कांग्रेस की हार के बाद पूर्व सीएम हरीश रावत की पोस्ट से हलचल तेज, राजनीतिक स्थिरता को लेकर कही ये बात

उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत की पांचों सीटों पर जीत की भविष्यवाणी गलत साबित हुई। इसके साथ ही हरीश रावत हरिद्वार और गढ़वाल सीट को लेकर जिस तरह से आश्वस्त नजर आए थे, वो भी सही नहीं हुआ।

उत्तराखंड में भाजपा सभी सीटों पर अच्छे मार्जिन से चुनाव जीती है। जिससे कांग्रेस संगठन और बड़े नेताओं पर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। पार्टी के अंदर सीनियर नेताओं के चुनाव न लड़ने और प्रचार में पूरा योगदान न देने को लेकर भी अंदरखाने विरोध शुरू हो गया है। जिसका असर आने वाले दिनों में देखने को मिल सकता है।

After defeat Congress stir in post of former CM Harish Rawat said regarding political stability

चुनाव परिणामों से कांग्रेस के प्रदेश स्तर के बड़े नेताओं पर भी प्रश्न चिह्रन खड़ा हो गया है। इस चुनाव में पूर्व सीएम हरीश रावत से भी कांग्रेस को काफी उम्मीदें थी। लेकिन हरीश रावत अपने बेटे वीरेंद्र रावत के चुनाव में ही पूरी तरह से व्यस्त रहे। ​वीरेंद्र रावत भी अपना चुनाव हार गए। हरीश रावत ने बेटे की हार के बाद पहला सोशल मीडिया पोस्ट किया है।

हरीश रावत ने सभी जीते उम्मीदवारों को जीत की बधाई दी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के हितों को दिल्ली में ठीक से देख सकें, उनकी हिफाजत कर सकें व आगे बढ़ा सकें। हरदा का मानना है कि चुनाव ने समग्र उत्तराखंडियत की सोच पर गहरा घाव दिया है। कहा कि पहले से ही कुशासन से ग्रस्त राज्य को राजनीतिक स्थिरता की आवश्यकता है। आखिर में हरीश रावत ने एक बात का जिक्र करते हुए कहा कि मैं उम्मीद करता हूं कि इस चुनाव के साथ राज्य में राजनीतिक स्थिरता बनी रहेगी। जिसके अब सियासी मायने तलाशे जा रहे हैं।

बता दें कि विधानसभा चुनाव में जब हरीश रावत के नेतृत्व में चुनाव लड़ा और कांग्रेस हार गई तो उसके बाद हरीश रावत को ही कांग्रेस की हार के लिए जिम्मेदार माना गया। इसके बाद लोकसभा में हरीश रावत ने पहले हरिद्वार सीट से दावा ठोका लेकिन बाद में बेटे वीरेंद्र रावत को टिकट दिला दिया। इस चुनाव में हरीश रावत ने बेटे को जिताने के लिए कड़ी मेहनत की। लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली। इस बीच हरीश रावत का भी राजनीतिक संन्यास माना गया।

हालांकि हरीश रावत ने हाल ही में पूरे उत्तराखंड घूमने की बात की है। साफ है कि हरीश रावत फिलहाल राजनीति से रिटायर्ड नहीं होने वाले हैं। हरीश रावत कहते हैं कि चुनाव में बहुत सारे क्षेत्रों में लोगों को प्रणाम करने नहीं पहुंच पाया। जून के आखिरी सप्ताह से लेकर 15-20 जुलाई तक उत्तराखंड का भ्रमण करूंगा, पुराने साथियों से मिलूंगा और वहां के गाड़-गधेरे और धारे भी मेरे साथी हैं, जीवन के इस कालखंड में मैं उनसे भी भेंट करना चाहूंगा।

कहा कि प्रारंभ में बेलड़ा स्थित रैदास मंदिर में का कीर्तन करूंगा और प्रसाद बाटूंगा। हर की पैड़ी पर मां गंगा की आरती करूंगा, कलियर शरीफ में चादर भी चढ़ाऊंगा और फिर अपने आगे की भ्रमण पर प्रस्थान करुंगा और भ्रमण के दौरान कांग्रेसजनों से भी भेंट करूंगा। मैं आगे के लिए आपसे और अधिक उत्साह से काम करने का आग्रहपूर्ण मंत्र दूंगा। जिसके बाद एक बार हरीश रावत की सक्रियता के मायने तलाशे जाने लगे हैं कि उनकी कांग्रेस के अंदर क्या भूमिका रहेगी।

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