हरीश रावत ने हरक सिंह से हरिद्वार में ​ऐसे लिया फिर बदला, हरक की सियासी पारी पर उठने लगे सवाल

हरिद्वार सीट पर आखिरकार पूर्व सीएम हरीश रावत अपने बेटे वीरेंद्र रावत को टिकट दिलाने में कामयाब हो गए। हरिद्वार सीट से प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा के साथ ही पूर्व मंत्री हरक सिंह भी दावेदार थे। लेकिन हाईकमान ने हरीश रावत पर ही भरोसा जताते हुए उनके कहने पर बेटे वीरेंद्र रावत को प्रत्याशी बना दिया।

Harish Rawat took Harak Singh Haridwar revenge questions raised Harak political innings

इस तरह हरीश रावत एक तीर से दो निशान साधने में कामयाब रहे हैं। एक तरफ वे अपने परिवार से अपने बेटे को सियासत में लांच करने में कामयाब हुए दूसरी तरफ हरक सिंह के सियासी भविष्य पर सवाल खड़े करने में कामयाब रहे हैं। हरक सिंह रावत को विधानसभा चुनाव 2022 में भी विधायक का टिकट नहीं दिया गया। हरक सिंह के कहने पर उनकी बहू अनुकृति गुंसाई को लैंसडोन से टिकट दिया गया। अब अनुकृति भी कांग्रेस छोड़ चुकी हैं। इस बार हरक सिंह ने हरिद्वार सीट पर सक्रियता दिखाई।

हरक सिंह के लिए हरिद्वार सीट पर कई तरह की संभावनाएं भी नजर आ रही थी। इस बीच ईडी की छापेमारी और फिर हाईकमान ने हरक को उड़ीसा के चुनाव में जिम्मेदारी सौंप दी। जिसके बाद हरक सिंह के हरिद्वार से चुनाव लड़ने की संभावनाएं ना के बराबर रह गई। दरअसल हरक सिंह और हरीश रावत के बीच का सियासी युद्ध 2016 में सामने आया। जब हरीश रावत सरकार को गिराने मेंं हरक सिंह की अहम भूमिका रही और एक साथ 9 विधायक कांग्रेस की हरीश रावत सरकार के खिलाफ बगावत कर गए।

इसके बाद सभी भाजपा के पाले में चले गए। फिर हरक सिंह भाजपा सरकार में मंत्री बने। लेकिन 2022 विधानसभा चुनाव से पहले हरक सिंह को भाजपा ने पार्टी से निकाल दिया और हरक सिंह कांग्रेस में जाने की कोशिश में जुट गए। इस बीच हरीश रावत ने हरक सिंह को कांग्रेस ज्वाइन करने से पहले हाईकमान पर कई तरह के दबाव बनाए और कई दौर के मान मनौबल के बाद हरक सिंह की कांग्रेस में वापसी कराई गई।

जिसमें हरक की बहू अनुकृति को भी कांग्रेस ज्वाइन कराई गई। लेकिन इस दौरान हरक सिंह को सिर्फ एक टिकट की च्वाइस दी गई। जिसमें हरक सिंह ने अपनी बहू अनुकृति को लैंसडाउन से उतारकर खुद चुनाव न लड़ने का निर्णय लिया। इस तरह तब से अब तक हरक सिंह सक्रिय राजनीति के कई मायनों में दूर होते जा रहे हैं।

उत्तराखंड कांग्रेस में हरीश रावत ने एक बार फिर अपना दबदबा कायम रखने में कामयाब नजर आ रहे हैं। पांच में से चार लोकसभा सीटों पर जो भी प्रत्याशी उतारे गए हैं, वे सब हरीश रावत खेमे के हैं या हरीश रावत के करीबी हैं। टिहरी से जोत सिंह गुनसोला, गढ़वाल से गणेश गोदियाल और अल्मोड़ा से प्रदीप टम्टा पूर्व सीएम हरीश रावत के करीबी हैं। जबकि हरिद्वार से हरीश रावत के बेटे वीरेंद्र रावत को टिकट मिला है। इस तरह उत्तराखंड में टिकटों के बंटवारे में हाईकमान ने एक बार फिर हरीश रावत पर भरोसा जताया है।

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