Chaitra Navratri 2023: मां दुर्गा मंदिर, देश का एक मात्र मंदिर जहां देवी के नौ रुपों की होती है एक साथ पूजा
चमोली के जोशीमठ में नृसिंह मंदिर परिसर में मां दुर्गा मंदिर है। मंदिर के गर्भगृह में पाषाण कालीन नौ प्रतिमा हैं। मान्यता है कि ये देश का एक मात्र ऐसा मंदिर है। जहां देवी के नौ रूपों की एक साथ पूजा होती है।

नवरात्रि में भक्त देवी के नौ रुपों की पूजा करते हैं। हर दिन मां के एक रुप को पूजा जाता है। इस तरह मां के नौ रुपों से मिलकर ही नवरात्रि कहलाती है। जिनके दर्शन के लिए भक्त मां के मंदिर और सिद्धपीठ में जाकर पूजा अर्चना करते हैं। उत्तराखंड के चमोली जिले में एक ऐसा मंदिर हैं जहां देवी के नौ रूपों की एक साथ पूजा
होती है। मान्यता है कि ये देश का एक मात्र ऐसा मंदिर है।
मंदिर महाभारत काल में पांडवों द्वारा बनाया गया
चमोली जिले के जोशीमठ में नृसिंह मंदिर परिसर में ही मां दुर्गा मंदिर भी स्थित है। मां दुर्गा के मंदिर के गर्भगृह में पाषाण कालीन मां दुर्गा की नौ प्रतिमा हैं। मंदिर में मां दुर्गा के नौ रूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धदात्री की प्रतिमा स्थापित है। मान्यता है कि ये मंदिर महाभारत काल में पांडवों द्वारा बनाया गया था। आठवीं शताब्दी में आदि गुरु शंकराचार्य ने भारतवर्ष में पूर्णागिरी पीठ की स्थापना की थी, जिनमें से एक जोशीमठ का नव दुर्गा मंदिर भी शामिल है। इस मंदिर का जीर्णोद्धार 11वीं शताब्दी में कत्यूरी राजा ने किया था। नव दुर्गा मंदिर में मक्खन का विशेष महत्व है। श्रद्धालु मां दुर्गा की प्रतिमाओं को मक्खन का भोग लगाते हैं। मान्यता है कि मां दुर्गा को मक्खन का भोग लगाने से वह प्रसन्न होती हैं। चार धाम यात्रा के दौरान बदरीनाथ पहुंचने वाले तीर्थयात्री मां दुर्गा के मंदिर में मत्था टेकना नहीं भूलते।
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