21 साल बाद क्या कमाल कर पाएगी ट्रिपल इंजन की सरकार, जानिए क्या है मामला

21 साल बाद भी यूपी और उत्‍तराखंड में नहीं हुआ परिसंपत्तियों को लेकर निर्णय

देहरादून, 17 नवंबर। उत्तरप्रदेश से अलग हुए उत्तराखंड को 21 साल हो गए हैं, ऐसे में परिसंपत्तियों के बंटवारे के मामले में 21 साल बाद अब ट्रिपल इंजन की सरकार केन्द्र में मोदी, यूपी में योगी और उत्तराखंड में धामी की सरकार से उत्तराखंड के लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। परिसंपत्तियों के बंटवारे को लेकर गुरुवार 18 नवंबर को लखनऊ में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच बैठक होगी। इससे पहले बुधवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लखनऊ विश्वविद्यालय के स्वागत कार्यक्रम में शामिल होंगे।

योगी और धामी की जोड़ी से उम्मीद

योगी और धामी की जोड़ी से उम्मीद

केन्द्र, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड तीनों जगह भाजपा की सरकार होने के बावजूद भी उत्तरप्रदेश उत्तराखंड के बीच परिसंपत्तियों का बंटवारा नहीं हो पाया है। चुनावी साल में एक बार फिर उत्तराखंड की धामी सरकार परिसंपत्तियों के बंटवारे को लेकर गंभीर नजर आ रही है। चुनावी साल में यूपी और उत्तराखंड के युवा सीएम 21 साल से लटके बड़े मुद्दों को सुलझाकर उत्तराखंड के लिहाज से बड़ा निर्णय ले सकते हैं। ​योगी अपनी जन्म भूमि का कर्ज जो कि उत्‍तराखंड में जन्‍में हैं और धामी अपने सीएम कार्यकाल का सबसे बड़ा ऐतिहासिक काम करने का श्रेय ले सकते हैं। ऐसे में इस ऐतिहा‍सिक फैसले से दोनाें योगी और धामी को राजनी‍तिक लाभ भी मिल सकता हैा

कोर्ट में लंबित मामले

कोर्ट में लंबित मामले

हालांकि परिसंपत्ति विवाद को लेकर कई मामले कोर्ट में लंबित चल रहे हैं। इनमें राजस्व, सिंचाई, जल विद्युत परियोजनाएं, परिवहन, पर्यटन व कार्मिकों के आवंटन के मामले शामिल हैं। माना जा रहा है कि 18 नवंबर को होने वाली दोनों प्रदेशों के मुख्यमंत्री के बीच सभी मसलों पर अहम चर्चा होगी। बुधवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी दोपहर में देहरादून से रवाना होकर लखनऊ पहुंचेंगे। यहां वह लखनऊ विश्वविद्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होंगे। हालांकि परिसंपत्तियों के बंटवारे के मसले पर जानकार बताते हैं कि जब तक उत्तर प्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम में बदलाव नहीं होगा तब तक परिसंपत्तियों का बंटवारा नहीं हो सकता है। ऐसे में दोनों सरकारों को ठोस कदम उठाना पड़ेगा। उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकार जय सिंह रावत का कहना है कि उत्तर प्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम में धारा 79,80, 81, 82 रहेंगी तब तक परिसंपत्तियों का निपटारा नहीं होगा। उनका कहना है कि उत्तरांचल राज्य के गठन के लिए बाजपेई सरकार द्वारा बनाए गए पुनर्गठन अधिनियम 2000 के चलते उत्तराखंड का अपने जल संसाधन पर मालिकाना हक नहीं है, इसलिए उत्तर प्रदेश उसे नहर है और जलाशय नहीं दे रहा है। इस तरह से ये मुद्दे सुलझाने भी आसान नहीं है।

इन मामलों में अटका है पेंच-

इन मामलों में अटका है पेंच-

सिंचाई विभाग उत्तराखण्ड को जनपद उधमसिंह नगर हरिद्वार एवं चम्पावत में कुल 379.385 हेक्टेयर भूमि के हस्तांतरण
जनपद हरिद्वार में आवासीय/अनावासीय भवनों का हस्तांतरण
गंग नहर से 665 क्यूसेक जल उपलब्ध कराने
जनपद उधमसिंह नगर तथा हरिद्वार की नहरों को राज्य को दिये जाने
नानक सागर, धौरा तथा बेंगुल जलाशय को पर्यटन एवं जल क्रीड़ा के लिए उपलब्ध कराये जाने
टीएचडीसी में उत्तर प्रदेश की अंश पूंजी उत्तराखण्ड को हस्तांतरित करने
मनेरी भाली जल विद्युत परियोजना के लिए लिये गये ऋण के समाधान
परिवहन, वित्त, आवास, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति वन कृषि से सम्बन्धित विषयों पर निर्णय

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+