Uttarakhand news: चुनावी साल में राज्य कर्मचारियों की मांगे बढ़ा सकती हैं सरकार की मुश्किलें

चुनावी साल में कर्मचारी संगठन मुखर, धामी सरकार की बढ़ा सकती है मुश्किलें

देहरादून, 21 अगस्त। चुनावी साल में उत्तराखंड में कर्मचारी संगठनों के एकजुट होने और अपनी मांगों को लेकर आंदोलन की चेतावनी देने से आने वाले समय में प्रदेश की धामी सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती है। चुनाव में राज्य कर्मचारियों का वोटबैंक हर राजनैतिक दल के लिए साथ लेने की बड़ी चुनौती होती है, ऐसे में अगर कर्मचारियों की मांगों को राज्य सरकार हल नहीं कर पाई तो चुनाव में ये मुश्किलें भी खड़ी कर सकती है।

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समन्वय समिति बनाकर आंदोलन का ऐलान
मांगों को लेकर प्रदेश के विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारियों ने उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति का पुनर्गठन किया है। इस समिति में सचिवालय संघ को छोड़कर सभी संगठनों को एकजुट करने का दावा किया जा रहा है। समिति के पुनर्गठन के साथ ही तीन प्रस्ताव पारित किए गए। जिसके त​हत मांगें न मानने पर सरकार के खिलाफ छह सितंबर से चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने का भी ऐलान किया गया है। समन्वय समिति का दावा है कि सभी संगठन इस समिति के तहत मिलकर अपनी लड़ाई लड़ेंगे। इसके लिए जिला स्तर पर भी कार्यकारिणी गठित की जाएगी। सभी संगठन, समिति के आंदोलनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे।

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    चुनावी साल में कर्मचारियों को भी मिले लाभ
    समिति के प्रवक्ता अरुण पांडे ने कहा कि राज्य में बीजेपी ने चुनावी साल में सीएम को बदला है तो चुनावी साल में राज्य के कर्मचारियों की मांगों पर भी सरकार को निर्णय लेकर कर्मचारियों को लाभ देना होगा। उन्होंने कहा कि हम दबाव बनाने के लिए किसी तरह का कोई आंदोलन नहीं करने जा रहे हैं। लेकिन कर्मचारियों की मांगों को लेकर एकजुट होकर लड़ाई लड़ेंगे। अरुण पांडे का दावा है कि उनके समन्वय समिति को दर्जनभर से अधिक कर्मचारियों का समर्थन प्राप्त है, जिसमें राज्य के पौने 3 लाख में से ढाई लाख से ज्यादा कर्मचारी शामिल हैं।

    सचिवालय संघ और समन्वय समिति में तकरार
    इधर समन्वय समिति से सचिवालय संघ को अलग करने के मुद्दे पर कर्मचारी संगठनों में दो फाड़ हो गए हैं। सचिवालय संघ के अध्यक्ष दीपक जोशी का कहना है कि कुछ कर्मचारी नेताओं के व्यक्तिगत लाभ लेने के कारण वे इस तरह की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समन्वय समिति की पुरानी लड़ाई उन्हीं के ने नेतृत्व में ही लड़े गए थे। ऐसे में समन्वय समिति को इस तरह सचिवालय संघ को बाहर करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने साफ किया कि भविष्य में सरकार की तरफ से जो भी कर्मचारियों की समन्वय बैठक होगी, उसमें वे भी शामिल होंगे अगर उन्हें किसी कारणवश नहीं बुलाया जाएगा तो वे इसका पुरजोर विरोध करेंगे। उन्होंने ​कहा कि उन्हें 40 से ज्यादा संगठनों का समर्थन प्राप्त है। जिसको लेकर वे समन्वय समिति की रुपरेखा बनाने जा रहे हैं।

    दर्जन भर से अधिक हैं कर्मचारियों की मांगे
    समन्वय समिति ने राज्य कर्मियों, शिक्षकों एवं निगम कर्मियों की पदोन्नति, वेतनमान, डीए, गोल्डन कार्ड में विसंगति दूर करने, ग्रेड वेतन, प्रदेश में पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने के अलावा वेतन विसंगति समेत दर्जनभर से ज्यादा मांगों को लेकर आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है।

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