मुख्यमंत्री की कुर्सी मिल गई अब विधायक बनने की चुनौती को कैसे पार पाएंगे धामी, जानिए क्या हैं विकल्प
6 माह के भीतर उपचुनाव जीतना जरुरी
देहरादून, 22 मार्च। सभी कयासों को पीछे छोड़ते हुए पुष्कर सिंह धामी एक बार फिर प्रदेश की कमान थामने जा रहे हैं। जिसमें धामी की पहली अग्निपरीक्षा विधायक बनने की है। हालांकि जिस तरह की धामी की अब तक फिल्डिंग रही है, उससे साफ है कि वे इस परीक्षा को भी सफलता के साथ पार कर लेंगे। लेकिन धामी कहां से चुनाव लड़ेंगे, उनके लिए कौन सीट छोड़ेगा ये बड़ा सवाल अभी से उठने लगा है।

आधा दर्जन विधायक कर चुके हैं सीट छोड़ने का ऑफर
चुनाव परिणाम आने के बाद से ही आधा दर्जन से अधिक विधायक धामी के लिए अपनी सीट छोड़ने की बात कर चुके हैं। तो क्या भाजपा अपने ही विधायक से सीट छुड़वाएगी या फिर कांग्रेस के खेमे में सेंधमारी होगी। ये भी विकल्प अभी से तलाशने शुरू हो गए हैं। पहले बात करतें हैं भाजपा के उन विधायकों की जो खुद ही धामी के लिए सीट छोड़ने की बात कर चुके हैं। सबसे पहले धामी के लिए चंपावत के विधायक कैलाश गहतोड़ी ने ऑफर किया। इसके बाद जागेश्वर से विधायक मोहन सिंह, कपकोट के विधायक सुरेश गड़िया, खानपुर के निर्दलीय विधायक उमेश शर्मा भी अपनी सीट छोड़ने का प्रस्ताव धामी को दे चुके हैं। भाजपा सूत्रों का दावा है कि धामी के लिए सबसे सुरक्षित सीट डीडीहाट मानी जा रही है। धामी का पैतृक गांव इसी विधानसभा के अंर्तगत आता है। डीडीहाट से वर्तमान में पार्टी के वरिष्ठ नेता पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बिशन सिंह चुफाल विधायक हैं। जिन्हें पार्टी राज्यसभा भेजकर सीट खाली करा सकती है। पूरे उत्तराखंड में धामी के लिए ये सीट सबसे सुरक्षित सीट मानी जा रही है।
मुख्यमंत्री के लिए 4 बार हो चुका है उपचुनाव
उत्तराखंड में अब तक 4 बार मुख्यमंत्री उपचुनाव लड़ चुके हैं। जिनमें एनडी तिवारी और हरीश रावत के लिए अपनी ही पार्टी के विधायकों ने सीट छोड़ी जबकि बीसी खंडूरी के लिए कांग्रेस और विजय बहुगुणा के लिए तब भाजपा के विधायक ने सीट छोड़ी थी। उत्तराखंड के इतिहास में मुख्यमंत्री के लिए तक 4 बार उपचुनाव हो चुके हैं। 2002 में पहली कांग्रेस की सरकार में एनडी तिवारी को सीएम चुना गया। एनडी तिवारी ने रामनगर सीट से चुनाव लड़ा। इस चुनाव में कांग्रेस के योगम्बर रावत भाजपा के दीवान सिंह बिष्ट से 4915 मतों से चुनाव जीत गए थे।छह माह बाद उपचुनाव के लिए योगम्बर रावत ने इस्तीफा देकर रामनगर सीट एनडी तिवारी के उपचुनाव लड़ने के लिए छोड़ दी। तिवारी ने यह चुनाव 23220 मतों से जीता था। इसके बाद 2007 में भाजपा सरकार में तत्कालीन सीएम बीसी खंडूरी के लिए कांग्रेस के विधायक टीपीएस रावत ने सीट छोड़ी थी। पहले खंडूरी के लिए निर्दलीय विधायक यशपाल बेनाम को सीट छोड़ने को कहा गया लेकिन जब वे नहीं माने तो भाजपा ने कांग्रेस में सेंधमारी कर धुमाकोट सीट से टीपीएस रावत को इस्तीफा दिलाकर चुनाव जीताया। उस समय पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक की भी इस प्रकरण में अहम भूमिका मानी जाती है। 2012 में कांग्रेस के पूर्व सीएम विजय बहुगुणा के लिए सितारगंज से भाजपा के विधायक किरण मंडल को इस्तीफा दिलवाकर कांग्रेस में शामिल किया और बहुगुणा इसी सीट से विधायक चुनकर विधानसभा पहुंचे। इसके बाद 2014 में हरीश रावत के लिए कांग्रेस के ही विधायक हरीश धामी ने धारचूला सीट छोड़ी थी। जिसके बाद वे विधायक बनकर विधानसभा पहुंचे।












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