केदारनाथ और निकाय चुनावों से पहले कांग्रेस में कलह, प्रदेश अध्यक्ष के लिए खड़ी हो सकती है मुसीबत, ये है वजह
उत्तराखंड में विपक्षी दल कांग्रेस के अंदर एक बार फिर सियासी खींचतान शुरू हो गई है। इस बार गुटबाजी की जगह विधायकों ने प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा पर संगठन में मनमानी करने का आरोप लगाया है।
सूत्रों का दावा है कि दिल्ली में विधायकों ने खुलकर प्रदेश प्रभारी शैलजा से प्रदेश अध्यक्ष की शिकायत की है। इसमें विधायकों के साथ सीनियर नेता भी शामिल हैंं। ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष अपने ही विधायकों के निशाने पर आ गए हैं।

कांग्रेस के अंदर कलह की खबरें पहली बार सामने नहीं आई हैं। इससे पहले भी कांग्रेस कई बार गुटबाजी में बंटा हुआ नजर आता रहा है। विधासनसभा के परिणाम के बाद से कांग्रेस में बदलाव को लेकर काफी गुटबाजी नजर आई। जब प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य को बनाया गया। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने इसको लेकर खुलकर विरोध किया।
कांग्रेस के अंदर भी कुमांउ को ही दोनों पद मिलने पर असंतुलन होने का आरोप लगा। इसके बाद हरीश रावत और प्रीतम खेमा अपने अपनी बातों को लेकर कई बार खुलकर संगठन से नाराजगी जता चुकी है। इस बीच लोकसभा चुनाव में भी संगठन अलग थलग नजर आया। प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने सीनियर नेताओं के चुनाव न लड़ने का भी मु्द्दा उठाया। लेकिन हरीश रावत समेत सभी बड़े नेता अपने हिसाब से चुनाव लड़ते हुए दिखे।
इसके बाद पांचों सीट पर हार हुई तो सीनियर नेताओं पर हार का ठीकरा फोड़ने की कोशिश हुई। जमकर बयानबाजी भी हुई। अब बदरीनाथ व मंगलौर सीट जीतने के बाद कांग्रेस के अंदर नया उत्साह तो नजर आ रहा है, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा निशाने पर हैं। सूत्रों का दावा है कि चार विधायकों ने प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा पर संगठन में हुई नियुक्तियों को मनमानी करने का आरोप लगाया है।
साथ ही प्रदेश प्रभारी से इसकी शिकायत की गई है। ऐसे में अब केदारनाथ उपचुनाव और निकाय चुनावों से पहले कांग्रेस को इस पूरे प्रकरण को लेकर गंभीरता से विचार करना होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो आने वाले समय में इसका दुष्परिणाम भी भुगतना पड़ सकता है।












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