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कर्नल अजय कोठियाल का धराली आपदा को लेकर बयान वायरल, सियासत गरमाई, जानिए भाजपा और कांग्रेस क्यों हुए आमने-सामने

Uttarakhand news: भाजपा सरकार में दायित्वधारी कर्नल अजय कोठियाल के धराली आपदा को लेकर दिए बयान के वायरल होते ही सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने धराली जाकर रिपोर्ट तैयार करने की बात की है जबकि भाजपा ने कर्नल के बयान को गंभीरता से लेने और जरुरी कार्रवाई करने की बात की है।

बता दें कि कर्नल अजय कोठियाल का सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वे 5 अगस्त को आई धराली आपदा में 147 लोगों के दबे होने का दावा कर रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद कांग्रेस सरकार पर हमलावर है।

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कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कर्नल के बयान को गंभीरता से लेने और धराली जाकर ​लोगों से बात करने और नई रिपोर्ट सरकार के सामने रखने की बात की है। कर्नल के बयान पर भाजपा की ओर से भी बयान जारी किया गया है। भाजपा ने वायरल जानकारी पर स्पष्ट किया कि सरकार ने सभी संभव उपायों से थराली में राहत बचाव कार्य संपन्न किए हैं।

फिर भी हमारे एक वरिष्ठ और रेस्क्यू में अनुभवी कार्यकर्ता के तथ्यों को पार्टी गंभीरता से लेगी और सरकार भी यथोचित कार्रवाई करेगी। वहीं विपक्ष से भी आग्रह किया, तथ्यों के पूर्णतया निष्कर्ष से पूर्व किसी भी तरह की राजनैतिक बयानबाजी से बचना चाहिए।

विधायक एवं प्रदेश प्रवक्ता विनोद चमोली ने कहा, कर्नल कोठियाल ने थराली आपदा को लेकर जो भी तथ्य कहे हैं उसपर पार्टी गंभीरता से विमर्श करते हुए, जरूरत अनुसार सरकार उस पर निर्णय लेगी। पार्टी का मत स्पष्ट है कि कार्यकर्ता यदि कोई बात कहता है तो नेतृत्व उसे संज्ञान में लेता है है। जहां तक सरकार का प्रश्न है तो उनके पास सूचना एवं आंकड़े जुटाने के कई माध्यम हैं। जब भी कोई आपदा आती है और दुर्भाग्य से आपदाग्रस्त प्रदेश है। सबसे पहले प्राथमिकता होती है, घायलों एवं प्रभावितों की जान बचाना है। दुर्भाग्य से जिन्हें बचाया नहीं जा सका, उनके आंकड़े जुटाने में भी दिक्कत होती है।

केदारनाथ आपदा के समय भी सभी ने देखा होगा कि आज तक उस त्रासदी में मृत लोगों का पूरा आंकड़ा स्पष्ट नहीं कहा जा सकता है। कुछ इस तरह की कठिनाइयां थराली आपदा में थी। आंकड़े जुटाने के जो माध्यम हैं, उसमें राहत कार्यों में लगे लोगों को प्राप्त डेड बॉडी होती है। आंकड़े उनके परिजन देते हैं जो घटनास्थल से मिसिंग हैं। इस तरीके से एनडीआरएफ ने एसडीआरएफ के कार्यों से भी सूचना आती है। वहां पर तमाम व्यापारिक क्षेत्र में मौजूद के माध्यम से भी मिसिंग जानकारी बड़ा आधार बनती है। निश्चित तौर पर इस दुर्घटना में भी सब तरह की जानकारी जिला प्रशासन के पास होगी और उसके आधार पर ही एक अंतिम जानकारी सामने आई होगी।

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