आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा शुरू, जानिए क्या है रूट और पौराणिक महत्व, क्यों है खास
Adi Kailash Om Parvat Yatra बुधवार 14 मई यानि आज से हल्द्वानी काठगोदाम से आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा शुरू हो गई है। आदि कैलाश यात्रा का पहला जत्था आज हल्द्वानी से रवाना हुआ। पहले दल में कुल 20 श्रद्धालु शामिल हैं। जिनमें 13 पुरुष और 7 महिलाएं हैं। इस दल में 6 श्रद्धालु महाराष्ट्र, 7 तमिलनाडु, 7 उत्तराखंड से हैं।
यात्रा का शुभारंभ हल्द्वानी के काठगोदाम से हुआ। पहले दिन श्रद्धालु भीमताल, फिर गोलजू देवता मंदिर, जागेश्वर होते हुए रात के समय पिथौरागढ़ पहुंचेंगे। दूसरे दिन यात्रा धारचूला, तीसरे दिन गूंजी, चौथे दिन नाभीढांग और फिर पांचवे दिन श्रद्धालु आदि कैलाश के दर्शन करेंगे। इसके बाद यात्रा छठें दिन चौकोड़ी, सातवें दिन अल्मोड़ा होते हुए आठवें दिन वापसी हल्द्वानी के काठगोदाम में समाप्त होगी।

आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा का पहला दल काठगोदाम से रवाना होकर नैनीताल, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ के विभिन्न मंदिरों के दर्शन करने के साथ ही गुंजी पहुंचेगा। जहां से जॉलिंगकोंग में आदि कैलाश और नाभीढांग में ओम पर्वत के दर्शन किए जाएंगे। पहले दिन श्रद्धालुओं का दल काठगोदाम से भीमताल, जागेश्वर होते हुए 196 किमी दूरी तय कर पिथौरागढ़, दूसरे दिन पिथौरागढ़ से 96 किमी का सफर कर धारचूला जाएगा।
पहला आधार शिविर धारचूला रहेगा। तीसरे दिन धारचूला से गुंजी, चौथे दिन गुंजी से वाया नाबी-कुटी होते हुए यात्री नाभीढांग जाएंगे। जहां गणेश पर्वत के दर्शन के बाद नाग पर्वत, व्यास गुफा, कालापानी में काली मंदिर दर्शन, नाबी पर्वत और नाभीढांग से ओम पर्वत दर्शन करेंगे।पांचवें दिन गुंजी से ज्योलीकांग जाएंगे। 102 यात्रियों ने अब तक यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। बता दें कि कैलाश मानसरोवर यात्रा भी इस बार शुरू हो रही है। उसको लेकर भी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
पौराणिक हिंदू ग्रंथों के अनुसार आदि कैलाश पंच कैलाशों में से एक माना गया है। आदि कैलाश को भगवान शिव का घर कहा जाता है। आदि कैलाश को छोटा कैलाश भी कहा जाता है। जो कि पिथौरागढ़ जिले के धारचूला तहसील में स्थित हैं। मान्यता है कि भगवान शिव व माता पार्वती इस स्थान में निवास करते हैं और उन्हें ये स्थान काफी प्रिय है। छोटा कैलाश कैलाश पर्वत की प्रतिकृति भी है।
कैलाश और आदि कैलाश पंच कैलाश का हिस्सा हैं। जो भगवान आशुतोष को समर्पित हैं. छोटा कैलाश जाने के लिए श्रद्धालुओं को किसी वीजा की जरूरत नहीं पड़ती है और श्रद्धालु आसानी से यहां पहुंच सकते हैं। आदि कैलाश यात्रा के लिए प्रशासन द्वारा इनरलाइन पास जारी किया जा रहा है, जो आसानी से मिल जाता है। इनरलाइन पास के लिए श्रद्धालुओं को पहले आवेदन करना होता है। साल 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन किए थे। जिसके बाद से आदि कैलाश यात्रा को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह है।
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