उत्तराखंड: 65 मरीजों में हुई ब्लैक फंगस की पुष्टि, अब तक 7 लोगों की जा चुकी है जान

उत्तराखंड: 65 मरीजों में हुई ब्लैक फंगस की पुष्टि, अब तक 7 लोगों की जा चुकी है जान

देहरादून, मई 23: कोरोना संक्रमण के बाद अब ब्लैक फंगस (म्यूकोरमाइकोसिस) इस तरह भी देश में जमकर कहर बरपा रहा है। तो वहीं, उत्तर प्रदेश के बाद अब उत्तराखंड सरकार ने भी ब्लैक फंगस को महामारी घोषित कर दिया है। हालांकि, ब्लैक फंगस के उत्तराखंड में बड़ी संख्या में मरीज भी सामने आ रहे हैं। उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, प्रदेश में ब्लैक फंगस के कुल 65 मरीजों का पता चला है, जिनमें से 61 मरीज एम्स ऋषिकेश में भर्ती हैं। तो वहीं, 22 मई तक ब्लैक फंगस से सात लोगों की मौत हो चुकी है।

65 patients have been detected with black fungus in Uttarakhand

65 मरीजों में हुई ब्लैक फंगस की पुष्टि
उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, प्रदेश में ब्लैक फंगस (म्यूकोरमाइकोसिस) का ग्राफ तेजी से बढ़ा रहा है। अभी तक प्रदेश में 65 मरीजों में ब्लैक फंगस की पुष्टि हो चुकी है। जिसमें से 61 मरीज अकेले एम्स ऋषिकेश में मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, प्रदेश में 22 मई तक ब्लैक फंगस से सात लोगों की मौत हो चुकी है। ब्लैक फंगस कोरोना के बाद अब एक नई चुनौती के रूप में उभर कर सामने आया है। इसीलिए सरकार ने इस बीमारी को भी महामारी के रूप में नोटिफाई किया है।

हर अस्पताल को देनी होगी सूचना
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्लैक फंगस को महामारी घोषित किए जाने के बाद अब सभी सरकारी एवं प्राइवेट अस्पतालों को इस बीमारी के मरीजों के बारे में सीएमओ कार्यालय को जानकारी देनी होगी। इसके साथ ही महामारी से संबंधित सभी नियम इस बीमारी पर भी लागू होंगे। कोई भी अस्पताल इस बीमारी के मरीजों के इलाज के लिए इनकार नहीं कर सकता। सरकार जरूरत महसूस करती है तो अस्पतालों को अपने नियंत्रण में लेकर उसे डेडिकेटेड अस्पताल घोषित किया जा सकता है।

प्रदेश में उपलब्ध नहीं है ब्लैक फंगस की दवा
प्रदेश सरकार ने ब्लैक फंगस के इलाज के लिए पहले ही दवाओं का प्रोटोकाल जारी दिया है। हालांकि, ब्लैक फंगस के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा एंफोटेरेसिन-बी उपलब्ध नहीं है। ऐेसे में उत्तराखंड सरकार ने केंद्र से एंफोटेरेसिन-बी की 50 डोज मांगी थी, जिन्हें खरीदने की मंजूरी केंद्र सरकार ने दी थी। लेकिन ये सभी इंजेक्शन समाप्त हो गए हैं। बता दें कि उत्तराखंड में इस दवा को बनाने की इकाई सिडकुल हरिद्वार में है, मगर अभी तक इसकी मांग न होने के कारण उक्त इकाई ने इसका उत्पादन बंद किया हुआ है। फिलहाल प्रदेश सरकार ने इसके साथ ही दवा बनाने वाली इकाई से भी दवा फिर से बनाने का काम शुरू करने को कहा है।

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