Uttarakhand: पर्यटन व तीर्थाटन का अहम पड़ाव जोशीमठ, जानिए क्यों लड़ रहा अस्तित्व की लड़ाई

चमोली जिले के जोशीमठ में भू धंसाव होने के कारण पर्यटन व्यवसाय भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। होटल और घरों में आ रही दरारें लोगों को डरा रही हैं। सरकार अब विस्थापन और अन्य जरूरी कदम उठाने पर विचार कर रही है।

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उत्तराखंड का छोटा सा पर सबसे अहम पड़ाव जोशीमठ। इन दिनों अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। लंबे समय से जोशीमठ भूधंसाव के कारण चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों के सामने जिदंगी जीने की जंग जीतने की चुनौती खड़ी हो गई है। जोशीमठ में भू धंसाव होने के कारण पर्यटन व्यवसाय भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। होटल और घरों में आ रही दरारें लोगों को डरा रही हैं। सरकार अब विस्थापन और अन्य जरूरी कदम उठाने पर विचार कर रही है। जो कि नए साल में जोशीमठ का भविष्य तय करेगा।

20 हजार से भी ज्यादा आबादी, करीब 2 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित

20 हजार से भी ज्यादा आबादी, करीब 2 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित

20 हजार से भी ज्यादा आबादी वाले जोशीमठ शहर में करीब 2 हजार से ज्यादा लोग इस भू धूसांव से प्रभावित हो रहे हैं। नगर पालिका जोशीमठ नगर में भूधंसाव व दारारों को लेकर सर्वे कराया गया जिसमें सर्वे में 559 मकानों, भूखंड़ों में गहरी, आंशिक दरारें, दर्ज की गई है। स्थानीय लोगों ने सरकार से पौराणिक शहर को बचाने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने की मांग तेज कर दी है। जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अतुल सती ने बताया कि नवंबर 2021 में जोशीमठ में भू धंसाव के सबसे पहले संकेत मिले। इसके बाद से लगातार ये मामला बढ़ रहा है। जो कि अब एक जनआंदोलन हो गया है। उन्होंने बताया कि बताया गया है कि आपदा प्रबंधन विभाग की अब 15 जनवरी को बैठक प्रस्तावित है।

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    चमोली जिले का जोशीमठ, भू धंसाव होने से खतरे की जद में
    संघर्ष समिति ने जो सुझाव दिए, उपलब्ध भूमि का जिक्र

    संघर्ष समिति ने जो सुझाव दिए, उपलब्ध भूमि का जिक्र

    उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा वैज्ञानिक व भूगर्भिक सर्वेक्षण के लिए कमेटी गठित की गई। जिससने भूस्खलन के ट्रीटमेंट के लिए अपनी रिपोर्ट में एक टेक्निकल कमेटी गठित किये जाने की संस्तुति की थी। यह सिफारिश स्वतंत्र वैज्ञानिकों की रिपोर्ट में भी थी, जो हमने सरकार को प्रेषित की थी। इस कमेटी को तत्काल गठित कर इस सन्दर्भ में सुझाव लिए जाने चाहिये जिससे ट्रीटमेंट की कार्यवाही वैज्ञानिक व तकनीकी तौर पर सम्भव हो संघर्ष समिति की मांग है कि शासन द्वारा प्रस्तावित बैठक में स्थानीय प्रतिनिधियों के बतौर जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति को भी शामिल किया जाए। अतुल सती ने बताया कि पूर्व में सन 1976 की मिश्रा कमेटी में भी स्थानीय प्रतिनिधि रहे हैं जिसकी रिपोर्ट जोशीमठ के सन्दर्भ में आज भी सर्वाधिक उल्लेखनीय है। संघर्ष समिति ने जो सुझाव अब तक दिए हैं, उसमें पर्याप्त उपलब्ध भूमि का जिक्र है। जिसमें विकल्प के तौर पर जोशीमठ नगर में ही फल संरक्षण विभाग की भूमि, कोटि फार्म की भूमि, औली में सरकार द्वारा अधिग्रहित भूमि के अतिरिक्त भी भूमि उपलब्ध है । इन भूमि का तत्काल भूगर्भिक सर्वेक्षण करवाकर लोगों के लिए आवास की व्यवस्था की जा सकती है। संघर्ष समिति के संयोजक अतुल सती ने दरारों के लिए जोशीमठ की पहाड़ी के नीचे सुरंग से होकर गुजरने वाली एनटीपीसी की निर्माणाधीन तपोवन बिष्णुगाड जलविद्युत परियोजना को जिम्मेदार ठहराया।

    2021 नवंबर में जोशीमठ के गांधीनगर में कुछ मकानों में दरारें आनी शुरू

    2021 नवंबर में जोशीमठ के गांधीनगर में कुछ मकानों में दरारें आनी शुरू

    2021 नवंबर में जोशीमठ के गांधीनगर में कुछ मकानों में दरारें आनी शुरू हुई, गांधीनगर छावनी बाज़ार में 30 मकानों में दरारें आई हैं। इसको लेकर जनप्रतिनिधियों ने 16 नवंबर 2021 को प्रदर्शन कर प्रशासन से मदद की गुहार लगाई थी। लेकिन धीरे-धीरे भूधंसाव से भवनों, खेतों में दरारों का दायरा बढ़ता गया, फिर मनोहर बाग, टीसीपी बाजार, नृसिंह मंदिर, दौडिल, रविग्राम सहित सुनील गांव में भी भवनों पर दरारें व भूधंसाव होने से लोग दहशत में हैं। जून 2022 में स्वतंत्र वैज्ञानिकों डा. नवीन जुयाल, डा. एसपी सती और डा. शुभ्रा शर्मा की टीम ने सर्वेक्षण कर भूधंसाव के चार प्रमुख कारण बताए थे, जिसमें सात फरवरी की रैणी आपदा, एनटीपीसी की टनल के इस नगर के नीचे से गुजरना, विकास के नाम पर हो रहे निर्माण व नगर में जलनिकासी और सीवरेज की निकासी की सही व्यवस्था न होने को इस भूधंसाव का प्रमुख कारण बताया था।

    जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति-सर्वे रिपोर्ट में मुख्य कारणों को नजरंदाज किया गया

    जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति-सर्वे रिपोर्ट में मुख्य कारणों को नजरंदाज किया गया

    वरिष्ठ पत्रकार त्रिलोचन भट्ट का कहना है कि जितना गंभीर मामला है, उतना सरकार अब तक इस मामले में गंभीर नजर नहीं आ रही है। जिसके लिए एक बार​ फिर बड़ा प्रदेश स्तर पर आंदोलन तेज ​किया जा रहा है। अगस्त में आपदा प्रबंधन के निदेशक डा. पियुष रौतेला के नेतृत्व में आइआइटी रुड़की, वाडिया इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों की छह सदस्यीय टीम ने सर्वेक्षण कर सरकार को रिपोर्ट सौंपी थी। 24 सितंबर को सौंपी गई इस रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने जोशीमठ में पानी की निकासी न होने को इस भूधंसाव व मकानों में दरारों का मुख्य कारण माना था। यह भी कहा गया कि ज्यादा निर्माण से भी यह स्थिति बनी है। जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति का कहना है कि सर्वे रिपोर्ट में मुख्य कारणों को नजरंदाज किया गया।

    जोशीमठ या ज्योतिर्मठ उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित एक नगर

    जोशीमठ या ज्योतिर्मठ उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित एक नगर

    जोशीमठ या ज्योतिर्मठ उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित एक नगर है। यहां हिन्दुओं की प्रसिद्ध ज्योतिष पीठ स्थित है। इतिहासकार बताते है कि यहां 8वीं सदी में आदि शंकराचार्य को ज्ञान प्राप्त हुआ और बद्रीनाथ मंदिर के साथ ही देश के विभिन्न कोनों में तीन और मठों की स्थापना से पहले यहीं उन्होंने प्रथम मठ की स्थापना की। जोशीमठ में नरसिंह का प्राचीन मंदिर है। जो कि पहाड़ों में सबसे ज्यादा गांवों के कुल देवता हैं।

    जोशीमठ कत्यूरी राजाओं की राजधानी थी

    जोशीमठ कत्यूरी राजाओं की राजधानी थी

    यहां बदरी विशाल के शीतकालीन गद्दीस्थल भी है। इतिहासकारों की मानें तो पांडुकेश्वर में पाये गये कत्यूरी राजा ललितशूर के तांब्रपत्र के अनुसार जोशीमठ कत्यूरी राजाओं की राजधानी थी, जिसका उस समय का नाम कार्तिकेयपुर था। क्षत्रिय सेनापति कंटुरा वासुदेव ने गढ़वाल की उत्तरी सीमा पर अपना शासन स्थापित किया और जोशीमठ में अपनी राजधानी बसायी। वासुदेव कत्यूरी ही कत्यूरी वंश का संस्थापक था। जिसने 7वीं से 11वीं सदी के बीच कुमाऊं एवं गढ़वाल पर शासन किया।

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