चार धाम यात्रा: धामी सरकार के लिए राहत की खबर, जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति का धरना 107 दिनों बाद स्थगित
चार धाम यात्रा शुरू होने से पहले जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति ने विस्थापन, मुआवजना व जोशीमठ को आपदा प्रभावित घोषित किए जाने की मांग को लेकर 107 दिनों से चल रहे धरना 20 दिनों के लिए स्थगित कर दिया है।

चार धाम यात्रा शुरू होने से पहले धामी सरकार के लिए जोशीमठ से एक राहत की खबर आई है। जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के नेतृत्व में विस्थापन, मुआवजना व जोशीमठ को आपदा प्रभावित घोषित किए जाने की मांग को लेकर 107 दिनों से चल रहे धरना 20 दिनों के लिए स्थगित कर दिया है। बता दें कि बद्रीनाथ के कपाट 27 अप्रैल को खुलने हैं। जोशीमठ बद्रीनाथ धाम का मुख्य पड़ाव है।
11 सूत्री मांगों पर सहमति
जोशीमठ बचाओं संघर्ष समिति के संयोजक अतुल सती ने तहसील में चल रहे धरने को स्थगित करने की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि आठ अप्रैल को मुख्यमंत्री के साथ संघर्ष समिति के अध्यक्ष शैलेंद्र सिंह पंवार व प्रवक्ता कमल रतूड़ी सहित प्रतिनिधियों की हुई वार्ता में 11 सूत्री मांगों पर सहमति बनी थी। उपजिलाधिकारी जोशीमठ कुमकुम जोशी द्वारा लिखित पत्र देकर सभी मांगों के निराकरण के लिए पहल किए जाने का आश्वासन दिया गया। जिस पर जोशीमठ बचाओं संघर्ष समिति के संयोजक अतुल सती ने तहसील में चल रहे धरने को स्थगित करने की घोषणा की है।
ये है संघर्ष समिति की मांग
संघर्ष समिति की मांग है कि संपूर्ण जोशीमठ को आपदा प्रभावित घोषित कर यहां पर पुर्नवास का कार्यालय खोला जाए। जोशीमठ में सेना द्वारा ली गई भूमि का मुआवजा देकर भूधंसाव के लिए वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक किया जाए। निर्माण व मुआवजा के लिए कमेटी बनाकर उसमें संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों को रखा जाए। बाईपास निर्माण को स्थाई रोक के साथ एनटीपीसी की जल विद्युत परियोजना में वर्ष 2010 का समझौता लागू किया जाए।
11 मई तक ठोस कार्यवाही करने को दिया मोहलत
संघर्ष समिति के संयोजक अतुल सती ने बताया कि सरकार 11 मई तक दिए गए आश्वासन पर ठोस जमीनी कार्यवाही अमल में लाए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो 11 मई के बाद फिर उग्र आंदोलन के साथ नई शुरुआत की जाएगी। संघर्ष समिति ने कहा कि 20 दिनों में सरकार के कार्यों की समीक्षा करने के साथ- साथ आगे के आंदोलन की तैयारियां भी करेगी। इसके साथ ही अनियंत्रित एवम पर्यावरण विरोधी विकास के ढांचे के कारण प्रभावित हो रही सम्पूर्ण हिमालय की आबादी, पर्यावरण एवम पारिस्थितिकी के संरक्षण के लिए सम्पूर्ण हिमालयी राज्यों एवम देश भर में विभिन्न सामाजिक राजनैतिक समूहों के साथ एकजूटता के प्रयासों को भी आगे बढ़ाया जाएगा।
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