12 IPS को दरकिनार कर योगी सरकार ने प्रशांत कुमार को बनाया था DGP, 2022 से UP को नहीं मिला फुल टाइम पुलिस चीफ

UP News: कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) प्रशांत कुमार को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। प्रदेश की योगी सरकार ने प्रशांत कुमार को सर्वोच्च वेतनमान देने का निर्णय लिया है। इस निर्णय में उनसे ऊपर रैंक वाले कम से कम 12 वरिष्ठ IPS अधिकारियों को दरकिनार कर दिया गया है।

द हिंदू की खबर के मुताबिक, सर्वोच्च वेतनमान आम तौर पर किसी राज्य में पुलिस बल के प्रमुख के लिए आरक्षित होता है। प्रशांत कुमार से पहले कार्यवाहक डीजीपी रहे डीएस चौहान को सेवानिवृत्त होने से महज एक दिन पहले वेतनमान देने का आदेश जारी किया गया था।

yogi adityanath

बता दें, प्रशांत कुमार को राज्य सरकार ने बीती 31 जनवरी को कार्यवाहक डीजीपी बनाया था। कार्यवाहक डीजीपी बनाए जाने के बाद अब यूपी सरकार ने उन्हें सर्वोच्च वेतनमान देने का निर्णय भी लिया है। इसके मुताबिक, डीजीपी को पे-मैट्रिक्स लेवल-17 (रुपये 2,25,000) प्रदान किया जाएगा।

वहीं, केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) की ओर से कई बार याद दिलाने के बावजूद उत्तर प्रदेश ने पुलिस प्रमुख के रूप में नियुक्ति के लिए पात्र वरिष्ठ अधिकारियों का पैनल नहीं बनाया है, जैसा कि संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के दिशा-निर्देशों में निर्धारित है। मई 2022 से राज्य पूर्णकालिक डीजीपी के बिना है।

उत्तर प्रदेश इस प्रथा में अकेला नहीं है। आंध्र प्रदेश, पंजाब, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड और झारखंड ने भी यूपीएससी के दिशा-निर्देशों का पालन करने के बजाय डीजीपी को "प्रभारी" नियुक्त किया है। इन राज्यों ने भी स्थायी पुलिस प्रमुखों की नियुक्ति की औपचारिक प्रक्रिया को दरकिनार कर दिया है।

दिलचस्प बात यह है कि प्रशांत कुमार को सर्वोच्च वेतनमान देने वाले आदेश को सार्वजनिक नहीं किया गया। इसके विपरीत, जब पिछले कार्यवाहक डीजीपी डीएस चौहान को 30 मार्च, 2023 को यही वेतनमान दिया गया था, तो अधिसूचना सार्वजनिक रूप से जारी की गई थी।

यूपी सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि प्रशांत कुमार के मामले में सभी मानदंडों का पालन किया गया है। अधिकारी ने कहा, "ये आंतरिक आदेश हैं और नियमों और विनियमों के अनुसार जारी किए गए हैं।" 23 सितंबर 2023 को यूपीएससी ने राज्य डीजीपी की नियुक्ति के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए था।

हालांकि, इन दिशा-निर्देशों के अनुसार, इस पद के लिए केवल उन्हीं अधिकारियों पर विचार किया जाएगा, जिनकी सेवा अवधि कम से कम छह महीने शेष हो। वहीं, 6 सितंबर को इसने झारखंड को एड-हॉक आधार पर कार्यवाहक डीजीपी के रूप में अनुराग गुप्ता की नियुक्ति के खिलाफ याचिका पर नोटिस जारी किया। गुप्ता ने 27 जुलाई को अजय कुमार सिंह की जगह ली थी।

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि अनुराग गुप्ता की नियुक्ति ने प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ में सुप्रीम कोर्ट के फैसले और पुलिस सुधारों से संबंधित अवमानना ​​कार्यवाही में 16 जनवरी, 2023 के आदेश का उल्लंघन किया है।

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