Chamoli Disaster: चमोली में चमत्कार! 16 घंटे तक मलबे में दबे कुंवर को जिंदा बचाया, जानिए कहां
Chamoli Disaster: उत्तराखंड में बारिश प्रकृति का कहर देखने को मिल रहा है। पहाड़ से लेकर मैदान तक हर जगह आपदा ने लोगों के जीवन को मुश्किल में डाल दिया है। बादल फटने और भारी बारिश से जन जीवन पूरी तरह से अस्त व्यस्त हो गया है। आपदा में कई लोगों की जान चली गई, तो कुछ की जान बची तो मानों चमत्कार हो गया।
ऐसी ही एक घटना चमोली के कुन्तरी लगा फाली में देखने को मिली है। यहां 16 घंटे तक मलबे में दबे एक व्यक्ति को रेस्क्यू टीमों ने जिंदा बचा लिया। चमोली के कुन्तरी लगा फाली में रेस्क्यू टीमों का बड़ा अभियान सफल रहा है। एनडीआरएफ-एसडीआरएफ और स्थानीय लोगों ने मिलकर रेस्क्यू अभियान को अंजाम दिया।

बादल फटने के बाद हुई तबाही में कुंवर सिंह भी मलबे में दब गया। लेकिन प्रकृति के चमत्कार और रेस्क्यू टीमों के साथ कुंवर सिंह के जज्बे ने सबको चौंका दिया। कुंवर सिंह को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। अब कुंवर सिंह की हालत स्थिर बताई जा रही है। उधर रेस्क्यू टीमों का आपदा में दबे अन्य लोगों की खोजबीन तेज और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।
चमोली में बुधवार देर रात को बादल फटने से तबाही मच गई। नंदानगर में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। बादल फटने से नंदानगर के तीन क्षेत्रों में भारी तबाही मची है। बताया जा रहा है कि बादल बिंसर पहाड़ी की चोटी के दोनों तरफ फटा जिससे पानी के सैलाब की तीन धाराएं बन गईं और सैंती लगा कुंतरी, फाली लगा कुंतरी और धुर्मा को भारी नुकसान पहुंचा है।
बिंसर चोटी के बायीं तरफ जहां फाली लगा कुंतरी और सैंती लगा कुंतरी गांव स्थित हैं यहां दो धाराएं बनीं गई हैं। इन धाराओं के तेज बहाव के कारण दोनों गांवों में कई मकान मलबे में दब गए। फाली लगा कुंतरी में 20 और सैंती लगा कुंतरी में 18 परिवार रहते थे।
इस आपदा में आठ लोग लापता बताए जा रहे हैं। वहीं बिंसर पहाड़ी के दूसरी तरफ बादल फटने से एक बरसाती नाले ने विकराल रूप ले लिया और धुर्मा गांव में तबाही मचा दी। यहां दो लोग मलबे में दब गए। कई अन्य घर भी खतरे की जद में आ गए हैं।












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