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उत्तराखंड में टिकट बंटवारे से पहले कांग्रेस हाईकमान के इस फैसले से उड़ी नेताओं की नींद, जानिए क्या है मामला

उत्तराखंड में टिकट बंटवारे से पहले कांग्रेस हाईकमान के इस फैसले से उड़ी बड़े नेताओं की नींद

देहरादून, 11 जनवरी। उत्तराखंड में टिकट बंटवारे को लेकर कांग्रेस के अंदर सुगबुगाहट तेज हो गई है। कांग्रेस आने वाले दिनों में टिकटों को लेकर तस्वीर साफ कर देगी। लेकिन टिकट बंटवारे से पहले उत्तराखंड कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष अविनाश पांडे के एक बयान ने दावेदारों की मुश्किल बढ़ा दी है। जिसमें उन्होंने एक परिवार से एक टिकट के फॉर्मूले को अपनाने की बात की है। कांग्रेस के अंदर उत्तराखंड में एक टिकट एक परिवार का फॉर्मूला लागू न करने की मांग चल रही थी, जिसको लेकर बीते दिनों प्रदेश स्तर के नेताओं ने अपनी स​हमति जताई थी, लेकिन अब हाईकमान के नए इशारे ने ऐसे नेताओं की धड़कनें बढ़ा दी हैं, जो कि अपने परिवार को राजनी​ति में उतारना चाहते थे।

दो खेमों में बंटी पार्टी की विचारधारा

दो खेमों में बंटी पार्टी की विचारधारा

कांग्रेस में परिवारवाद को लेकर लंबे समय से दो खेमा आमने सामने आता रहा है। चुनाव में एक खेमा कांग्रेस की हार के लिए परिवारवाद को ही दोषी मानता रहा है, जबकि दूसरा खेमा इसे हार का कारण नहीं मानता है। दिल्ली से लेकर उत्तराखंड तक कांग्रेस के बड़े नेता अपने परिवार को राजनीति में उतारते आ रहे हैं। ऐसे में चुनाव में टिकट दिलाना भी इन बड़े नेताओं के लिए बड़ा चेलेंज साबित होता आया है। पार्टी स्तर पर किसी भी निर्णय या फैसला लेने के लिए बड़े नेताओं की राय ही सबसेे अहम होती है। इस बार पंजाब में सबसे पहले कांग्रेस ने एक परिवार एक टिकट देने का दावा किया। लेकिन उत्तराखंड के नेताओं ने इस ​फॉर्मूले का यहां लागू करने से मना कर दिया। लेकिन अब स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक से कुछ दिन पहले ही हाईकमान ने ​एक परिवार एक टिकट का फॉर्मूला मानने की बात कही है। जिससे कुछ दावेदारों के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है।

सीनियर नेता कतार में

सीनियर नेता कतार में

खास बात ये है कि परिवारवाद में सबसे पहले सीनियर नेता ही आ रहे हैं, जो कि कांग्रेस में टिकट बंटवारे में सबसे अहम कड़ी हैं। इनमें पूर्व सीएम हरीश रावत, नेता प्रतिपक्ष हरीश रावत और कार्यकारी अध्यक्ष रणजीत रावत और पूर्व कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य हैं। हालांकि पार्टी यशपाल आर्य के मामले को इस फॉर्मूले से बाहर रखने की बात कह रही है। पिता पुत्र के सिटिंग विधायक होने के कारण पार्टी यशपाल आर्य और संजीव आर्य दोनों को टिकट दे सकती है। जबकि हरीश रावत अपनी बेटी, प्रीतम सिंह और रणजीत रावत अपने बेटों के लिए टिकट मांग रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस के नए टिकट फॉर्मूले ने इन दावेदारों की टेंशन बढ़ा दी है।

भाजपा को मुद्दा नहीं देना चाहती है कांग्रेस

भाजपा को मुद्दा नहीं देना चाहती है कांग्रेस

कांग्रेस इस बार चुनाव में भाजपा को कोई बड़ा मुद्दा नहीं देना चाहती है। जिसमें परिवारवाद सबसे पुराना मुद्दा रहा है। भाजपा पहले ही कांग्रेस में गांधी परिवार को लेकर हमलावर रही है। जबकि भाजपा अपने पार्टी में परिवारवाद को न बढ़ाने का दावा करती आ रही है। लेकिन इस बार कांग्रेस भाजपा को किसी भी चुनावी राज्य में परिवारवाद को मुद्दा नहीं बनाना देना चाह रही है। पंजाब के बाद उत्तराखंड में भी कांग्रेस एक परिवार से एक को ही टिकट देने का दावा कर रही है। हालांकि जब प्रत्याशियों का चयन होगा तो कितने ऐसे दिग्गज हैं जो इस फॉर्मूले को लेकर तैयार होते हैं, ये देखना भी दिलचस्प होगा। ऐसे में कुछ सीनियर नेता अपने परिजनों के लिए मैदान छोड़ भी सकते हैं। जिसमें पूर्व सीएम हरीश रावत का नाम लिस्ट में सबसे ऊपर है। ऐसे में सभी के साथ समन्वय बिठाकर ही कांग्रेस पहली सूची जारी करेगी। इसके लिए जल्द ही कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी में 42 से ज्यादा सीटों पर प्रत्याशियों के नाम पर मुहर लग सकती है।

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