Women Quota Row: विपक्ष के रवैये की तुलना UP CM योगी आदित्यनाथ ने द्रौपदी के 'चीरहरण' से की, गिनाए पुराने आरोप
Women Quota Row UP CM Yogi Adityanath Comment: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि INDIA गठबंधन ने महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में एक तिहाई आरक्षण देने वाले ऐतिहासिक संविधान संशोधन विधेयक को जानबूझकर हराने की कोशिश की। उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के व्यवहार की तुलना महाभारत की द्रौपदी के चीरहरण से करते हुए कहा कि यह घटना महिलाओं के प्रति विपक्ष की 'असलियत' उजागर कर देती है।
रविवार को (19 अप्रैल) लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस (TMC) और DMK समेत पूरे INDIA गठबंधन पर 'महिला-विरोधी' होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब देश महिलाओं को राजनीतिक सत्ता में उचित हिस्सा देने जा रहा था, तब विपक्ष ने एक बार फिर पुरानी आदत के मुताबिक बाधा डाली।

Women Reservation Bill: क्या हुआ था 17 अप्रैल को लोकसभा में?
शुक्रवार 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए गए थे:
- संविधान (131वां संशोधन) विधेयक
- परिसीमन विधेयक 2026
- केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक 2026
इनका उद्देश्य था-
- लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 816 करना
- 2011 की जनगणना के आधार पर नए सिरे से परिसीमन करना
- 2029 के चुनाव से लोकसभा और सभी विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना
सरकार का तर्क था कि सीटें बढ़ाने से कोई मौजूदा सांसद या विधायक अपनी सीट नहीं खोएगा और महिलाओं को बिना किसी को विस्थापित किए प्रतिनिधित्व मिल जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने दक्षिणी राज्यों को आश्वासन भी दिया था कि उनका प्रतिनिधित्व भी उसी अनुपात में बढ़ेगा।
लेकिन मतदान के समय विधेयक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका। 298 सदस्यों ने पक्ष में वोट दिया, जबकि 230 ने विरोध में। दो-तिहाई बहुमत के लिए करीब 352 वोट जरूरी थे। विधेयक गिर गया और सरकार को इसे वापस लेना पड़ा। यह मोदी सरकार के कार्यकाल में पहला ऐसा मौका था जब कोई महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयक सदन में पास नहीं हो सका।
UP CM Yogi Adityanath का तीखा हमला
प्रेस कॉन्फ्रेंस में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 'जब सदन में जो दृश्य देखने को मिला, वह हमें महाभारत की द्रौपदी के चीरहरण की याद दिलाता है। INDIA गठबंधन (कांग्रेस, सपा, TMC, DMK आदि) का व्यवहार और उनकी टिप्पणियां साफ बता रही हैं कि वे महिलाओं के सशक्तिकरण के खिलाफ हैं।'
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि 2014 में सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कहा था कि देश में सिर्फ चार जातियां हैं, महिलाएं, गरीब, युवा और किसान। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग जाति की राजनीति के नाम पर देश को लूटते रहे, उन्होंने इस घोषणा को चुनौती मान लिया और हर प्रगतिशील कदम का विरोध किया।
विपक्ष पर पुराने आरोप दोहराए
योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर कई पुराने मुद्दे भी उठाए-
- शाह बानो मामले में कांग्रेस ने मुस्लिम महिलाओं को न्याय से वंचित रखा। तीन तलाक पर प्रतिबंध लगाने का काम मोदी सरकार ने किया।
- सपा और आरजेडी ने 1990 के दशक से ही महिला आरक्षण का विरोध किया। 1998 में आरजेडी सांसद ने सदन में विधेयक फाड़ दिया था।
- जब 2010 में राज्यसभा ने विधेयक पास किया, तब भी कांग्रेस ने लोकसभा में इसे कभी पेश नहीं किया, भले ही बहुमत था।
- अब सपा मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग आरक्षण की मांग कर रही है, जबकि संविधान सभा ने धर्म आधारित आरक्षण को सिरे से खारिज कर दिया था। बाबासाहेब अंबेडकर और सरदार पटेल ने इसका कड़ा विरोध किया था।
मुख्यमंत्री ने पूछा, 'क्या यह विधेयक पुरुषों के अधिकारों का हनन करता है? नहीं। यह तो महिलाओं को सशक्त बनाने का प्रगतिशील कदम है।'
महिलाओं में भारी गुस्सा
योगी आदित्यनाथ ने दावा किया कि देश की 'आधी आबादी' में विपक्ष के इस रवैये को लेकर भारी गुस्सा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और INDIA गठबंधन के सहयोगी दलों (सपा, RJD, TMC, DMK) ने इस 'पाप' में हिस्सा लिया है। केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी भी इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद रहीं और उन्होंने महिला आरक्षण को राष्ट्रीय हित का मुद्दा बताया।
राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी
17 अप्रैल 2026 की घटना महिला आरक्षण के 30 साल पुराने इतिहास को दोहराती है। 1996 से लेकर अब तक हर सरकार में यह विधेयक किसी न किसी बहाने अटका रहा। कभी ओबीसी कोटा, कभी परिसीमन, कभी क्षेत्रीय असंतुलन का मुद्दा उठाया गया।
जबकि जमीनी स्तर पर पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण मिला हुआ है और वे सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रही हैं, संसद-विधानसभा जैसे उच्च स्तर पर सत्ता साझा करने में राजनीतिक दल अभी भी हिचकिचा रहे हैं। योगी आदित्यनाथ की द्रौपदी चीरहरण वाली टिप्पणी विवादास्पद जरूर है, लेकिन एक बड़े सवाल को फिर से उठा दिया है कि क्या महिलाओं को राजनीतिक सत्ता में उनका हक देने के लिए देश को अभी भी और इंतजार करना पड़ेगा? देश की महिलाएं अब इस सवाल का जवाब खुद तय करने वाली हैं।
(PTI इनपुट के साथ)












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