जनता की गाढ़ी कमाई, करोड़ों बर्बाद, 2 घंटे 40 मिनट चला गैरसेंण सत्र, क्या बोले-देहरादून के लोग Ground report
Dehradun ground report: उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसेंण के भराड़ीसेंण में मानूसत्र सत्र आयोजित किया गया। सरकार ने चार दिन का सत्र बुलाया। लेकिन मात्र डेढ़ दिन में 2 घंटे 40 मिनट ही सत्र चल पाया। विपक्ष ने भी रातभर धरना दिया और जमकर हंगामा किया।
राज्य सरकार ने हंगामे के बीच अनुपूरक बजट और 9 विधेयक पास करा दिए। दो दिन तक गैरसेंण में खूब रौनक रही, लेकिन तीसरे दिन पहले की तरह सन्नाटा। दो दिन शासन से लेकर प्रशासनिक अमला और जनप्रतिनिधियों का जमावड़ा लगा रहा। जिसमें काफी खर्च भी आया होगा। अब जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। देहरादून की जनता सत्र को लेकर क्या सोचती है। वन इंडिया ने लोगों से बातचीत की।

अभिनव कुमार कहते हैं कि सरकार चार दिन का सत्र आहूत करती है और डेढ़ दिन में निपटा देते हैं। पूरा शासन, प्रशासनिक अमला वहां पहुंचता है। पैसा तो का ही बर्बाद किया गया। गलत है, सत्ता पक्ष हो या विपक्ष इसके लिए सभी दोषी हैं।
हिमांशु पुंडीर जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा है। वीआईपी हेलीकॉप्टर से जाते हैं। करोड़ों रुपए खर्च किए गए। भाजपा, कांग्रेस दोनों ही जनता को छला है। उत्तराखंड में तीसरे विकल्प की आवश्यकता है। इस समय भाजपा, कांग्रेस एक दूसरे के पूरक हैं।
डॉ मुकुल शर्मा का कहना है कि ये मजाक चल रहा है, उत्तराखंड में। लगातार सरकार इस तरह कर रही है। बस खानापूर्ति चल रही है। जनता का पैसा बर्बाद किया जा रहा है। गैरसेंण सरकार इसी मकसद से जाती है कि जाकर तुरंत आना है। सत्र को जानबूझकर जल्द खत्म कर दिया जाता है।
विपिन घिल्डियाल का कहना है कि जनता के टैक्स से सरकार और विधानसभा के खर्चे पूरे किए जाते हैं। सरकार अगर चार दिन कम से कम भी सत्र चलाती तो कुछ जनता का भला हो जाता। लेकिन जो हुआ वह गलत हुआ। एक तरफ गैरसेंण को राजधानी बनाने की बात की जाती है, दूसरी तरफ वहां सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है और इस तरह डेढ़ दिन का सत्र आहूत किया जा रहा है।
राजेंद्र मिश्रा ने कहा कि गैरसेंण को स्थाई राजधानी बना देना चाहिए। सारे लोग देहरादून या मैदान की तरफ भाग रहे हैं। पहाड़ खाली हो रहे हैं। राजधानी बनेगी तो लोग वहां जाएंगे। विकास होगा। हम तो चाह रहे हैं कि गैरसेंण राजधानी हो तो पहाड़ का विकास होगा। सारे जनप्रतिनिधि, अफसर वहीं रहेंगे।
धर्मेश सिंह नेगी का कहना है कि सत्र हमेशा होता है। चार दिन का सत्र डेढ़ दिन में खत्म कर दिया। पब्लिक के पैसे का दुरुपयोग हो रहा है। क्या इसलिए वहां राजधानी बनाई। कांग्रेस का भी धरना देने का कोई मतलब नहीं था। सत्र होने देने कुछ तो जनता के हित में होता।
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