उत्तराखंड में चुनाव जीतते ही 3 विधायकों ने की सीट छोड़ने की पेशकश, सीएम की रेस में जानिए कौन—कौन ?
पार्टी विधायकों में से ही किसी को सीएम बनाने की चर्चा तेज
देहरादून, 11 मार्च। उत्तराखंड में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिल गया है। भाजपा 47 सीटें जीतकर एक बार फिर सरकार बनाने जा रही है। लेकिन भाजपा के लिए इस समय सबसे बड़ी समस्या मुश्किल मुख्यमंत्री के नाम को लेकर सामने आ रही है। पुष्कर सिंह धामी के चुनाव हारने से भाजपा अब नए मुख्यमंत्री को लेकर मंथन करने में जुट गई है। हालांकि जिस तरह का भाजपा का इतिहास है ऐसे में कोई चौंकाना वाला नाम भी सामने आ सकता है। भाजपा ने धर्मेंद प्रधान और पीयूष गोयल को उत्तराखंड का पर्यवेक्षक बना दिया है। जो जल्द उत्तराखंड जाकर सीएम के नाम पर सहमति बनाऐंगे। भाजपा सूत्रों का दावा है कि पार्टी विधायकों में से ही किसी को सीएम बनाने के विकल्प पर ज्यादा जोर दे रही है।

धामी पर भी हो सकता है विचार
शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चुनाव परिणाम सामने आते ही अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप दिया। अब भाजपा में नए सीएम को लेकर मंथन शुरू हो गया है। भाजपा के अंदर इस समय आधा दर्जन से ज्यादा नामों पर चर्चा हो रही है। जो कि सीएम की रेस में बताए जा रहे हैं। जीते हुए कई विधायक एक बार फिर पुष्कर सिंह धामी को सीएम बनाने की बात कर रहे हैं। जिसके लिए एक सीट खाली करवानी पड़ेगी। पुष्कर सिंह धामी खटीमा सीट से चुनाव हार गए। धामी के नाम पर भाजपा ने इस बार चुनाव लड़ा और धामी को ही चेहरा मानकर भाजपा ने चुनाव में पूरा जोर लगाया। पार्टी ने सभी कयासों को तोड़ते हुए दोबारा सरकार बनाने में कामयाब हो गई है। अब ऐसे में धामी की जगह सीएम की कुर्सी किसे सौंपी जाए ये हाईकमान को तय करना है।
2 धामी, 1 त्रिवेंद्र के लिए सीट छोड़ने को तैयार
भाजपा के कुमाऊं से दो जीते हुए विधायक धामी के लिए सीट छोड़ने की पेशकश कर चुके हैं। इनमें चंपावत सीट से कैलाश गहतोड़ी और जागेश्वर सीट से मोहन सिंह शामिल हैं। जो कि पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री बनाने और अपनी सीट छोड़ने की पेशकश कर चुके हैं। इधर डोईवाला से विधायक बृजभूषण गैराला ने पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के लिए सीट छोड़ने की बात की है। इस तरह से भाजपा के तीन विधायक अब तक खुलकर सीट छोड़ने और मुख्यमंत्री को लेकर अपनी राय रख चुके हैं। ऐसे में अब हाईकमान के सामने सीएम को लेकर आपसी समन्वय बनाने की चुनौती है। धामी और त्रिवेंद्र दोनों में से मजबूत नाम को लेकर अभी पार्टी के अंदर दो गुट बने हुए नजर आ रहे हैं। जिनमें से सबसे ज्यादा मजबूत नाम पुष्कर सिंह धामी माना जा रहा है। इसके अलावा विधायकों में धन सिंह रावत और सतपाल महाराज लॉबिंग में जुटे हैं। सतपाल महाराज ने राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय से मिलकर अपने पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हैं। धन सिंह रावत की संगठन से हाईकमान तक में खासा पहुंच मानी जाती है। जबकि महाराज का भी अपना सियासी कद है। महाराज ने कांग्रेस का हाथ सीएम पद न मिलने से ही छोड़ा था। जो कि लगातार सीएम के लिए लॉबिंग करते आए हैं। अब महाराज इस समय को किसी भी सूरत में चुकना नहीं चाहते हैं। साथ ही अब गढ़वाल, कुमाऊं, ब्राह्रमण, क्षत्रिय फैक्टर पर भी भाजपा को मंथन करना है। धन सिंह और सतपाल महाराज दोनों रावत यानि क्षत्रिय हैं। साथ ही दोनों पौड़ी गढ़वाल से आते हैं। उत्तराखंड में अब तक अधिकतर सीएम पौड़ी से ही रहे हैं।
आधा दर्जन दावेदार तैयार
प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के समर्थक भी कौशिक को मजबूत दावेदार मान रहे हैं। जिनके नेतृत्व में चुनाव लड़ा गया। कौशिक तराई का फेस हैं। ऐसे में पार्टी कौशिक के नाम पर भी विचार कर सकती है। इसके अलावा भाजपा का एक खेमा पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक, केन्द्रीय राज्य मंत्री अजय भट्ट और सांसद अनिल बलूनी के नामों पर भी विचार करने की बात कर रहा है। हालांकि इन परिस्थितियों में उपचुनाव कराना भी भाजपा के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है। इन नामों में निशंक और अजय भट्ट दोनों हाईकमान के काफी करीब रह चुके हैं। जबकि बलूनी सीधे मोदी और शाह से करीब हैं। इस तरह से भाजपा को बीच का फॉर्मूला निकालकर विधायकों में से ही किसी को सीएम बना सकती है।












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