उत्तराखंड में नेताओं की परिक्रमा नहीं फील्ड रिपोर्ट तय करेगा टिकट, जानिए क्या है मसला
उत्तराखंड में नेताओं की परिक्रमा नहीं फिल्ड रिपोर्ट तय करेगा टिकट
देहरादून, 13 दिसंबर। उत्तराखंड में भाजपा, कांग्रेस में टिकटों को लेकर मंथन शुरू हो गया है। दिसंबर अंतिम सप्ताह तक टिकटों को लेकर होमवर्क पूरा किया जा सकते हैं। लेकिन इस बार भाजपा, कांग्रेस दोनों ही सियासी दल फील्ड की रिपोर्ट पर ही मुहर लगाने की रणनीति पर फोकस कर रहे हैं। चुनाव में दावेदारों की देहरादून से लेकर दिल्ली तक सीनियर नेताओं की परिक्रमा आम बात है, लेकिन इस बार साफ है कि सीनियर नेताओं की परिक्रमा से टिकट चाहने वाले दावेदारों को झटका लग सकता है। दोनों ही दल अंदरूनी सर्वे को आधार बनाकर ही टिकट देंगे।

भाजपा का थ्री लेयर सर्वे
सबसे पहले बात सत्ताधारी भाजपा की। भाजपा में टिकट बंटवारे के लिए 3 तरह के सर्वे आधार माने जाते हैं। पहला प्रदेश स्तर संगठन का दूसरा सर्वे संघ अपने स्तर से करवाता है जबकि तीसरा और अहम केन्द्रीय नेतृत्व की और से कराया जाता है। इन तीनों के बाद ही भाजपा में टिकट बंटवारे की प्रक्रिया शुरू होती है। इस बार पार्टी की और से अंतिम सर्वे रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। जिसकी रिपोर्ट आने के बाद प्रदेश संगठन तीन नामों को हाईकमान को भेजेगा। जिनमें से एक नाम पर हाईकमान मुहर लगाता है। पार्टी की और से जमीनी स्तर के नेताओं को ही टिकट देने की बात की जा रही है। जिसमें जिताउ प्रत्याशी बनाने की बात भी सामने आ चुकी है। हालांकि पार्टी ने इस बार एज फेक्टर को हटाने की बात की है। साफ है कि भाजपा में इस बार पुराने और दिग्गज चेहरों के टिकट कटने की संभावना कम है। हालांकि पार्टी को युवा, महिला और अन्य सभी फेक्टर को सामने रखकर फैसला लेना होगा। जिसके लिए भाजपा के उम्मीदवारों को जनवरी के शुरूआती दिनों का इंतजार करना पड़ सकता है। इसमें 30 सीटों पर पेंच फंसने की बात सामने आ चुकी है।
कांग्रेस ने बदली रणनीति
सत्ता में वापसी के लिए इस बार कांग्रेस टिकट बंटवारे के फॉर्मूले पर खासा होमवर्क करने में जुटी है। कांग्रेस भी जिला स्तर पर सर्वे रिपोर्ट को आधार बनाकर टिकट देने की बात कर रही है। इसके लिए जिला स्तर की कमेटी से 3 नामों का पैनल भी मंगवाया जा रहा है। इन 3 नामों के पैनल को प्रदेश स्तर के संगठन से हाईकमान को भेजा जाएगा। जिसके बाद दिल्ली से नाम तय होगा। कांग्रेस में हर बार सीनियर नेताओं की परिक्रमा कर टिकट पाने वालों की लिस्ट लंबी मानी जाती है। लेकिन इस बार कांग्रेस टिकट बंटवारे में किसी तरह का रिस्क नहीं ले रही है। एक-एक प्रत्याशी को जिताउ होने की संभावना को तलाशने के बाद ही पार्टी टिकट देने का दावा कर रही है। जिसके लिए 40 सीटों पर सबसे ज्यादा मंथन हो रहा है। कांग्रेस सूत्रों का दावा है कि प्रदेश संगठन 30 नामों को लेकर आश्वस्त हो गया है। जिनमें सिटिंग विधायक भी शामिल है। सिटिंग विधायकों की परफॉरमेंस और दूसरे नामों के हाईकमान से हरी झंडी मिलते ही कांग्रेस दिसंबर अंत तक पहली लिस्ट जारी कर सकती है। भाजपा के टिकट बंटवारे तक कांग्रेस कुछ सीटों पर इंतजार भी कर सकती है, जहां विवाद की स्थिति बनती नजर आएगी।












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