Uttarakhand Forest Fire: जंगलों को आग से बचाने के लिए शुरू हुई कवायद, शासन से लेकर जिले स्तर पर उठाए ये कदम

आग की घटनाएं सामने आते ही सरकार पहले ही अलर्ट मोड पर आ गई ह। वन विभाग ने विभिन्न प्रभागों में फायर वाचर की तैनाती शुरू कर दी है। जो जंगल की आग बुझाने में मददगार साबित होंगे।

Forest Fire Exercise started to save forests steps taken from government to district level

Uttarakhand Forest Fire उत्तराख्ंड में फायर सीजन में जंगलों में आग की घटनाओं से सरकार के सामने कई तरह की समस्याएं खड़ी हो जाती है। जिस पर कंट्रोल करने के लिए कई बार कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। ऐसे में इस साल गर्मी की दस्तक से पहले ही जिस तरह आग की घटनाएं सामने आनी लगी है। उस​को देखते हुए सरकार पहले ही अलर्ट मोड पर आ गई ह। वन विभाग ने विभिन्न प्रभागों में फायर वाचर की तैनाती शुरू कर दी है। जो जंगल की आग बुझाने में मददगार साबित होंगे। फायर वाचर को न्यूनतम मजदूरी दर पर निश्चित समय के लिए रखा जाता है। अब तक प्रदेशभर में 75 स्थानों पर वनाग्नि की घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। जिनसे 131 हेक्टेअर जंगल जल चुका है।

जंगलों में आग लगने पर तत्काल कंट्रोल रूम में जानकारी दें
वनाग्नि की घटनाओं की रोकथाम के लिए जिले स्तर पर भी काम शुरू हो चुका है। कोटद्वार में वनाग्नि घटनाओं की रोकथाम के लिए डीएम डॉ0 आशीष चौहान ने समीक्षा बैठक के जरिए ब्लाॅक स्तर पर नामित नोडल अधिकारियों व अन्य संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि अपने-अपने क्षेत्रों में निगरानी बनायें रखें, जंगलों में आग लगने पर तत्काल कंट्रोल रूम में उसकी जानकारी दें। वनाग्नि की जानकारी कंट्रोल रूम में न देने पर जिलाधिकारी ने खंड विकास अधिकारी, नोडल अधिकारी कोट का स्पष्टीकरण तलब किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को कहा कि जंगलों में आग लगाने वाले लोेगों का पता चलता है तो तत्काल उसने विरूद्ध आवश्यक कार्यवाही करना सुनिश्चित करें। डीएम ने इसके लिए जनसहभागिता पर जोर देने की बात कही।

'हॉट लाइटनिंग' के हमले बढ़ सकते हैंं

उधर मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस पर गर्मी की मार अधिक पड़ने से इसका असर सीधे पर्यावरण पर भी देखने को मिलेगा। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बढ़ते तापमान से दुनिया के कई हिस्सों में बेतहाशा गर्मी बढ़ सकती है। जिससे जंगल में आग लगने की आशंका अधिक होगी। जलवायु परिवर्तन के चलते जंगल पर 'हॉट लाइटनिंग' के हमले बढ़ सकते हैंं। ऐसे में इस बार अधिक जागरुक होने की आवश्यकता पड़ेगी। उत्तराखंड में 71 प्रतिशत वन क्षेत्र वाले प्रदेश में जंगल की आग का खतरा भी अधिक रहता है। वर्षा कम होने के कारण इस बार वन विभाग की चुनौती और बड़ी होने की आशंका है। इस बार शीतकाल में सामान्य से करीब 60 प्रतिशत कम वर्षा हुई। हालात ये हैं कि फरवरी में ही गर्मी का अहसास होने लगा है। साथ ही वन क्षेत्रों में भी नमी कम होने से आग लगने का खतरा बढ़ गया है। पिछले सालों के आंकड़े भी डरा रहे हैं। बीते वर्ष 2022 में जंगल की आग की 22 सौ घटनाएं हुईं। जिनमें करीब 35 सौ हेक्टेयर वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचा, जबकि वर्ष 2021 में करीब 2800 घटनाएं हुई थीं।

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