उत्तराखंड कांग्रेस में चल रही खींचतान का मामला पहुंचा हाईकमान, पर्यवेक्षक के आने से थमेगा असंतोष?
उत्तराखंड कांग्रेस में चल रही खींचतान का मामला हाईकमान के पास पहुंच गया है। पार्टी के अंदर जारी बयानबाजी से केंद्रीय नेतृत्व भी नाराज है। हाईकमान ने इस पूरे प्रकरण को लेकर पर्यवेक्षक को देहरादून भेजने की तैयारी कर ली है।

उत्तराखंड कांग्रेस में चल रही खींचतान का मामला अब हाईकमान के पास पहुंच गया है। बीते दिनों में पार्टी के अंदर जारी बयानबाजी से प्रदेश अध्यक्ष के साथ ही केंद्रीय नेतृत्व भी नाराज है। ऐसे में अब हाईकमान ने इस पूरे प्रकरण को लेकर पर्यवेक्षक को देहरादून भेजने की तैयारी कर ली है। जिससे पार्टी के अंदर चल रहा अंसतोष को खत्म किया जा सके।
विधायक तिलकराज बेहड़ से प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने मुलाकात की
कांग्रेसी सूत्रों का दावा है कि हाईकमान के स्तर से पार्टी के वरिष्ठ नेता पीएल पुनिया को उत्तराखंड प्रकरण के लिए पर्यवेक्षक बनाया जा सकता है। इस बीच प्रदेश नेतृत्व के फैसले से नाराज चल रहे विधायक तिलकराज बेहड़ से प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने मुलाकात की है। तिलकराज बेहड़ ने भी पार्टी के अंदर लिए जा रहे फैसलों से नाराजगी जताई थी। साथ ही खुद को उपेक्षित महसूस होने की बात कहकर अपनी पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
पार्टी के अंदर चल रही बयानबाजी पर लगाम नहीं
उत्तराखंड कांग्रेस में करन माहरा के प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी संभालने के बाद से ही बार-बार विरोध के सुर उठते आ रहे हैं। करन माहरा ने एक साल का कार्यकाल तो पूरा कर लिया लेकिन अपनी पार्टी के अंदर चल रही बयानबाजी पर लगाम नहीं लगा पाए। अब करन माहरा ने इस प्रकरण में हाईकमान का दरवाजा खटखटाया है। जिस पर हाईकमान ने पर्यवेक्षक बनाकर इस मामले की जांच करने का फैसला लिया है। पार्टी नेतृत्व पर सीनियर विधायक प्रीतम सिंह, तिलकराज बेहड़ समेत कई नेता सवाल उठा चुके हैं। जिससे कांग्रेस की गुटबाजी भी खुलकर सामने दिख रही है।
प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव को लेकर भी लगातार हमलावर
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव को लेकर भी लगातार हमलावर हैं। जिससे कई बार पार्टी असहज हो चुकी है। इन बयानों से कई बार कांग्रेस को भाजपा के सियासी हमले का भी सामना करना पड़ता है। जो कि आने वाले निकाय चुनावों और लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है। कांग्रेस के अंदर चल रहे इस तरह की गुटबाजी से नुकसान होना तय माना जा रहा है।
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