अखिलेश से तलाक के बाद ओम प्रकाश राजभर को अपनाने का जोखिम उठाएंगी मायावती ?
लखनऊ, 25 जुलाई: उत्तर प्रदेश में चल रही सियासी उठापटक के बीच अब नए समीकरण बनते बिगड़ते दिखाई दे रहे हैं। तीन महीने पहले समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने कड़ी मेहनत करके एक सियासी गठबंधन तैयार किया था लेकिन चुनाव के बाद वह कुनबा बिखर गया है। कुछ दिनों पहले महान दल के नेता केशव देव मौर्य ने अखिलेश से अपना नाता तोड़ लिया था तो अब शिवपाल-राजभर को भी अखिलेश ने नया रास्ता चुनने का फरमान जारी कर दिया है। इसके बाद से ही एसबीएसपी के मुखिया राजभर अब बीएसपी चीफ मायावती पर डोरे डालते हुए दिखाई दे रहे हैं। लेकिन मायावती के तरफ से अभी गठबंधन को लेकर कोई बयान नहीं आया है। मायावती के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वह राजभर पर विश्वास जताने का खतरा मोल लेंगी।

अखिलेश से तलाक के बाद नया ठिकाना ढूंढ रहे राजभर
तीन महीने पहले विधानसभा चुनाव के दौरान अखिलेश और राजभर के बीच जो गठबंधन बना था वो अब बिखर गया है। राजभर के लगातार दबाव बनाने के बाद अब अखिलेश ने उनको नया रास्ता चुनने को कह दिया है। ऐसे में अब राजभर नया ठिकाना तलाश रहे हैं। दरअसल राजभर अब बसपा की मुखिया मायावती को साधने में जुटे हैं। उन्हें लग रहा है कि मायावती उनकी बात मानेंगी और उनके साथ गठबंधन जरूर करेंगी। राजभर का यह कहना है कि जल्द ही गठबंधन को लेकर मायावती से बात होगी। लेकिन मायावती की तरफ से अभी इस पर कोई बयान नहीं आया है। मायावती की चुप्पी किस ओर इशारा कर रही है यह आने वाला समय बताएगा।

मायावती क्या राजभर पर भरोसा करने का जोखिम लेंगी
बसपा की मुखिया मायावती हमेशा एक हनक वाली नेता के तौर पर जानी जाती रही हैं। ऐसा कहा जाता है कि वह न तो ज्यादा बोलती हैं और न ही उनको यह पसंद है कि उनको लेकर कोई अनाप शनाप बयानबाजी करे। वह बीएसपी में हमेशा ही वन मैन आर्मी की तर्ज पर काम करती रही हैं। लेकिन जिस तरह से राजभर उनके करीब आने की कोशिश कर रहे हैं उसके बाद ये सवाल उठ रहा है कि क्या मायावती राजभर जैसे बड़बोले नेता को साथ लेने का जोखिम उठाएंगी। बसपा के एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, '' दरअसल राजभर की छवि एक ऐसे नेता की बन गई है जिसपर हद से ज्यादा विश्वास करना अपने लिए ही घात क साबित हो सकता है। ऐसे में मायवती उन पर विश्वास जताएंगी या नहीं यह एक बड़ा सवाल है।''

लगातार पाला बदलने का रहा है राजभर का ट्रैक रिकॉर्ड
बसपा के नेता ने आगे बताया कि दरअसल राजभर का ट्रैक रिकॉर्ड भी ऐसा है कि उन पर विश्वास करना इतना आसान नहीं होगा। वह कभी बीजेपी के साथ रहते हैं तो कभी शिवपाल और ओवैसी के साथ दिखाई देते हैं। हर दरबार में उनकी उपस्थिति बनी रहती है। इस लिहाज से उनकी क्रेडिबिलिटी नहीं रह गई है। वह कब किसको छोड़ दें और किसके उपर बयानबाजी कर दें इसका कोई ठिकाना नहीं। हमें नहीं लगता कि अभी बसपा प्रमुख राजभर के साथ गठबंधन करने की इतनी जल्दी दिखाएंगी। इसकी एक वजह ये भी है कि अभी हाल फिलहाल में कोई चुनाव भी नहीं हैं जिसमें राजभर की जरूरत हो।

बीजेपी से नजदीकीयों के बीच राजभर को पचा पाएंगी मायावती
बसपा के सूत्रों की माने तो राजभर-मायावती के बीच गठबंधन में सबसे बड़ा पेंच राजभर और बीजेपी की नजदीकी ही फंसाएगी। जिस तरह वो बीजेपी के इशारे पर खेलते नजर आते हैं उससे उनके साथ गठबंधन करना खतरे से खाली नहीं है। मायावती को इस बात भी अंदाजा है कि राजभर जैसे नेताओं को बीजेपी बसपा में प्लांट कर सकती है। इसलिए हर पहलू और हर समीकरण को गौर करने के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा। दरअसल मायावती भी बीजेपी पर हमेशा हमलावर रहती हैं लेकिन उनपर भी सपा ने आरोप लगाया था कि वह अंदरखाने बीजेपी की मदद करती हैं। हालांकि कुल मिलाकर यह देखना दिलचस्प होगा कि मायावती राजभर को लेकर क्या कदम उठाती हैं।

राजभर को साथ लेने से मायावती को कितना होगा फायदा
एसबीएसपी के चीफ ओम प्रकाश राजभर ने मायावती के साथ गठबंधन करने की बात कही है लेकिन राजभर को साथ लेने से मायावती को कितना फायदा होगा यह भी बड़ा सवाल है। दरअसल राजभर को पूर्वांचल का बड़ा नेता माना जाता है। पूर्वांचल के एक दर्जन जिलों में राजभर समुदाय के लोग रहते हैं। इसी समुदाय को ताकत बनाकर राजभर अपनी राजनीति करते हैं। मायावती को भी पूर्वांचल में एक सहयोगी की तलाश है जो अखिलेश और बीजेपी के साथ लड़ने में उनकी मदद करे। पिछले चार अहम चुनावों में मायावती को हार का सामना करना पड़ा है इसलिए वह राजभर को साथ लाकर पूर्वांचल में अपनी स्थिति बेहतर करने का जोखिम ले सकती हैं।












Click it and Unblock the Notifications