अध्यक्ष पद की उलझन के बीच क्या प्रियंका गांधी को मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी, समझिए क्या हैं नए संकेत
लखनऊ, 24 अगस्त : उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करने वाली कांग्रेस यूपी में कई चुनौतियों से जूझ रही है। एक तरफ जहां कांग्रेस में अध्यक्ष पद को लेकर उलझन की स्थिति बनी हुई है वहीं दूसरी ओर सूत्रों की माने तो कांग्रेस का आलाकमान प्रियंका गांधी के कद को लेकर पार्टी के भीतर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कांग्रेस का एक धड़ा प्रियंका का दायरा दायरा बढ़ाने की मांग कर रहा है। यानी यूपी के साथ ही कुछ अन्य राज्यों का प्रभार भी उनको पकड़ाया जा सकता है। कांग्रेस के सूत्रों की माने तो कांग्रेस के भारत जोड़ो अभियान से पहले यूपी कांग्रेस को प्रदेश अध्यक्ष मिल सकता है। हालांकि कोई भी बड़ा नेता कांग्रेस की कमान संभालने के लिए तैयार नहीं हो रहा है।

क्या प्रिंयका गांधी का दायरा बढ़ाएगी कांग्रेस
कांग्रेस के एक पदाधिकारी ने बताया कि जहां तक सवाल है प्रियंका से यूपी का प्रभार वापस लिए जाने का तो हमें नहीं लगता कि पार्टी ऐसा करेगी। हां यह जरूर है कि प्रियंका का दायरा बढ़ाया जा सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि पार्टी मानती है कि प्रियंका गांधी को किसी एक राज्य तक सीमित रखना सही नहीं है। उनके कद का इस्तेमाल पूरे देश में किया जा सकता है। इसलिए उनके कद को बढ़ाने का फैसला भी आलाकमान ले सकता है। हमें नहीं लगता कि प्रियंका का प्रभार वापस लिया जाएगा। सूत्रों का हालांकि यह कहना है कि पार्टी इस बात पर भी विचार कर रही है कि प्रियंका का यूपी प्रभार वापस लेकर उनके कद को बढ़ाया जाए।

प्रिंयका को अध्यक्ष बनाने के पक्ष में है कांग्रेस का एक धड़ा
कांग्रेस संकट के दौर से गुजर रही है। इस संकट के बीच कांग्रेस ने भारत जोड़ो यात्रा निकालने की घोषणा की है। इसकी अगुवाई पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी करेंगे। हालांकि कांग्रेस का अगला अध्यक्ष कौन होगा इसको लेकर कांग्रेस उलझन में फंसी हुई है। कांग्रेस का एक धड़ा पार्टी की कमान प्रियंका गांधी को सौंपने की मांग कर कर रहा है। इस धड़े में राजीव शुक्ला और प्रमोद तिवारी जैसे नेता शामिल हैं। हालांकि प्रियंका खुद कांग्रेस की कमान संभालने के लिए तैयार हैं या नहीं इस बात को लेकर अभी संशय की स्थिति बनी हुई है। कांग्रेस सूत्रों की माने तो आने वाला समय कांग्रेस के लिए काफी अहम साबित होने वाला है।

आठ साल से सत्ता से बाहर है कांग्रेस
कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि दरअसल कांग्रेस आठ साल से सत्ता से बाहर है, लेकिन उसने अभी तक पार्टी के बारे में भाजपा की रणनीति पर ध्यान नहीं दिया है। इन आठ सालों में कांग्रेस के बहुत से नेता कांग्रेस को छोड़कर बीजेपी या अन्य पार्टियों में चले गए। चाहे यूपी हो या फिर दूसरे राज्य हर जगह कई वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस को छोड़ने का काम किया। इन आठ सालों में कांग्रेस लगातार कमजोर साबित हुई है। अब राहुल और प्रियंका के सामने ये चुनौती है कि वो कांग्रेस को खड़ा करने के लिए नई रणनीति के तहत आगे बढ़ें और साथ ही बीजेपी की रणनीति पर भी गहरी नजर रखें। लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो रहा है।

मिशन 2022 में सफल नहीं हुई प्रियंका की रणनीति
प्रियंका गांधी यूपी का प्रभार मिलने के बाद से ही यूपी में काफी सक्रिय थीं लेकिन लाख कोशिशों के बावजूद प्रियंका गांधी को यूपी में सफलता नहीं मिली। पार्टी को केवल दो सीटों पर संतोष करना पड़ा। यूपी ही नहीं देशभर में कांग्रेस इस समय अपने सबसे बड़े बुरे दौर से गुजर रही है। प्रियंका ने विधानसभा चुनाव के दौरान यूपी में काफी मेहनत की थी और कांग्रेस की जीत की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए उन्होंने कई तरह की घोषणाएं भी की थीं लेकिन यूपी की जनता पर इसका कोई असर नहीं पड़ा।

2014 से ही अमेठी रायबरेली में सक्रिय हैं प्रियंका
कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव और उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी को 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद यूपी का प्रभार सौंपा गया था। इससे पहले स्मृति ईरानी के खिलाफ अमेठी में संभाला मोर्चा अमेठी में 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने राहुल गांधी के खिलाफ स्मृति ईरानी और आप ने अपने लोकप्रिय नेता कुमार विश्वास को मैदान में उतारा था। दोनों ने मिलकर राहुल को कड़ी चुनौती दी। हालांकि उसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने फिर स्मृति इरानी को टिकट दिया और इस बार वह राहुल गांधी को हराने में कामयाब रहीं। हालांकि प्रियंका इस समय कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव हैं और यूपी की प्रभारी भी हैं। उनके उपर 2022 में कांग्रेस को जिताने का बड़ा दारोमदार था लेकिन वह सफल नहीं हुईं।












Click it and Unblock the Notifications