• search
उत्तराखंड न्यूज़ के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  

Uttarakhand news: सुरक्षाकर्मियों की निगरानी में होगा गरतांग गली का दीदार, 150 रुपए भी करने होंगे खर्च

|
Google Oneindia News

देहरादून, 14 सितंबर। करीब 59 साल बाद पर्यटकों के लिए खोली गई गरतांग गली को कुछ लोगों ने बदरंग कर दिया है। कुछ असमाजिक तत्वों ने लकड़ी की रेलिंग पर अपने नाम कुरेद दिए हैं। ये प्रकरण तब प्रकाश में आया जब इसका वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हुआ। इस पूरे प्रकरण पर प्रशासन ने भी गंभीरता दिखाते हुए मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। इस प्रकरण के बाद वन विभाग ने गरतांग गली में सुरक्षाकर्मी भी तैनात कर दिए हैं। साथ ही 150 रुपए प्रवेश शुल्क भी लेना शुरू कर दिया है। बता दें कि 18 अगस्त को रोमांच के इस सफर को पर्यटकों के लिए खोला गया था।

Gartang street will be seen under the supervision of security personnel, 150 rupees will also have to be spent

600 से ज्यादा पर्यटक पहुंचे
उत्तराखंड में रोमांच के सफर के लिए खोली गई चीन सीमा के निकट स्थित गरतांग गली कम समय में ही पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन गई है। यहां बीते करीब 20 दिन में दिन में ही 600 से ज्यादा पर्यटक पहुंच चुके हैं। बीते दिनों पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी गरतांग गली पहुंचे थे। गरतांग गली उत्तरकाशी जनपद मुख्यालय से करीब 85 किमी दूर स्थित है।लेकिन सोशल मीडिया में गरतांग गली का एक वीडियो वायरल होने के बाद से प्रशासन अलर्ट हो गया है। दरअसल यहां जाने वाले पर्यटक प्राकृतिक और कलाकृतियों को छेड़कर इसकी सुंदरता को दाग लगा रहा हैं। इतना ही नहीं लकड़ी के पुल पर कुछ असमाजिक तत्वों ने नुकीली चीजों से अपना नाम कुरेद दिया है। जिसके बाद प्रशासन ने मुकदमा दर्ज कर जांच कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। इधर वन विभाग ने गरतांग गली में गार्ड भी तैनात कर दिए हैं। जिससे कोई असमाजिक तत्व किसी तरह का गलत काम न कर सके। साथ ही प्रवेश शुल्क भी लेना शुरू कर दिया है।

भारत-तिब्बत के बीच होता था व्‍यापार
समुद्रतल से 10500 फीट की ऊंचाई पर एक खड़ी चट्टान को काटकर बनाए गए इस सीढ़ीनुमा मार्ग से गुजरना बहुत ही रोमांचकारी अनुभव है। 140 मीटर लंबा यह सीढ़ीनुमा मार्ग 17वीं सदी में पेशावर से आए पठानों ने चट्टान को काटकर बनाया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि 1962 से पहले भारत-तिब्बत के बीच व्यापारिक गतिविधियां संचालित होने के कारण नेलांग घाटी दोनों तरफ के व्यापारियों से गुलजार रहती थी। दोरजी (तिब्बती व्यापारी) ऊन, चमड़े से बने वस्त्र व नमक लेकर सुमला, मंडी व नेलांग से गर्तांगली होते हुए उत्तरकाशी पहुंचते थे। भारत-चीन युद्ध के बाद गर्तांगली से व्यापारिक आवाजाही बंद हो गई। हालांकि, सेना की आवाजाही होती रही। भैरव घाटी से नेलांग तक सड़क बनने के बाद 1975 से सेना ने भी इस रास्ते का इस्तेमाल बंद कर दिया। देख-रेख के अभाव में इसकी सीढ़ि‍यां और किनारे लगाई गई लकड़ी की सुरक्षा बाड़ जर्जर होती चली गई। लेकिन अब एक बार फिर इस रास्ते को खोल दिया है।

गंगोत्री नेशनल पार्क के वन क्षेत्राधिकारी प्रताप पंवार ने बताया कि

हमनें अपने स्टाफ के 2 गार्ड गेट पर और 2 गार्ड पुल पर तैनात कर दिए हैं। साथ ही नेशनल पार्क में प्रवेश का 150 रुपए शुल्क भी लिया जा रहा है। इस प्रकरण के बाद सबको अवेयर किया जा रहा है।

ये भी पढ़ें-उत्तराखंड में बलूनी पर लगा सकती है बीजेपी बड़ा दांव, बड़ी जिम्मेदारी मिलने के संकेतये भी पढ़ें-उत्तराखंड में बलूनी पर लगा सकती है बीजेपी बड़ा दांव, बड़ी जिम्मेदारी मिलने के संकेत

English summary
Gartang street will be seen under the supervision of security personnel, 150 rupees will also have to be spent
देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X