदिर का मुख्य पड़ाव है। यह चीन सीमा क्षेत्र में स्थित है। इससे करीब 40 किलोमीटर दूर टिम्मरसैंण महादेव की गुफा स्थित है। जो बाबा बर्फानी के नाम से जानी जाती है। पर्यटक दिनभर यहां प्राकृतिक नजारों का लुत्फ उठाने के बाद जोशीमठ में रात्रि प्रवास के लिए आ सकते हैं।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+