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हरिद्वार-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग को केंद्र सरकार ने दी सौगात, 720 करोड़ स्वीकृत,जानिए कब होगा काम पूरा

Haridwar- Dehradun National Highway हरिद्वार-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुधारीकरण प्रक्रिया को लेकर केंद्र ने बड़ी सौगात दी है। अगले ढाई वर्ष में पूर्ण होने वाली इस कार्ययोजना के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने 720 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है। केंद्र द्वारा परियोजना के लिए निर्माण अवधि नियत तिथि से 2.5 वर्ष रखी गई है।

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने राज्यसभा में एनएच-7 और एनएच-34 पर क्रमश लाल टप्पर और मोतीचूर के अधूरे छूटे कार्यों के संबंध में जानकारी मांगी थी। गौरतलब है कि हरिद्वार देहरादून और हरिद्वार ऋषिकेश के बीच सफर करने वाले वाहनों को अपूर्ण कार्य के चलते समस्या का सामना करना पड़ रहा था।

Central government gift Haridwar Dehradun National Highway approved 720 crore rupees when completed

जिसके सम्बन्ध में स्थानीय लोगों की समस्या को देखते प्रदेशाध्यक्ष द्वारा सदन में इसे उठाया गया। जिसका जवाब देते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन जयराम गडकरी की तरफ से बताया गया कि राष्ट्रीय राजमार्ग -7 के देहरादून-लाल टप्पर-नेपाली फार्म खंड और राष्ट्रीय राजमार्ग-34 के नेपाली फार्म मोतीचूर खंड के सुधार के लिए कार्य सौंप दिया गया है।

जिसके लिए 18 नवंबर को संविदा करार पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस पूरे कार्य के कार्यान्वयन के लिए 720.67 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। केंद्र द्वारा इस परियोजना के लिए निर्माण अवधि नियत तिथि से 2.5 वर्ष रखी गई है।

उधर भाजपा राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष व सांसद राज्यसभा डा. नरेश बंसल ने संसद मे आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा संर्वधन का विषय उठाया। डा. नरेश बंसल ने विषेश उल्लेख मे यह जनहित एवं देशहित का विषय उठाया। डा नरेश बंसल ने सदन मे कहा कि देश की आयुष सिस्टम से जुड़ी स्वदेशी स्वास्थ्य पद्धतियाँ - आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा - केवल इलाज नहीं, बल्कि रोगों की रोकथाम पर भी प्रभावशाली हैं।

कहा कि इन्हें आज भी विदेशी चिकित्सा प्रणाली के समान दर्जा और संसाधन नहीं मिलते। उदाहरण के लिए, भारत सरकार का स्वास्थ्य मंत्रालय का बजट ₹1,00,000 करोड़ है, जबकि आयुष मंत्रालय का बजट मात्र ₹4,000 करोड़ के आसपास है। यह भारी अंतर आयुर्वेद और अन्य पद्धतियों के विकास में बाधा है।

डा. नरेश बंसल ने सात आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया

  • आयुष्मान भारत योजना में आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा को भी शामिल किया जाए।
  • ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 और ड्रग एंड मैजिक एक्ट 1954 को निरस्त कर यूनिफॉर्म हेल्थकेयर कोड लागू किया जाए।
  • आयुर्वेदिक उद्योग, स्टार्टअप्स और रिसर्च को विशेष सरकारी प्रोत्साहन मिले।
  • आयुष पद्धतियों का बजट वर्तमान आवश्यकता के अनुसार कम से कम 5 गुना बढ़ाया जाए।
  • सभी मेडिकल कोर्स का पहला वर्ष समान हो, जिससे सभी पद्धतियों का मूल ज्ञान छात्रों को मिले।
  • आयुष डॉक्टरों को X-ray, MRI, सर्जरी व डिलीवरी की अनुमति दी जाए।
  • कक्षा 10 तक आयुर्वेद व योग को अनिवार्य विषय बनाया जाए।
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