AIIMS ऋषिकेश चिकित्सा क्षेत्र में सिमुलेशन विषय पर एआरसीसिम 2025 का आयोजन, तकनीक-आधारित सिमुलेशन पद्धति पर जोर
AIIMS Rishikesh एम्स ऋषिकेश की और से चिकित्सा क्षेत्र में सिमुलेशन विषय पर आयोजित सम्मेलन (एआरसीसिम 2025) का आयोजन हुआ। सम्मेलन में देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों, स्वास्थ्य शिक्षा विशेषज्ञों एवं सिमुलेशन के क्षेत्र के अग्रणी विशेषज्ञ प्रतिभाग कर रहे हैं।
इस अवसर पर संस्थान की कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रोफेसर डॉ. मीनू सिंह के उद्बोधन में उन्होंने अपने प्रशिक्षण काल यूएसए के पिट्सबर्ग चिल्ड्रन हॉस्पिटल में प्रशिक्षण काल के दौरान के अनुभव साझा किए। बताया कि उस दौर में सी वन, डू वन, टीच वन का पारंपरिक कौशल शिक्षण मॉडल प्रचलित था, जिसे अब बदलकर सी वन, प्रैक्टिस मेनी, डू वन कर दिया गया है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि इस सम्मेलन के दौरान विभिन्न विषयों से जुड़े विशेषज्ञ तकनीक आधारित, तकनीक रहित तथा हाइब्रिड सिमुलेशन के विषय में रोचक, ज्ञानवर्धक और नवाचारी प्रमाण प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने टेली-सिमुलेशन और टेली-ब्रीफिंग जैसी नई संभावनाओं की चर्चा करते हुए बताया कि यह सिमुलेशन आधारित शिक्षण के विस्तार के नए मार्ग खोल सकती हैं।
एम्स संस्थान के अध्यक्ष एवं सम्मेलन के मुख्य अतिथि प्रो. समीरन नंदी ने कहा कि शल्य चिकित्सा सिमुलेशन एक नई विधि है, जो पहले उपलब्ध नहीं थी। यह विधि विद्यार्थियों को यह समझाने में सहायक हो सकती है कि किस प्रकार ऑपरेशन किया जाना चाहिए।
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आधुनिक चिकित्सा शिक्षा में सिमुलेशन आधारित अधिगम और परंपरागत शिक्षण विधियों के बीच तुलना करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके पश्चात संकायाध्यक्ष (शैक्षणिक) प्रो. जया चतुर्वेदी ने बताया कि सिमुलेशन, शिक्षा के क्षेत्र में किस तरह से क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।
उन्होंने कहा कि सिमुलेशन वातावरण में शिक्षार्थियों को गलतियां करने, प्रश्न पूछने और बिना किसी भय के सीखने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। बकौल डीन एकेडमिक, जैसा कि हम अक्सर कहते हैं -सिम में जो होता है, वो सिम में ही रहता है। यह एक ऐसा सुरक्षित मंच है, जहां व्यक्ति सीख सकता है, पुरानी गलतियों को भूल सकता है और अपने कौशल में सुधार कर सकता है, इस प्रक्रिया से अंततः वास्तविक जीवन में रोगी देखभाल की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकता है।
इस मौके पर डॉ. लंदन ओई, सिंगहेल्थ ड्यूक-एनयूएस अकादमिक मेडिकल सेंटर, सिंगापुर, डॉ. अशोक्का बालाकृष्णन, कंसल्टेंट एनेस्थेसियोलॉजिस्ट एवं सिमुलेशन कार्यक्रम निदेशक, नेशनल यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल, सिंगापुर ने भी व्याख्यान प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम की आयोजन सचिव प्रोफेसर शालिनी राव ने बताया कि एम्स ऋषिकेश के मेडिकल सिमुलेशन एवं कौशल विकास केंद्र द्वारा अब तक 36,000 से अधिक लोगों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि तकनीक-आधारित सिमुलेशन पद्धति हमारे कौशल शिक्षण के तरीकों में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकती है।
बताया गया है कि एआरसीसिम 2025 सम्मेलन का उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा तकनीकों और आधुनिक सिमुलेशन तकनीकों के बीच संतुलन स्थापित करना है। यह सम्मेलन समावेशी, यथार्थपरक और लागत प्रभावी प्रशिक्षण रणनीतियों को बढ़ावा देता है, जिन्हें भारत की विविध स्वास्थ्य प्रणालियों में लागू किया जा सकता है। सम्मेलन का आयोजन चिकित्सा, शल्य चिकित्सा, सहायक चिकित्सा क्षेत्रों तथा नर्सिंग सहित विभिन्न विषयों के लिए किया गया है।
उन्होंने जानकारी दी कि देशभर के विशेषज्ञों की एक विशिष्ट श्रेणी इस सम्मेलन में भाग ले रही है तथा सम्मेलन के अंतर्गत 11 समानांतर कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। कार्यक्रम के दौरान ई-स्मारिका (ई-सुवेनिर) का डिजिटल विमोचन किया गया। इस अवसर पर आयोजन समिति की ओर से गणमान्य अतिथियों को सम्मानित किया गया। आयोजन सचिव डॉ. मृदुल धर के संचालन में आयोजित सम्मेलन एवं कार्यशालाओं में कुल 310 प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं।











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