Bageshwar by-election: सज गया चुनावी मैदान, उपचुनाव का रिकॉर्ड और बागेश्वर का इतिहास जानिए किसके पक्ष में?
बागेश्वर उपचुनाव को लेकर भाजपा, कांग्रेस ने अपने अपने प्रत्याशी मैदान में उतार दिए हैं। दोनों ही प्रत्याशियों ने नामांकन भी करा लिया है। अब प्रचार प्रसार के साथ ही सियासत तेज हो गई।
बागेश्वर उपचुनाव को लेकर भाजपा, कांग्रेस ने अपने अपने प्रत्याशी मैदान में उतार दिए हैं। दोनों ही प्रत्याशियों ने नामांकन भी करा लिया है। अब प्रचार प्रसार के साथ ही सियासत तेज हो गई। भाजपा ने इस चुनाव में दिवंगत विधायक की पत्नी पार्वती दास को उतारा है, तो कांग्रेस ने बसंत कुमार को प्रत्याशी बनाया है। उपचुनाव को लेकर भाजपा, कांग्रेस के अपने अपने दावे हैं, लेकिन रिकॉर्ड पर नजर डालें तो उपचुनाव के नतीजे हमेशा सत्ता पक्ष के पाले में जाते हुए नजर आ रहे हैं। साथ ही बागेश्वर में अब तक विधानसभा के चुनाव में भाजपा का ही दबदबा कायम रहा है।

उत्तराखंड में एक बार फिर उपचुनाव हो रहा है। इस बार कैबिनेट मंत्री रहे चंदनराम दास के आकस्मिक निधन से खाली हुई सीट पर चुनाव हो रहा है। जो कि भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर विधायक बने और फिर कैबिनेट मंत्री बने। अब उनके निधन के बाद पार्टी ने दिवंगत विधायक की पत्नी पर ही दांव खेला है। जो कि पार्टी का सहानुभूति कार्ड माना जा रहा है।
इससे पहले उत्तराखंड के 23 साल के इतिहास में 14 उपचुनाव हो चुके हैं। जिनमें से 13 बार सत्ता पक्ष को ही विजय मिली है। सिर्फ एक बार उत्तराखंड क्रांति दल ने कांग्रेस की सरकार रहते उपचुनाव में जीत दर्ज की थी। इसके साथ ही बागेश्वर सीट की बात करें तो पहले विधानसभा चुनाव 2002 में कांग्रेस के राम प्रसाद टम्टा ने भाजपा के नारायण राम दास को हराया। वर्ष 2007 दूसरे विधानसभा में कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए चंदन राम दास को भाजपा ने टिकट दिया। तब चंदन राम दास कांग्रेस के कैबिनेट मंत्री राम प्रसाद टम्टा को पटकनी देकर पहली बार विधानसभा में पहुंचे।
तीसरे 2012 के विधानसभा चुनावों में दास ने कांग्रेस के राम प्रसाद टम्टा को लगभग 9000 मतों के भारी मतों के अंतर से हराया। दास ने 2017 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के नए चेहरे बालकृष्ण को 14 हजार मतों के अंतर से पराजित किया। 2022 में चंदन ने कांग्रेस के फिर से नए चेहरे रंजीत दास को 12141 मतों के अंतर से हराया। इस तरह 2007 से लगातार चार बार इस सीट पर भाजपा का दबदबा रहा।
2002 में सिर्फ पहला चुनाव कांग्रेस ने जीता। लेकिन चंदनराम दास के चुनाव में उतरने के बाद से कांग्रेस दोबारा चुनाव नहीं जीत पाई। इस बार कांग्रेस के 2022 में प्रत्याशी रहे रणजीत दास भी भाजपा के पाले में आ गए हैं। तो वहीं कांग्रेस ने आप छोड़कर हाथ थामने वाले बसंत कुमार को टिकट देकर चुनाव को दिलचस्प करने की कोशिश जरुर की है। लेकिन जिस तरह से बागेश्वर में सीएम धामी, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और पार्टी के सीनियर नेताओं ने एकजुटता दिखाई, उससे साफ है कि भाजपा उपचुनाव को किसी भी तरह से हल्के में नहीं लेगी।
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