गर्मियों में घूमने का बना रहे हैं प्लान? उत्तराखंड में कहां और कब निकले घूमने के लिए, यहां मिलेगी पूरी जानकारी
अप्रैल माह में ही गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। ऐसे में अब सब इंतजार कर रहे हैं बच्चों के समर वेकेशन की। स्कूलों में मई में समर वेकेशन शुरू हो जाएंगे जो कि जून तक रहते हैं। ऐसे में इन डेढ़ से दो माह के बीच पहाड़ों में घूमने के लिए काफी बेस्ट टाइम रहता है। इसी दौरान चार धाम यात्रा भी पीक पर रहती है। ऐसे में कोशिश करें कि अगर टूरिस्ट स्पॉट पर जाना है तो ऐसे लोकेशन का चयन करें, जहां पहुंचना आसान हो और परिवार के साथ अच्छा समय बिता सकें। उत्तराखंड के पहाड़ों में घूमने के लिए कहां जा सकते हैं। आइए जानते हैंं।

लेंसडाउन
पौड़ी जिले में स्थित लेंसडाउन एक खूबसूरत जगह है। लैंसडाउन में कई फिल्म की शूटिंग भी हो चुकी है। इन दिनों अनुपम खेर भी लेंसडाउन में शूट कर रहे हैं। यहां की वादियां देखकर हर कोई खींचा चला आता है। यहां घूमने के लिए संतोषी माता मंदिर, सेंट मेरी चर्च,दरवान सिंह संग्रहालय, भुल्ला ताल झील,तारकेश्वर महादेव मंदिर,टिप इन टॉप, गढ़वाल रेजिमेंट वॉर मेमोरियल और जंगल सफारी है। लैंसडाउन से कोटद्वार की दूरी करीब 50 किमी की हैं। यहां से ट्रेन और बस की सुविधा आसानी से मिल जाएगी। यहां 5 से 7 हजार रुपए में आसानी से घूमा जा सकता है। पहाड़ के साथ साथ जंगल सफारी और देशभक्ति से जुड़ी चीजें देखने को मिल जाती हैं।
ऋषिकेश
कई पर्यटक ऐसे होते हैं जिन्हें पहाड़ चढ़ने से डर लगता है। अगर मैदान से ही पहाड़ का मजा लेना है तो ऋषिकेश सबसे बेस्ट विकल्प है। गंगा का प्रवाह, योग और मंदिरों का समूह। ऋषिकेश में शांति, सुकून और प्रकृति की सुंदरता सबकुछ मिलेगा। यहां रिवर राफ्टिंग, स्पोर्ट्स एक्टिविटी और गंगा आरती सबसे खास है। साथ ही यहां घूमने के लिए स्वर्गाश्रम, लक्ष्मण झूला, त्रिवेंणी घाट, परमार्थ निकेतन और कौडियाला सबसे खास जगह है। बच्चों के लिए मस्ती करने का यहां पूरा साधन है। यहां बस, ट्रेन के साथ ही हवाई जहाज हर चीज की सुविधा है। साथ ही खाने पीने से लेकर रहने की आसानी से व्यवस्था हो जाती है। ऋषिकेश के लिए बस, ट्रेन और हवाई जहाज सारी सुविधाएं मिल जाएंगी। हालांकि गर्मी यहां भी मैदानी जिलों जैसी ही मिलेगी।
हर्षिल
भागीरथी का प्रवाह और सेब के बगीचों के बीच घूमने और रूकने का मन है तो उत्तरकाशी से करीब 80 किमी दूर है हर्षिल। हर्षिल में अब रिवर राफ्टिंग भी शुरू हो गई है। इसके साथ ही यहां पर प्राकृतिक झरने और सुंदर पहाड़ियां परिवार के साथ सबसे अच्छा समय बिताने का सबसे बेहतर विकल्प है। गंगोत्री जाने वाले अधिकतर तीर्थ यात्री हर्षिल जरुर रुकते हैं। यहां आसपास भी घूमने के लिए बगोरी, घराली, मुखबा, झाला और पुराली गांव हैं। जहां पहाड़ की संस्कृति को भी पास से देखने का मौका मिलेगा। हर्षिल भी प्राकृतिक सुंदरता और नैसर्गिकता के लिए सबसे खास जगह है। यहां बस, टैक्सी से पहुंच सकते हैं। रूकने के लिए होम स्टे, होटल किसी चीज की कमी नहीं रहेगी। बस सीजन में बुकिंंग करके ही घूमने निकलें।
पिथौरागढ़
कुमाऊं में सबसे खूबसूरत हिल स्टेशन में पिथौरागढ़ सबसे ज्यादा पसंदीदा जगह है। पिथौरागढ़ में उच्च हिमालयी पहाड़, बर्फ से ढकी चोटियां, दर्रों, घाटियों, अल्पाइन घास के मैदानों, जंगलों, झरनों, बारहमासी नदियों, ग्लेशियरों और झरनों से घिरा खूबसूरत जगह है। जहां मुनस्यारी थल केदार मंदिर पिथौरागढ़ किला कामाख्या मंदिर कपिलेश्वर महादेव मंदिर ध्वज मंदिर मोस्टमानु मंदिर चांडक हिल भुरमुनी जलप्रपात घूमने फिरने की जगह है। पिथौरागढ़ दिल्ली से करीब 500 किमी है। राज्य सरकार की पहल पर अब सीधे विमान से पिथौरागढ़ पहुंचा जा सकता है।
मुनस्यारी
कुमाऊं मण्डल के पिथौरागढ़ में स्थित मुनस्यारी एक खूबसूरत पर्वतीय स्थल है। यह नेपाल और तिब्बत की सीमाओं के समीप है। मुनस्यारी चारो ओर से पर्वतो से घिरा हुआ है। मुनस्यारी के सामने विशाल हिमालय पर्वत श्रंखला का विश्व प्रसिद्ध पंचचूली पर्वत (हिमालय की पांच चोटियां) जिसे किवदंतियो के अनुसार पांडवों के स्वर्गारोहण का प्रतीक माना जाता है, बाई तरफ नन्दा देवी और त्रिशूल पर्वत, दाई तरफ डानाधार जो एक खूबसूरत पिकनिक स्पॉट भी है और पीछे की ओर खलिया टॉप है। काठगोदाम, हल्द्वानी रेलवे स्टेशन से मुनस्यारी की दूरी लगभग 295 किलोमीटर है और नैनीताल से 265 किलोमीटर है। मुनस्यारी में ठहरने के लिए काफी होटल, लॉज और गेस्ट हाउस है।












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