Anti conversion Law: योगी के यूपी मॉडल से एक कदम आगे बढी धामी सरकार, जानिए धर्मांतरण कानून के बारे में
उत्तराखंड में धर्मांतरण कानून हुआ सख्त
उत्तराखंड की धामी सरकार ने धर्मांतरण को और अधिक सख्त और संज्ञेय बनाते हुए यूपी के योगी मॉडल को आगे बढ़ाने की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाया है। कैबिनेट ने इसमें कई नए संशोधन करने के प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। मंत्रिमंडल द्वारा उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2018 के विभिन्न प्रावधानों पर संशोधनों को मंजूरी दी गई। साथ ही इस अपराध को गैर जमानती अपराध की श्रेणी में लाया जाएगा। यूपी में एक व्यक्ति का जबरन धर्मांतरण करने पर एक से 5 साल तक की सजा और 25 हजार जुर्माना है। जबकि उत्तराखंड में दो से 7 साल की सजा और 25 हजार जुर्माना होगा। सामूहिक धर्मांतरण पर 3 से 10 साल की सजा होगी, पहले अधिकतम तीन साल की सजा थी।

धर्मांतरण कानून का यूपी मॉडल
यूपी मॉडल की बात करें तो धर्मांतरण कानून के तहत जबरन धर्म परिवर्तन कराने पर न्यूनतम 15000 रुपये के जुर्माने के साथ एक से पांच साल की कैद का प्रावधान है और एससी, एसटी समुदाय के नाबालिगों और महिलाओं के धर्मांतरण पर तीन से 10 साल जेल की सजा का प्रावधान है। जबरन सामूहिक धर्मांतरण के लिए जेल की सजा तीन से 10 साल और जुर्माना 50000 रुपये है।

एमपी सरकार के नए अध्यादेश कुछ मायनों में उत्तर प्रदेश के समान है
वहीं मध्य प्रदेश में भी धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2020 में कुछ मामलों में दस साल की जेल के दंड का प्रावधान किया गया है। एमपी सरकार के नए अध्यादेश कुछ मायनों में नवंबर 2020 में उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा अधिसूचित उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश, 2020 के समान है। क्योंकि उसमें भी जबरन धर्मांतरण करवाने वाले के लिए अधिकतम 10 साल की सजा का प्रावधान है।

1967 में ओडिशा, 1968 में मध्य प्रदेश ने जबरन मतांतरण रोकने के लिए कदम उठाए
देशभर में सबसे पहले 1967 में ओडिशा और अगले साल 1968 में मध्य प्रदेश ने जबरन मतांतरण जैसी गतिविधियों को रोकने के लिए कदम उठाए। उत्तर प्रदेश में फरवरी 2021 में यह कानून पारित किया गया वहीं गुजरात सरकार ने गुजरात धर्म की स्वतंत्रता ,संशोधन विधेयक 2021 को 15 जून से लागू कर दिया। अरुणाचल प्रदेश -1978 छत्तीसगढ़ -2000 व 2006, हिमाचल प्रदेश -2006 व 2019, झारखंड- 2017, उत्तराखंड -2018, उत्तर प्रदेश ने 2021 में इस कानून को लागू किया । इनके अलावा 2002 में तमिलनाडु और 2006 व 2008 में राजस्थान ने भी इस कानून को लागू किया लेकिन बाद में रद कर दिया गया।

धर्मांतरण को गैर जमानती अपराध बनाना जनआकांक्षाओं के अनुरूप: भट्ट
भाजपा ने प्रदेश कैबिनेट द्वारा धर्मांतरण अपराध को गैरजमानती बनाने व 10 साल की सजा के प्रावधान वाले संसोधन का स्वागत करते हुए इसे जनआकांक्षाओं के अनुरूप बताया है । प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त करते हुए इस कदम को जबरन धर्मांतरण को रोकने की दिशा में मील का पत्थर साबित होने वाला बताया। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि लंबे समय से धर्मांतरण के अपराधों पर रोक लगाने के लिए सख्त कानून लाये जाने की जरूरत महसूस की जा रही थी । लिहाजा सीएम की अध्यक्षता में कैबिनेट का जबरन धर्मांतरण को संज्ञेय अपराध बनाते हुए 10 वर्ष की सजा के प्रावधान करने वाला यह संशोधन सराहनीय है । उन्होंने उमीद जतायी कि नया कानून धोखे, दबाब या लालच से धर्मांतरण करवाने वालों व लवजिहाद की मंशा रखने वालों के मन में कानून का खौफ पैदा करने का काम करेगा ।












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