कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के मारपीट प्रकरण से एक बार फिर इस्तीफे का दबाव, विवादों से है पुराना नाता
कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के मारपीट प्रकरण से सरकार की एक बार फिर मुश्किलें बढ़ गई है। पूरे मामले में विपक्ष प्रदेश भर में अब मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहा है।

कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के मारपीट प्रकरण से धामी सरकार की एक बार फिर मुश्किलें बढ़ गई है। पूरे मामले में विपक्ष प्रदेश भर में अब मंत्री का इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहा है। इस बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंत्री को तलब कर पुलिस से जांच करने को निर्देश दिए हैं।
सोशल मीडिया में जमकर भड़ास निकाल रहे लोग
सोशल मीडिया में वायरल वीडियो में कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के ऋषिकेश के एक व्यक्ति को पहले थप्पड़ जड़ने और उसके बाद सुरक्षाकर्मी के उसी व्यक्ति को लात घूसे मारने को लेकर लोग नाराजगी जता रहे हैं। इस पूरे मामले में भले ही मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने पहले ही सफाई देते हुए व्यक्ति पर गाली गलौज करने का आरोप लगाया साथ ही अपने और सुरक्षाकर्मी के कुर्ते फाड़ने का आरोप लगाया हो लेकिन वायरल वीडियो सामने आने के बाद मंत्री पर लोग सोशल मीडिया में जमकर भड़ास निकाल रहे हैं।
धामी सरकार की मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही
इससे धामी सरकार की मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही है। इतना ही नहीं परिजनों और विपक्ष ने देर रात तक ऋषिकेश थाने में मामले को लेकर जमकर हंगामा किया। इस पूरे प्रकरण से एक बार फिर मंत्री प्रेमचंद्र अग्रवाल की भी मुश्किलें बढ़ गई हैं। ये पहली बार नहीं जब मंत्री प्रेमचंद्र अग्रवाल विवादों में घिर गए हों। इससे पहले उत्तराखंड विधानसभा बैक डोर भर्ती मामले से लेकर अपने विभाग में तबादलों को लेकर भी मंत्री निशाने पर आ चुके हैं।
विवादों से है पुराना नाता
उत्तराखंड विधानसभा बैक डोर भर्ती मामले में मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के बयान से सबसे ज्यादा धामी सरकार की मुश्किलें बढ़ी थी। जब भाजपा कार्यालय में मंत्री से उनके स्पीकर रहते उत्तराखंड विधानसभा बैक डोर भर्ती के मामले में पूछा गया तो उनके बयान से सब हैरान हो गए। प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा है कि विधानसभा बनने के बाद से और उनके कार्यकाल यानी 2021 तक विधानसभा में तदर्थ भर्तियां होती आई हैं, लेकिन रडार पर विलेन के तौर पर सिर्फ उन्हें ही पेश किया गया। मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि ये मेरा दुर्भाग्य है कि मुझे ही विलेन बनाया गया है, जबकि राज्य गठन से लेकर अब तक विधानसभा में इसी आधार पर भर्ती हुई है। मंत्री के इस बयान से पार्टी और सरकार दोनों मुश्किल में पड़ती हुई नजर आई।
विधानसभा में हुई तदर्थ नियुक्तियां रद्द होने के बाद,र इस्तीफे का दबाव बना
इससे पहले विधानसभा में 2021 व 2022 में हुई तदर्थ नियुक्तियां रद्द होने के बाद तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष व कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल पर इस्तीफे का दबाव बना। कांग्रेस, यूकेडी व अन्य दलों से उनके इस्तीफे मांग की। विधानसभा में बैक डोर भर्ती विवाद के गरमाने के बाद तत्कालीन स्पीकर व कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल लगातार चर्चाओं में आते गए। बैकडोर नियुक्तियों पर पहले उनका विवादित बयान आया और उसके बाद शहरी विकास विभाग में 70 से अधिक अधिकारियों व कर्मचारियों के तबादला आदेश पर मुख्यमंत्री की ओर से रोक लगाने का मामला गरमाया। फिर एक कंपनी के खर्च पर उनकी और उनके विभाग के अफसरों की जर्मनी यात्रा को लेकर भी खूब चर्चाएं हुईं।
विदेश दौरे पर जाने से ठीक पहले तबादले, 24 घंटे के अंदर स्थगित
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सितंबर 2022 में शहरी विकास मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के अनुमोदन के बाद नगर निकायों में केंद्रीयत सेवा के 74 कार्मिकों के तबादले होने के बाद राज्य सरकार ने इस पर एक्शन लेते हुए तबादलों को 24 घंटे के अंदर स्थगित कर दिए गए। ये तबादले मंत्री ने विदेश दौरे पर जाने से ठीक पहले किए। ऐसे में ये पूरी कार्रवाई सवालों के घेरे में रही। मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल तबादले करने के बाद सात दिवसीय दौरे पर जर्मनी रवाना हो गए थे।












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