सहकारी बैंक भर्ती परीक्षा को तीरथ सरकार ने किया रद्द, पूर्व सीएम त्रिवेंद्र के फैसले को पलटने का हो रहा विरोध
देहरादून। उत्तराखंड में भाजपा के नए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने एक और फैसला लिया है जिसमें उन्होंने अपनी ही पार्टी के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार के निर्णय को पलट दिया है। त्रिवेंद्र सरकार के समय सहकारिता विभाग ने जिला सहकारी बैंकों में 400 पदों पर भर्ती निकाली थी। अब तीरथ सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को निरस्त कर दिया है। इस भर्ती के लिए कई जिलों में अभ्यर्थियों ने परीक्षा फॉर्म भरे थे और फिजिकल टेस्ट भी लिया जा रहा था। भर्ती प्रक्रिया रद्द करने के तीरथ सरकार के फैसले के खिलाफ युवाओं ने विरोध प्रदर्शन किया।

जानकारी के मुताबिक, इस भर्ती परीक्षा के खिलाफ ज्वालापुर विधायक सुरेश राठौर ने मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने बताया था कि हरिद्वार जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष भर्ती प्रक्रिया में धांधली कर रहे हैं। पैसे लेकर भर्ती करने का आरोप लगाकर विधायक ने परीक्षा रद्द करने की मांग की थी। हलांकि भर्ती प्रक्रिया रद्द किए जाने पीछे की वजह स्पष्ट नहीं है। सहकारिता विभाग की तरफ से यह बताया गया है कि अपरिहार्य कारणों से यह परीक्षा निरस्त की जा रही है।
भर्ती प्रक्रिया रद्द होने के बाद सहकारिता विभाग के मुख्यालय पर अभ्यर्थियों ने हंगामा किया। अल्मोड़ा जिले में भी तीरथ सरकार के इस फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुआ। इस मामले पर कांग्रेस ने भी भाजपा सरकार पर हमला बोला है। कांग्रेस ने कहा कि भाजपा सरकार ने पहले बेरोजगार युवाओं को ठगा है और उसके बाद उनको ठेंगा दिखा दिया।
मुख्यमंत्री बनने के बाद तीरथ सिंह रावत त्रिवेंद्र सरकार के कुछ फैसलों को पलट चुकी है। हरिद्वार में कुंभ के आयोजन पर त्रिवेंद्र सरकार ने श्रद्धालुओं को कोरोना जांच रिपोर्ट लाने को कहा था जिस आदेश को तीरथ सरकार ने वापस लिया है। सरकार ने कहा कि इसकी जरूरत नहीं क्योंकि लोग 12 साल से इस कुंभ का इंतजार कर रहे हैं। त्रिवेंद्र सरकार ने कुंभ के दौरान ट्रेनों को चलाने पर पाबंदी लगाई थी, इसे भी तीरथ सरकार ने हटा दिया है।












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