दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण का स्तर बढ़ने से पहाड़ में भी घुटने लगा दम, जानिए कैसे

देहरादून, 16 नवंबर। दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण का स्तर बढ़ने से पहाड़ में भी प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ है। हालात ये हैं कि दून में प्रदूषण मानकों के अनुसार 6 से 7 गुना तक ज्यादा बना हुआ है। जो कि अलार्म की स्थिति है। ऐसे में एक्सपर्ट ए हतियात बरतने की सलाह दे रहे हैं।

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    देहरादून समेत कई इलाकों में नजर आ रहा असर
    दिल्ली में खराब हुई हवा से उत्तराखंड पर भी असर दिखने लगा है। देहरादून समेत आसपास के इलाकों में वायु स्तर में खतरनाक तत्वों का स्तर खतरनाक बना हुआ है। जिसमें दीवाली के बाद से कोई खास बदलान नजर नहीं आ रहा है। वायु प्रदूषण और एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) में लगातार उछाल बनी हुई है। इसके कारण देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश समेत आसपास के इलाकों में सांस लेने का खतरा बना हुआ है। हवा में पीएम 10 के लिए वार्षिक औसत स्तर 20 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर और 24 घंटे के लिए 50 माइक्रो प्रति घन मीटर से ज्यादा नहीं होना चाहिए। पीसीबी के मानकों में यह 60 और 100 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर होना चाहिए। देहरादून में यह छह से सात गुना तक ज्यादा बना हुआ है।

    दिवाली के बाद से हालात बेकाबू
    दिवाली के मौके पर देहरादून और हरिद्वार में एयर क्वालिटी इंडेक्स पर वायु प्रदूषण का आंकड़ा 300 को पार कर गया।
    उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दिवाली की रात जो वायु प्रदूषण के आधिकारिक आंकड़े देहरादून और हरिद्वार में पिछले 1 हफ्ते के मुकाबले वायु प्रदूषण में डेढ़ सौ फीसदी का इजाफा हुआ है। जो कि 10 दिन बाद भी 150 से ज्यादा बना हुआ है। इसी तरह हरिद्वार और ऋषिकेश में भी प्रदूषण का स्तर एक्यूआई औसत से ज्यादा है। जो कि खतरनाक साबित हो सकता है।

    क्यों होता है ये खतरनाक
    धूल के महीने कण, पीएम 10 व पीएम 2.5 : आकार के आधार पर पीएम 10 व पीएम 2.5 को परिभाषित किया गया है। जिन कणों का आकार 10 माइक्रोमीटर या इससे कम होती है उसे पीएम 10 कहते हैं। जबकि 2.5 माइक्रोमीटर व इससे कम आकार के कण पीएम 2.5 कहलाते हैं। इनमें ज्यादा खतरनाक पीएम 2.5 होता है। यह सांस के सहारे फेफड़ों से होता हुआ खून में मिल जाता है। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के एमएस डॉ केसी पंत ने बताया कि कोविडकाल में प्रदूषण बढ़ना ज्यादा खतरनाक सबित हो रहा है। इससे पोस्ट कोविड मरीजों में ज्यादा समस्याएं देखने को मिल रही है। इसके अलावा बच्चों में, सांस और एलर्जी के मरीजों में इससे ज्यादा परेशानी होती है। उन्होंने बताया कि पोस्ट दिवाली चेस्ट इंफेक्शन के मरीज बढ़ रहे हैं। ठंड और प्रदूषण की वजह से मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है।

    क्या हैं मानक
    एयर क्वालिटी इंडेक्स
    00-50 : अच्छा
    51-100 : संतोषजनक
    101-200 : हल्का खराब
    201-300 : बहुत खराब
    301-400 : खतरनाक
    401 प्लस : बहुत खतरनाक

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