तीन राज्यों में मिली कांग्रेस को हार, उत्तराखंड में मिशन लोकसभा 2024 को लगा ऐसे झटका
मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ राज्यों में मिली हार के बाद एक बार फिर कांग्रेस के मिशन लोकसभा 2024 को झटका लगा है। जिसका असर राज्यों की चुनावी रणनीति पर असर दिखना तय है। जिस तरह से चुनावों में एग्जिट पोल के नतीजों से कांग्रेस उत्साहित नजर आ रही थी।

परिणाम सामने आने के बाद कांग्रेसी खेमा मायूस नजर आ रहा है। पूर्व सीएम हरीश रावत इन राज्यों में हार को अप्रत्याशित मान रहे हैं। उन्होंने इस हार के बाद कई तरह के सवाल भी खड़े किए हैं। ये बात साफ है कि इन चुनावी परिणामों का असर लोकसभा चुनाव में दिखना तय है।
कांग्रेस उत्तराखंड में लंबे समय लोकसभा चुनाव में वापसी को लेकर उत्सुक नजर आ रही है। बीते 10 सालों से कांग्रेस एक भी सीट उत्तराखंड से नहीं जीत पाई है। उत्तराखंड की पांच लोकसभा सीटों टिहरी, पौड़ी गढ़वाल, हरिद्वार अल्मोड़ा और नैनीताल-ऊधमसिंह नगर में कांग्रेस बीते दो चुनावों (वर्ष 2014 और 2019) में एक भी सीट नहीं जीत पाई है। दोनों ही बार पांचों सीटें भाजपा के खाते में गई हैं। इस बार कांग्रेस संगठन दो से तीन सीटों पर खुद को आगे मानकर रणनीति तैयार करने में जुटी हुई थी। लेकिन विधानसभा चुनावों के परिणामों से कांग्रेस को झटका लगा है।
ये परिणाम इसलिए भी मायने रखते हैं कि उत्तराखंड कांग्रेस के कई सीनियर नेता छत्तीसगढ़ और राजस्थान के विस चुनाव में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाले हुए थे। छत्तीसगढ़ में पार्टी के वरिष्ठ नेता व पूर्व सीएलपी लीडर प्रीतम सिंह को पर्यवेक्षक बनाकर भेजा गया था।
राजस्थान में पूर्व अध्यक्ष गणेश गोदियाल को स्कीनिंग कमेटी और वरिष्ठ नेता डॉ.हरक सिंह रावत को सह पर्यवेक्षक बनाया गया था। तीन राज्यों में मिली हार पर पार्टी उपाध्यक्ष संगठन मथुरा दत्त जोशी का मानना है कि इन चुनाव परिणामों का आगामी लोकसभा चुनाव में कोई फर्क नहीं पड़ेगा। विधानसभा और लोकसभा चुनाव के मुद्दे भिन्न भिन्न होते हैं। पार्टी लोकसभा में मजबूती के साथ चुनाव लड़ेगी।












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