बाबा रामदेव के लिए के लिए हजारों पेड़ काटने का आरोप, कोर्ट ने योगी सरकार से पूछा सवाल
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और यमुना एक्सप्रेस वे जिस तरह से अलग-अलग बयान दे रही है, उसपर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने योगी सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने प्राधिकरण से पूछा है कि क्या योग गुरु बाबा रामदेव की कंपनी को गौतम बुद्ध नगर में प्रत्यक्ष या अपरोक्ष रूप से फूड कोर्ट के लिए जमीन दी गई है या नहीं? कोर्ट इस बाबत आज प्राधिकरण से जवाब दाखिल करने को कहा है। इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज तरुण अग्रवाल और जस्टिस अजय भनोट ने औसाफ की याचिका पर सुनवाई करते हुए इस बाबत प्राधिकरण से जवाब मांगा है।

याचिका में कहा गया है कि पट्टे पर याचियों को जमीन दी गई है जोकि पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड कंपनी को दिया गया है, साथ ही आरोप लगाया गया है कि इस जमीन पर लगे हजारों पेड़ों को काट दिया गया। कंपनी को 4500 एकड़ जमीन आवंटि की गई है। एक तरफ जहां प्राधिकरण का कहना है कि उसने एक भी पेड़ नहीं काटे हैं, ना ही आवंटित स्थल पर कोई पेड़ था। लेकिन प्राधिकरण के बयान से इतर प्रदेश सरकार का कहना है कि प्राधिकरण के अधिकारियों ने आवंटित स्थल पर खुद जाकर पेड़ कटवाए हैं।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि ना तो प्राधिकरण और ना ही प्रदेश सरकार यह बताने को तैयार है कि आवंटित स्थल पर जेसीबी से पेड़ काटे गए थे या नहीं। आपको बता दें कि कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई तक विकास कार्य पर रोक लगा रखी है साथ ही इस आवंटित स्थल पर किसी भी तरह का काम करने को मना किया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि फूड प्लाजा व उद्योग के लिए छह हजार पेड़ों को काट दिया गया, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा है। याचिका में कहा गया है कि 200 बीघा जमीन पौधारोपण के लिए कंपनी को 30 साल के लिए लीज पर दी गई है।
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