Bhagat singh koshyari: 'भगतदा' की नई पारी, गांव जाकर अपने लोगों के बीच या देहरादून से सियासत, जानिए समीकरण
भगत सिंह कोश्यारी के उत्तराखंड पहुंचने से पहले ही सियासत गरमा गई है। जानकारों की मानें तो भगतदा का इतिहास और राजनैतिक अनुभव इस और इशारा कर रहा है कि वे इतने जल्दी सक्रिय राजनीति से दूर नहीं हो सकते हैं।

महाराष्ट्र के राजभवन से विदाई के बाद अब भगत सिंह कोश्यारी के उत्तराखंड पहुंचने से पहले ही सियासत गरमा गई है। भाजपा के साथ ही कांग्रेस में भी इसको लेकर चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर भगतदा की नई पारी क्या होगी। भगतदा अपने पैतृक गांव जाएंगे या देहरादून में रहकर प्रदेश की सियासत में किसी नई भूमिका में रहेंगे। जानकारों की मानें तो भगतदा का इतिहास और राजनैतिक अनुभव इस और इशारा कर रहा है कि वे इतने जल्दी सक्रिय राजनीति से दूर नहीं हो सकते हैं। ऐसे में सत्ता में किसी न किसी तरीके से वे अपनी भूमिका निभा सकते हैं।

पैतृक गांव, बागेश्वर के नामती चेटाबगड़ की गुंठी तोक
माना जा रहा है कि कोश्यारी अब अपने पैतृक गांव लौट सकते हैं, जो कि बागेश्वर के नामती चेटाबगड़ की गुंठी तोक में है। यहां उन्होंने दो कमरों का मकान भी तैयार कराया था। सरकारी अमला भी उनके गांव तक सड़क पहुंचाने के कार्य में जुटा हुआ था। बताया जा रहा है कि पूर्व सीएम भगत सिंह कोश्यारी अपने गांव में, अपने लोगों के बीच समय व्यतीत करना चाहते हैं। बता दें कि भगत सिंह कोश्यारी का जन्म 17 जून 1942 को बागेश्वर जिले में हुआ था।

करीब साढ़े 3 साल महाराष्ट्र के राज्यपाल, विवादित बयानों से घिरा
भगत सिंह कोश्यारी ने करीब साढ़े 3 साल महाराष्ट्र के राज्यपाल के रुप में अपनी भूमिका निभाई। लेकिन उनका ये कार्यकाल विवादित बयानों से घिरा रहा। इस बीच वे उत्तराखंड की सियासत में भी किसी न किसी तरीके से अपनी सक्रिय दिखते रहे। बीच-बीच में कोश्यारी उत्तराखंड प्रवास पर भी आते रहे। पुष्कर सिंह धामी को सीएम की कुर्सी तक पहुंचाने में भगतदा की अहम भूमिका मानी जाती है। कोश्यारी धामी के राजनैतिक गुरु भी हैं। अब जब कोश्यारी उत्तराखंड आ रहे हैं, तो इससे भाजपा संगठन में अंदरखाने कई तरह की चर्चा शुरू हो गई है। भगतदा, पूर्व सीएम बीसी खंडूडी और डॉ रमेश पोखरियाल निशंक के समय सबसे ज्यादा प्रदेश की सियासत में सक्रिय रहे। इस दौरान इन तीनों दिग्गज का आपसी समन्वय कभी नजर नहीं आया। तब ये भाजपा के त्रिमूर्ति कहे जाते थे।

नई पारी उत्तराखंड में खेलने के लिए तैयार
जब खंडूडी को सीएम की कमान मिली तो भगतदा विरोधी गुट में शामिल रहे और जब निशंक को सीएम बनाया गया तब भी वे संगठन के अंदर रहकर भी विपक्ष की भूमिका निभाते रहे। इस तरह से भाजपा संगठन में इन तीनों के गुट सक्रिय रहे। इसके बाद तीनों केंद्र की राजनीति में सक्रिय हो गए। बाद में कोश्यारी लोकसभा और राज्यसभा में सांसद रहे और फिर हाईकमान ने 2019 में राज्यपाल बना दिया। लेकिन माना जाता रहा कि वे उत्तराखंड की सियासत में किसी न किसी तरीके से सक्रिय रहे। हाईकमान भी कोश्यारी से हर मसले पर राय जरुर लेती रही। इस बीच कोश्यारी देहरादून में अपना आवास बनाकर प्रवास करते रहे। लेकिन इससे पहले दिवाली में जब कोश्यारी उत्तराखंड आए तो कुमाऊं दौरे पर रहे। इसके बाद जब वे महाराष्ट्र गए तो उन्होंने हाईकमान से अपनी जिम्मेदारी से मुक्त होने का निवेदन किया। अब वे राजभवन की जिम्मेदारी से मुक्त हो गए हैं। लेकिन नई पारी वे उत्तराखंड में खेलने के लिए तैयार हैं।

भाजपा ही नहीं कांग्रेस के अंदर हलचल
कोश्यारी के उत्तराखंड आने की खबर के बाद से भाजपा ही नहीं कांग्रेस के अंदर हलचल देखी जा रही है। पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा है कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने अनंतोगत्वा कोश्यारी को महाराष्ट्र के गवर्नर पद से हटा ही दिया। रावत ने कहा है कि पहले रमेश पोखरियाल निशंक को को शिक्षा मंत्री पद से हटाए गए, नई शिक्षा नीति बनाई लेकिन उनको पद से हटा दिया गया। कार्यकाल पूरा होने के बाद तो व्यक्ति हटते ही हैं, वह कोई असामान्य बात नहीं है। मगर कार्यकाल के बीच में हटना कई तरीके की चिंताएं पैदा करता है। हरदा ने कहा कि बहरहाल भगत सिंह कोश्यारी उत्तराखंड की राजनीति के महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं और महत्वपूर्ण हमेशा बने रहेंगे। मैं उनके विचारों का नहीं बल्कि उनके समर्पण का कायल हूं।
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सिर्फ 4 माह तक ही वे सीएम रहे
उत्तराखंड बनने के बाद कोश्यारी ने प्रदेश के पहले सीएम नित्यानंद स्वामी सरकार में ऊर्जा और सिंचाई जैसे अहम विभाग के साथ नंबर दो की कुर्सी संभाली। एक साल से भी कम सीएम रहने के बाद स्वामी को हटाकर 30 अक्टूबर 2001 को कोश्यारी ने अंतरिम सरकार के दूसरे मुख्यमंत्री के रूप में पद संभाला। लेकिन सिर्फ 4 माह एक मार्च 2002 तक ही वे सीएम रहे। 2002 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में जनता ने भाजपा को सत्ता से बाहर कर दिया। 2007 में भाजपा सत्ता में लौटी लेकिन हाईकमान ने मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी (सेनि) को सीएम की कुर्सी सौंपी।

2019 में सांसद का टिकट नहीं, सरकार आई गोवा का राज्यपाल बना दिया
इस तरह कोश्यारी का प्रदेश की राजनीति में प्रभाव कम हो गया और पार्टी ने वर्ष 2008 में कोश्यारी को राज्यसभा भेजा। 2014 के लोकसभा चुनाव में वह नैनीताल सीट से जीत कर संसद पहुंचे। वर्ष 2019 में उन्हें सांसद का टिकट नहीं मिला। भाजपा की सरकार आई तो उन्हें गोवा का राज्यपाल बना दिया गया। फिर 31 अगस्त 2019 को महाराष्ट्र जैसे राज्य का राज्यपाल बनाकर अहम जिम्मेदारी सौंपी गई। 12 फरवरी 2023 को कोश्यारी ने महाराष्ट्र के राज्यपाल से इस्तीफा दे दिया।
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